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राहुल गांधी केरलम में मोदी-विजयन को एक साथ टार्गेट कर रहे हैं - फायदा होगा या नुकसान?

केरलम में जबरदस्त चुनावी माहौल के बीच राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक साथ निशाना साधा है. कांग्रेस नेता ने विजयन के ट्रंप की तरह मोदी के प्रभाव में होने का आरोप लगाया है. ध्यान रहे, निजी हमलों का रिजल्ट और रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है.

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केरलम के मुख्यमंत्री पी. विजयन, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (Photo: PTI)
केरलम के मुख्यमंत्री पी. विजयन, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (Photo: PTI)

केरलम में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक साथ हमला बोला है. राहुल गांधी का आरोप है कि केरलम में पहली बार सत्ताधारी LDF और बीजेपी के बीच साझेदारी देखने को मिल रही है. राहुल गांधी केरलम में कांग्रेस के साथ साथ विपक्षी गठबंधन UDF के लिए वोट भी मांग रहे हैं. जैसे जगह जगह राहुल गांधी INDIA ब्लॉक की बात करते हैं, लेकिन फिलहाल उसमें चुनावी राजनीति की घुसपैठ हो चुकी है.  

लोकसभा में राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, और विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के नेतृत्व पर भी कांग्रेस की तरफ से उनकी दावेदारी होती है. फिर भी उनके निशाने पर बार बार केरलम की लेफ्ट गठबंधन की LDF सरकार आ जाती है, जिसमें सीपीएम और सीपीआई दोनों ही शामिल हैं. राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी ऐसा ही आपसी टकराव देखने को मिला था. 

पी. विजयन को लेकर राहुल गांधी का इल्जाम है कि मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंट्रोल में हैं. और अपनी बात समझाने के लिए कहते हैं कि यह ठीक वैसे ही है, जैसे प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कंट्रोल में रहते हैं.  

केरलम में राहुल गांधी का कैंपेन

कन्नूर को वाम दलों का मजबूत किला माना जाता रहा है. 2021 के ही विधानसभा चुनाव की बात करें, तो वहां की 11 सीटों में से 9 सीटें एलडीएफ ने जीत ली थी, और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को महज दो सीटों से संतोष करना पड़ा था.  

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राहुल गांधी के रोड शो में जुटी भीड़ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाने वाली थी. लेकिन, यह जोश आखिर तक तभी कायम रह सता है, जब भीड़ का नंबर वोटों में भी तब्दील हो जाए. कुन्नूर में लेफ्ट के दो दिग्गज नेताओं की बगावत के कारण दो सीटों पर मुकाबला खासा दिलचस्प हो गया है. पय्यन्नूर और तलिपरम्बा में ये बागी नेता निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं, और यूडीएफ उनका समर्थन कर रहा है. 

अपने रोड शो के दौरान राहुल गांधी दोनों निर्दलीय नेताओं के साथ मंच भी शेयर करते देखे गए. मौके की अहमियत देख राहुल गांधी ने नेताओं की बगावत को वाम मोर्चे की अंदरूनी कमजोरी का इशारा बताया. आरोप लगाया कि सीपीएम विचारधारा से भटक चुकी है, और बीजेपी के साथ मिलीभगत कर रही है.

राहुल गांधी ने पिनाराई विजयन को घेरने के लिए अपनी तरफ से पूरी क्रोनोलॉजी समझाई. राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी और RSS का विरोध करने वाले विपक्षी नेताओं पर एक्शन होता है, लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर केरलम के मुख्यमंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं होती, न उनके बच्चों से ही पूछताछ होती है. प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि पूरे देश में सिर्फ कांग्रेस ही उन्हें चैलेंज कर सकती है.

मुख्यमंत्री विजयन को कठघरे में खड़ा करते हुए राहुल गांधी कहते हैं कि LDF सरकार अब वामपंथी नहीं बल्कि कॉर्पोरेट फंडिंग वाली सरकार बन गई है. सबरीमाला मंदिर से हुए सोना चोरी का जिक्र करते हैं, और सोने की जगह पीतल रख दिए जाने का मुद्दा उठाते हैं, और पूछते हैं, भ्रष्टाचार के ऐसे आरोपों के बाद भी ED) या सीबीआई मुख्यमंत्री से पूछताछ क्यों नहीं कर रही है? 

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और फिर, केरलम की बात वाया दिल्ली अमेरिका से जोड़ देते हैं. कहते हैं, जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को कंट्रोल करते हैं, उसी तरह प्रधानमंत्री केरलम के मुख्यमंत्री को कंट्रोल करते हैं. मुख्यमंत्री जानते हैं कि उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने की चाबी मोदी के पास है, इसलिए वे उनके खिलाफ कभी कुछ नहीं बोलते.

राहुल गांधी केरलम में पी. विजयन को वैसे ही घेरने की कोशिश करते हैं, जैसे दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को घेरते थे. हालांकि, राहुल गांधी के ऐसे सारे ही आरोपों का पी. विजयन हाल के कुछ इंटरव्यू में जवाब दे चुके हैं. 

राहुल गांधी के आरोपों से पहले आया विजयन का जवाब

हफ्ता भर पहले 80 साल के पिनाराई विजयन ने महज तीन दिनों में कम से कम 20 इंटरव्यू दिए थे. इंटरव्यू लेने वालों में टीवी चैनल और अखबारों के संवाददाताओं के अलावा यूट्यूबर्स और पॉडकास्टर्स भी शामिल थे. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों के सवाल पर विजयन का कहना था, 'ये राजनीतिक आरोप है, जो पूरी तरह निराधार है... प्रधानमंत्री से मेरा सिर्फ संवैधानिक और आधिकारिक संबंध है... बीजेपी की नीतियों के खिलाफ एलडीएफ (वामपंथ) मजबूती से खड़ा है, और कोई समझौता नहीं होगा.

