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इंडिया गुट की लीडरशिप के लिए उछला ममता-स्टालिन का नाम, राहुल गांधी को फिर चुनौती

INDIA ब्लॉक में राहुल गांधी के नेतृत्व पर नए सिरे से सवाल उठाए गए हैं. फर्क सिर्फ ये है कि इस बार ये सब विपक्षी गठबंधन के भीतर नहीं बल्कि बाहर से हो रहा है - और एक फर्क यह है कि इस बार ममता बनर्जी के साथ साथ नेतृत्व के लिए एमके स्टालिन का नाम भी सुझाया गया है.

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राहुल गांधी को अब ममता बनर्जी के साथ साथ एमके स्टालिन से भी चुनौती मिल सकती है. (Photo: PTI)
राहुल गांधी को अब ममता बनर्जी के साथ साथ एमके स्टालिन से भी चुनौती मिल सकती है. (Photo: PTI)

राहुल गांधी के नेतृत्व को नए सिरे से चुनौती मिली है. ऐसा तब भी हो रहा है जब वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. अभी अभी खत्म हुए संसद के बजट सेशन में अपने भाषण से सत्ता पक्ष को बचाव की मुद्रा में ला दिया था. कई दिनों तक राहुल गांधी एजेंडा सेट कर रहे थे, और केंद्र सरकार के सीनियर मंत्री आगे बढ़कर काउंटर कर रहे थे. 

लेकिन, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में फिर से राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर चुनौती दी जाने लगी है. दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भी एक बार राहुल गांधी की जगह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इंडिया ब्लॉक का नेता बनाए जाने की सलाह और मांग शुरू हो गई थी. विपक्षी खेमे के सीनियर नेताओं का सपोर्ट मिलने से उत्साहित ममता बनर्जी ने कोलकाता से ही इंडिया ब्लॉक को लीड करने की बात कही थीं, लेकिन फिर विधानसभा चुनावों को देखते हुए खामोश हो गई थीं. 

अब इंडिया ब्लॉक के अंदर से तो नहीं, लेकिन बाहर से नेतृत्व को लेकर सुझाव आने लगे हैं. शुरुआत हुई है कांग्रेस की विवादित शख्सियत मणिशंकर अय्यर की तरफ से, जिसे आगे बढ़ाया है पूर्व प्रधानमंत्री के सलाहकार रह चुके संजय बारू ने - और, ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व सौंपे जाने की सलाह दी है. 

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ये सब ऐसे वक्त हो रहा है जब कुछ ही दिन बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा के लिए चुनाव होने जा रहे हैं - 

INDIA ब्लॉक में राहुल बनाम ममता बनर्जी

देश की राजनीति पर संजय बारू के बयान का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि वो यूपीए की सरकार में तत्कालीन प्रधानमंत्री के मीडिया एडवाइजर रह चुके हैं. इंडिया ब्लॉक में भी करीब करीब वही राजनीतिक दल हैं, जो यूपीए का हिस्सा रहे हैं. ममता बनर्जी भी यूपीए का हिस्सा रह चुकी हैं, लेकिन बाद में नाता तोड़ लिया था. 

ममता बनर्जी हाल फिलहाल तो राहुल गांधी को चैलेंज नहीं कर रही हैं, लेकिन कांग्रेस के प्रति उनका रवैया नहीं बदला है. ममता बनर्जी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने में तो कांग्रेस से मदद चाहती हैं, लेकिन ऐन उसी वक्त वह पश्चिम बंगाल के चुनाव मैदान में अकेले उतरने का ऐलान भी दोहराती हैं. तृणमूल कांग्रेस के अकेले चुनाव मैदान में उतरने का मतलब इंडिया ब्लॉक सहित कांग्रेस को भी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तरफ से नो-एंट्री.

संजय बारू ने ममता बनर्जी को सेल्फ मेड लीडर बताते हुए टीएमसी नेता को इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व सौंपने की सलाह दी है. संजय बारू अपनी किताब 'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' के लिए चर्चित रहे हैं. किताब में संजय बारू ने बतौर प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार अपने अनुभवों के बारे में बताया है. 

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एक अखबार में अपने लेख में संजय बारू ने ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन का नेता बनाए जाने के पीछे ठोस दलील भी दी है. संजय बारू का मानना है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की केमिस्ट्री वैसी बिल्कुल नहीं है, जैसी सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के बीच उन्होंने अनुभव किया है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी से कांग्रेस के मुकाबले न कर पाने के पीछे भी संजय बारू वही वजह मानते हैं. अपनी सलाह के सपोर्ट में संजय बारू का कहना है, ममता बनर्जी एक राजनीतिक पार्टी और सरकार दोनों का नेतृत्व करने वाली एकमात्र महिला हैं. और कहते हैं, वह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर नेताओं की मौजूदा पीढ़ी से अलग हैं.

