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ममता बनर्जी को SIR में खामियां नजर आईं या बिहार जैसे नतीजे का खतरा?

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के एसआईआर के खिलाफ सड़क से अदालत तक जंग तेज कर दी है. चुनाव आयोग से तत्काल प्रभाव से एसआईआर प्रकिया रोकने के लिए वो लगातार चिट्ठियां भी लिख रही हैं, और लोगों के बीच जाकर अपनी बात समझा रही हैं.

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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के SIR के खिलाफ सड़क से अदालत तक मुहिम तेज कर दी है. (Photo: PTI)
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के SIR के खिलाफ सड़क से अदालत तक मुहिम तेज कर दी है. (Photo: PTI)

ममता बनर्जी ने SIR के खिलाफ मुहिम तेज कर दी है. सड़क से अदालत तक. और, अब तो देश की सबसे बड़ी अदालत जाकर बहस तक करने को भी तैयार हैं. केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी के खिलाफ हमलावर ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को फिर से पत्र लिखा है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण तत्काल प्रभाव से रोक देने की मांग की है. ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं, प्रशासनिक खामियों और लोगों के मताधिकार छिन जाने की आशंका जताई है.

पश्चिम बंगाल के लोगों को हर कदम पर उनके साथ बने रहने, और लड़ाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी करने का भरोसा दिला रहीं, ममता बनर्जी एसआईआर के खिलाफ दलील देती हैं, SIR शुरू होने के बाद डर के मारे बहुत सारे लोगों की मौत हो गई... कई लोग अस्पताल में भर्ती हो गए... बंगाली बोलने वाले जब दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं, तो उनके साथ भेदभाव होता है... मैं कहना चाहती हूं कि चाहो तो मुझे मार डालो लेकिन मैं अपनी मातृ भाषा नहीं छोड़ने वाली हूं. 

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बीजेपी के चुनावी इरादे से सशंकित ममता बनर्जी का कहना है, बीजेपी के लोगों का चुनाव जीतने का हथकंडा पता चल गया है... चुनाव से पहले वे लोगों के खाते में 10 हजार रुपये भेज देंगे, और चुनाव के बाद बुलडोजर चलवा देंगे.

मुख्य चुनाव आयुक्त को ममता बनर्जी की चिट्ठी में क्या है

3 दिसंबर को ममता बनर्जी ने चार पेज का तीसरा पत्र लिखा है, जो पश्चिम बंगाल में एसआईआर के खिलाफ है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में ममता बनर्जी का आरोप है कि ये प्रक्रिया बिना सही प्लान के, बिना पूरी तैयारी के और आननफानन में शुरू की गई है. 

पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया में बहुत सारी खामियां गिनाते हुए ममता बनर्जी ने इसे फौरन रोक दिए जाने की मांग की है. 

1. ममता बनर्जी का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं, जो हमारे लोकतंत्र के मूल ढांचे और संविधान की भावना पर प्रहार करती हैं.

2. ममता बनर्जी का दावा है कि हद से ज्यादा जल्दबाजी और पर्याप्त तैयारी के बिना प्रक्रिया शुरू कर दिए जाने से ही सारी गड़बड़ी हुई है, और टास्क पूरा करने में जिन अफसरों को लगाया गया है, वे ढंग से प्रशिक्षित भी नहीं हैं. 

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3. ममता बनर्जी की चेतावनी है कि जिस तरीके से एसआईआर चल रहा है, बड़े पैमाने पर लोगों के मताधिकार छिन सकते हैं, और लोकतंत्र की नींव को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती.

4. ममता बनर्जी ने एसआइआर की सुनवाई प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल एजेंटों को मौजूद नहीं रहने देने का मुद्दा भी उठाया है. उनका कहना है कि इससे एसआइआर की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं.

5. मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से तुरंत सुधार के लिए जरूरी उपाय करने का आग्रह किया है, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि चुनाव आयोग को पहले लिखे उनके दो पत्रों के बावजूद जमीनी हालात काफी खराब हो गए हैं. 

चुनाव आयोग ने एसआईआर के पहले चरण के बाद 16 दिसंबर को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट प्रकाशित किया था. ड्राफ्ट में 58 लाख से ज्यादा नाम हटाए जाने के बाद वोटर की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ हो गई. 27 दिसंबर से शुरू हुए दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई होनी है. ये जांच चल रही है, जिसमें से 1.36 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई गई है, और 31 लाख वोटर के रिकॉर्ड मैच नहीं हो पाए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी और सरकार

टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी का कहना है कि पार्टी की तरफ से एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है. कल्याण बनर्जी के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन ने याचिका दायर की है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में खुद जाकर पैरवी करने की बात कही है. लोगों के बीच पहुंच कर ममता बनर्जी कह रही हैं, जरूरत पड़ने पर मैं सुप्रीम कोर्ट भी जाऊंगी, और जनता की ओर से पैरवी करूंगी... मैं जनता की ओर से बोलूंगी... मैं वकील भी हूं, लेकिन मैं वकील बनकर नहीं, मैं एक आम नागरिक के रूप में जाऊंगी... मैं अपने मन की बात कह सकती हूं... मैं बोलने के लिए अनुमति लूंगी... मैं अपनी ओर से दिखाऊंगी कि ग्राउंड लेवल पर क्या चल रहा है... लोगों को कैसे परेशान किया जा रहा है?

कहीं बिहार जैसे नतीजे का डर तो नहीं

ममता बनर्जी SIR के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के खिलाफ लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए हैं. ममता बनर्जी का आरोप है कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए बिहार के लोगों को पश्चिम बंगाल में वोटर बनवा रही है. ममता बनर्जी कह चुकी हैं, ‘बिहारी लोगों के नाम पश्चिम बंगाल के वोटर लिस्ट में जोड़े जा रहे हैं... बीजेपी अब वही काम पश्चिम बंगाल में कर रही है, जो काम महाराष्‍ट्र और द‍िल्‍ली में क‍िया गया... लेकिन बंगाल दिल्ली और महाराष्ट्र नहीं है... पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ये रणनीति को कामयाब नहीं होने देंगे.

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नादिया जिले की एक रैली में ने तीखे शब्दों में आरोप लगाया कि बीजेपी और केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने की कोशिश कर रही है. ममता बनर्जी ने कहा, 'अमित शाह वोटर लिस्ट से 1.5 करोड़ नाम हटाने के प्रयासों को सीधे गाइड कर रहे हैं.

SIR फॉर्म भरने को लेकर ममता बनर्जी कहती हैं, मैंने अभी तक फॉर्म फिल-अप नहीं किया है... क्यों करूं? मैं तीन बार केंद्रीय मंत्री रही हूं, सात बार सांसद रही, और आपके आशीर्वाद से तीन बार मुख्यमंत्री बन चुकी हूं... अब मुझे प्रमाणित करना होगा कि मैं नागरिक हूं या नहीं... इससे तो जमीन पर नाक रगड़ना बेहतर है.

वैसे चुनाव आयोग पहले ही साफ कर चुका है कि मुख्यमंत्री सहित जो भी संवैधानिक पदों पर हैं, उनको ‘मार्क्ड इलेक्टर’ श्रेणी में रखा जाता है. उनको सामान्य नागरिकों की तरह फॉर्म भरने की बाध्यता नहीं है. प्रधानमंत्री, सभी मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पद धारक इसी कैटेगरी में आते हैं.

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