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असल में, केसी वेणुगोपाल और कई कांग्रेस नेता विजयन पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ डील के आरोप लगाए थे, कह रहे थे कि विजयन बीजेपी की मदद कर रहे हैं, और उन आरोपों को लेकर ही मुख्यमंत्री से इंटरव्यू में सवाल पूछे गए थे. 

आज तक के साथ इंटरव्यू में विजयन ने कांग्रेस और राहुल गांधी को 'बीजेपी की बी-टीम' बताया था, और साफ किया कि सबरीमाला विवाद का केरलम विधानसभा चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा. राहुल गांधी के बारे में विजयन का कहना था, कुछ लोग अपने अनुभवों से भी कुछ नहीं सीखते हैं... ऐसे लोग सामान्य तो बिल्कुल नहीं होते हैं. वे भी एक दुर्लभ उदाहरण हैं. ऐसा उन लोगों के साथ होता है, जो आमतौर पर चीजों को समझने में लायक नहीं होते हैं, और राहुल गांधी इसी कैटेगरी में आते हैं.

क्या राहुल गांधी दिल्ली चुनाव जैसी रणनीति अपना रहे हैं? जैसे दिल्ली में केजरीवाल के शीशमहल और शराब घोटाले को उछाल रहे थे? लेकिन फिर, अरविंद केजरीवाल भी पूछने लगे थे कि आखिर गांधी परिवार के लोगों को केंद्रीय जांच एजेंसियां गिरफ्तार क्यों नहीं करतीं.

एक इंटरव्यू में केरलम के मुख्यमंत्री विजयन ने दिल्ली चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, ‘राहुल गांधी ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त करते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी... कोर्ट का फैसला राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के लिए करारा झटका था... वो फिर से वही गलती दोहरा रहे हैं. इसीलिए मैंने कहा था कि वो अपने अनुभवों से सबक नहीं लेते.

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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी लेफ्ट नेताओं की नाराजगी सामने आई थी. INDIA ब्लॉक में साथ होने के बावजूद राहुल गांधी केरलम में यात्रा कर क्या मैसेज देना चाहते हैं, यह उनका सवाल था. वैसे तो वायनाड में भी लेफ्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ उम्मीदवार उतारा था. 

सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने बेहद सख्त लहजे में राहुल गांधी के बयान को गैर-जिम्मेदाराना और झूठ करार दिया है. कहते हैं, ‘राहुल गांधी केरलम में एक अलग ही किस्म के जीव की तरह व्यवहार कर रहे हैं... हमें समझ नहीं आता कि उन्हें कौन सलाह दे रहा है और वे ऐसे बेतुके बयान क्यों दे रहे हैं.’

राहुल गांधी जमीन से कटे हुए नेता हैं बताते हुए पी. संदोष कुमार कहते हैं कि उनको केरलम की वास्तविकता का पता नहीं है, और फिर सवाल उठाते हैं, जब राहुल खुद INDIA ब्लॉक का नेता बनने का दावा करते हैं, तो वो गठबंधन के साथियों पर इस तरह के हमले कैसे कर सकते हैं?

चुनाव कैंपेन में यमराज की एंट्री

राहुल गांधी ने सोशल साइट X पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें यमराज के किरदार में एक शख्स उनके साथ नजर आ रहा है. राहुल गांधी ने लिखा है, केरलम के बालुस्सेरी में मेरी मुलाकात यमराज से हुई... हालांकि, बस में मुझे या UDF नेताओं को देखकर वे ज्यादा खुश नहीं हुए होंगे... क्योंकि यूडीएफ की प्रस्तावित स्वास्थ्य योजना 'ओम्मन चांडी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम' के तहत हर परिवार को 25 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर दिया जाएगा.

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कांग्रेस नेता ने आगे कहा है, यह योजना लागू होते ही यमराज बेरोजगार हो जाएंगे, क्योंकि लोग बीमारी से बच जाएंगे... और लोगों को अस्पताल जाने की जरूरत कम पड़ेगी, लेकिन कोई बात नहीं, हम उनके लिए दूसरी नौकरी ढूंढ़ लेंगे.

केरलम में मुख्य मुकाबला दोनों गठबंधनों LDF और UDF के बीच ही है, जैसा बरसों से होता आ रहा है. बीजेपी अब तीसरी ताकत के तौर पर पैर जमाने की कोशिश कर रही है. बीजेपी की तरफ से कोशिश तो पिछली बार भी हुई थी, लेकिन पश्चिम बंगाल पर ज्यादा फोकस होने से केरलम पीछे छूट गया. 

अब तक केरलम के लोग LDF और UDF को ही बारी बारी आजमाते रहे हैं. 1982 से 2016 तक यह सिलसिला चलता रहा, लेकिन 2021 में पिनाराई विजयन ने परंपरा तोड़कर सत्ता में वापसी कर ली. लेकिन, पिछले दिसंबर में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के इलाके तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए के सबसे बड़ा गठबंधन उभर कर आने के बाद बीजेपी का हौसला बढ़ा. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने एक नगर निगम, दो नगर पालिकाओं और 26 ग्राम पंचायतों में जीत दर्ज की थी.

केरलम में कांग्रेस के पास मौका तो बड़ा है, लेकिन नेताओं पर निजी हमले का इतिहास नुकसानदेह ही साबित हुआ है. 2019 के आम चुनाव के साथ साथ दिल्ली और बिहार के चुनाव उदाहरण हैं. राहुल गांधी भी ये सब जानते ही हैं, परवाह भले न करते हों.

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