बिहार में सत्ता के हस्तानांतरण की पूरी पटकथा लिखी जा चुकी है. सिनेमा के स्क्रीनप्ले की तरह पूरी क्रोनोलॉजी स्क्रिप्टेड है. कब और कहां क्या होगा, जगह और तारीखें भी तय हैं. बस, खरमास के खत्म होने का इंतजार है. 10 अप्रैल से लेकर 15 अप्रैल तक पूरी तस्वीर सामने आ जाएगी.
बीजेपी नेतृत्व की तरफ से हमेशा ही सरप्राइज दिया जाता रहा है, लेकिन बिहार के मामले में ऐसा होने की कम ही संभावना लगती है. मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और महत्वपूर्ण विभागों का बंटवारा भी मोटे तौर पर तय हो चुका है. फिलहाल बीजेपी की तरफ से कुछ भी ऐसा वैसा नहीं होने जा रहा है, जो जेडीयू नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए परेशान करने वाला हो.
कमान बदलने की नींव तो तभी रख दी गई थी, जब विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनी थी. बिहार सरकार में गृह विभाग छोड़कर नीतीश कुमार ने जो संकेत दिए थे, समृद्धि यात्रा में बार बार कंफर्म करते रहे. करीब करीब वैसे ही जैसे लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए में लौटने के बाद बताते रहे कि आगे से कहीं नहीं जाएंगे.
8 मार्च को निशांत कुमार का जेडीयू में शामिल होना भी स्क्रिप्ट का ही हिस्सा था, और अब उनको नीतीश कुमार की विरासत का एक हिस्सा देकर सर्वमान्य नेता बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है. निशांत को एक हिस्सा इसलिए क्योंकि एक हिस्सा तो बीजेपी के खाते में ट्रांसफर होना है और बीजेपी के मुख्यमंत्री के रूप में सामने आना है.
नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी
पूरे मन से कहें, या बेमन से. नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी का फैसला तो पहले ही हो गया था, बचे हुए वक्त में आजमाने की कोशिशें हो रही थीं. आखिरकार नीतीश कुमार भी सियासत की उसी जमात में शामिल हो गए, जिसमें कहा जाता है कि वारिसत तो बेटा ही होगा. यह बात तो उनके 'भाई जैसे दोस्त' लालू यादव ने पप्पू यादव को सुनाते हुए तेजस्वी यादव के लिए कही थी, लेकिन आंशिक रूप से नीतीश कुमार पर भी लागू हो गई है.
आंशिक रूप से इसलिए क्योंकि बेटा होने के बावजूद सिर्फ निशांत कुमार ही नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी नहीं होंगे. निशांत कुमार उत्तराधिकार में हिस्सेदार भर होंगे. नीतीश कुमार के सुशासन की विरासत वाला हिस्सा बीजेपी के खाते में जाएगा. हां, निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाकर सुशासन में भी पार्टनर बनाया जाएगा.
निशांत कुमार के पास संपत्ति के अधिकार की तरह नीतीश कुमार के अनुभवों से अभिसिंचित जनता दल यूनाइटेड की कमान भी होगी. जेडीयू के एक सूत्र के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, 'निशांत कुमार वरिष्ठ नेताओं, साथियों, विधायकों, जेडीयू पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार और सक्रिय रूप से संवाद कर रहे हैं. यह जेडीयू नेतृत्व के लिए साफ तौर पर संकेत है कि वे लोग निशांत कुमार को अपने नेता के रूप में स्वीकार करें, जबकि नीतीश कुमार पार्टी का मार्गदर्शन करते रहेंगे. निशांत कुमार के उपमुख्यमंत्री बनने की पूरी तैयारी है. उन्हें महत्वपूर्ण विभागीय जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं.'
अपनी वसीयत में सुशासन वाला हिस्सा किसे मिलना है, नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के दौरान बार बार बताते रहे. समृद्धि यात्रा में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी पहले के कार्यक्रमों की तरह साथ साथ ही चल रहे थे, लेकिन अब उनको ज्यादा अहमियत मिलने लगी थी.