केंद्र और देश के कई राज्यों में सत्ताधारी बीजेपी को एक पुरुष-प्रधान राजनीतिक दल बताते हुए संजय बारू समझाते हैं, महिला राजनेता के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन ही बीजेपी के महिला वोट बेस में सेंध लगा सकता है. 

ममता बनर्जी को सेल्फ-मेड और पहली पीढ़ी की नेता बताते हुए संजय बारू ने लिखा है, काफी वक्त हो गया जब हमें कोई महिला प्रधानमंत्री मिली हो. इंदिरा गांधी भारत की अब तक एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रही हैं. 

तृणमूल कांग्रेस को ऐसी राय तो पसंद आएगी ही. ममता बनर्जी को लेकर संजय बारू की राय पर सांसद और राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की उपनेता सागरिका घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, ये ऐसा विचार है, जिसका समय आ गया है... पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार ने ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन INDIA का नेतृत्व करने की कॉल दी है.

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INDIA ब्लॉक में राहुल बनाम स्टालिन

ममता बनर्जी का नाम आने से पहले इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व के लिए मणिशंकर अय्यर की तरफ से भी सुझाव आ चुका है. दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के नेता होते हुए भी मणिशंकर अय्यर डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व सौंपे जाने की पैरवी कर रहे हैं.

केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत की संभावना पर शक जता चुके मणिशंकर अय्यर कह रहे हैं कि राहुल भूल गए हैं कि मैं पार्टी का मेंबर हूं... मैं गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं हूं. ये सब सुनने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने X पर लिखा है, मणिशंकर अय्यर का पिछले कुछ साल से कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है... वे अपनी निजी हैसियत में बोलते और लिखते हैं. ध्यान रहे, मणिशंकर अय्यर ने केरल में पी. विजयन के फिर से मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी की है. 

अक्सर अपने बयानों की वजह से विवादों में रहने वाले मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी के बारे में जो राय जाहिर की है, वो संजय बारू से थोड़ा अलग है. राहुल गांधी के नेतृत्व को संजय बारू की तरह मणिशंकर अय्यर पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं. 

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न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में मणिशंकर अय्यर कहते हैं, अगर इंडिया ब्लॉक को मजबूत करना है, तो एमके स्टालिन सबसे बेहतर शख्स हैं. राहुल गांधी भारत के प्रधानमंत्री बन सकते हैं, बशर्ते कोई ऐसा हो जो अपना पूरा समय इंडिया ब्लॉक को मजबूत करने, और उसे एकजुट रखने में लगाए.

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि पिछले साल एमके स्टालिन ने जिस तरह देश में फेडरलिज्म से जुड़ा मुद्दा उठाया, ये बता रहा है कि वह इंडिया ब्लॉक के चेयरमैन बनने के लिए सबसे योग्य नेता हैं. और आगे जोड़ते हैं, एमके स्टालिन की एक बड़ी खासियत है कि वह राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के रास्ते में नहीं आएंगे.

राहुल के आगे कोई और टिकता तो है नहीं

यह ठीक है कि राहुल गांधी के नेतृत्व को विपक्षी खेमे में हर कुछ दिन बाद चैलेंज कर दिया जा रहा है, लेकिन अभी पिछले ही महीने का MOTN सर्वे ऐसी सारी चुनौतियों को सिरे से खारिज करता है. इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी के साथ साथ ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल को लेकर सवाल पूछे गए थे. 

चुनावों के दौरान वैसे तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी राहुल गांधी के नेतृत्व को चैलेंज करते देखे गए हैं - लेकिन सर्वे से मालूम हुआ कि तीनों की लोकप्रियता का लेवल लगभग बराबर ही है.

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जनवरी, 2026 के MOTN सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 29 फीसदी लोगों की पहली पसंद राहुल गांधी पाए गए. राहुल गांधी के बाद दूसरे नंबर पर ममता बनर्जी सर्वे में शामिल लोगों की पसंद बनी थीं. वैसे ही अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव को ममता बनर्जी से थोड़े कम लोगों ने अपनी पसंद बताया था. 

आंकड़ों के हिसाब से देखें तो राहुल गांधी के बहुत बाद 7 फीसदी लोगों ने ही ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व के लिए सही नेता बताया था. सर्वे में शामिल 6 फीसदी लोग अरविंद केजरीवाल को, और 6 फीसदी ही अखिलेश यादव को भी इंडिया ब्लॉक के नेता के तौर पर देखना चाहते हैं, ऐसा मालूम हुआ - वैसे मणिशंकर अय्यर और संजय बारू के नजरिए को भी तवज्जो तो मिलनी ही चाहिए.

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