1. समृद्धि यात्रा के दौरान हर किसी ने महसूस किया कि नीतीश कुमार ऐसे मजबूत इशारे कर रहे हैं कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी उनके उत्तराधिकारी होंगे. शुरुआत तब हुई जब 12 मार्च को पूर्णिया में समृद्धि यात्रा के दौरान नीतीश कुमार ने लोगों को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी की ओर इशारा किया, और बोले, 'अब हमारे काम को यही लोग आगे बढ़ाएंगे.' मंच पर उस वक्त सम्राट चौधरी के साथ साथ विजय चौधरी भी मौजूद थे.
2. 24 मार्च को समृद्धि यात्रा के लिए नीतीश कुमार रोहतास के डेहरी पहुंचे थे. अपना भाषण खत्म करने से ठीक पहले नीतीश कुमार डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास गए, और कंधे पर हाथ रखकर लोगों को खड़ा होने का इशारा किया. साफ तौर पर कुछ कहा तो नहीं, लेकिन लोगों से हाथ उठाकर सम्राट चौधरी का सम्मान करने का संकेत दिया.
कार्यक्रम के अंत में भी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से सम्राट चौधरी के बगल में खड़े होकर उनके कंधे पर हाथ रखा और लोगों से कहा, 'एक बार हाथ उठाकर बताइए, सब कुछ ठीक है ना.'
3. उससे पहले, गयाजी में मंच से लोगों को संबोधित करने के दौरान बीच में ही नीतीश कुमार डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास पहुंच गए. उस दिन भी नीतीश कुमार ने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखा, और वहां मौजूद लोगों से हाथ उठाने और सपोर्ट करने की अपील की.
नीतीश कुमार ने कहा, बिहार बहुत आगे बढ़ेगा. और, लोगों से मुखातिब होकर बोले, ‘आप हाथ उठाइए, मैं आपको बधाई देता हूं.’
जब इतना सब हो चुका है, तो कयास लगाने या जानने समझने के लिए बहुत कुछ बचा तो है नहीं - फिर भी, जब तक आधिकारिक घोषणा न हो जाए. बातें हैं, बातों का क्या.
खरमास बाद बिहार में नई सरकार
बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनने के बाद सम्राट चौधरी ने नीतीश कु्मार को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए कसम खाई थी. तब नीतीश कुमार महागठबंधन के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने पलटी मारी और एनडीए के मुख्यमंत्री बन गए. और, बीजेपी सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का डिप्टी सीएम बना दिया.
विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी पर तरह तरह के आरोप लगाए, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा. बीजेपी को तो छप्पर फाड़ सीटें मिलीं ही, सम्राट चौधरी भी जीते. फिर से डिप्टी सीएम बनाए गए, लेकिन एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी मिली.
सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के लव-कुश समीकरण में फिट बैठते हैं. बीजेपी को नीतीश कुमार की सुशासन वाली विरासत पर पूरी तरह काबिज होना है - और पूरी रणनीति उसी हिसाब से बनाई गई है.
नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली पहुंचेंगे. 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में नीतीश कुमार शपथ लेंगे. और उसी दिन, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की अध्यक्षता में एक अति महत्वपूर्ण मीटिंग बुलाई गई है. दिल्ली की बैठक में बीजेपी के सारे दिग्गज शामिल होने वाले हैं. बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, संजय जायसवाल, भीखू भाई दलसानिया, नागेन्द्र, दिलीप जायसवाल और मंगल पांडेय.
दिल्ली की मीटिंग के बाद नीतीश कुमार पटना लौट जाएंगे. खबर है कि 15 से 20 अप्रैल के बीच नई सरकार कामकाज संभाल लेगी. नीतीश कुमार पटना में बन रहे 7, सर्कुलर रोड के मार्गदर्शक मंडल से आशीर्वाद रूपी दिशानिर्देश देते रहेंगे.