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90% बछिया के जन्म की गारंटी! मध्य प्रदेश में हिरण्यगर्भा अभियान से आई क्रांति, गाय नस्ल सुधार पर बड़ा दांव

मध्य प्रदेश को अगले पांच साल में 'मिल्क कैपिटल' बनाने की तैयारी तेज हो गई है. सरकार ने पशुओं की नस्ल सुधार से लेकर कृत्रिम गर्भाधान और दूध उत्पादन बढ़ाने पर फोकस किया है. सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक से करीब 90 प्रतिशत बछिया पैदा होने की संभावना बताई जा रही है. वहीं, हिरण्यगर्भा अभियान के तहत इस साल 47.50 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य रखा गया है.

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MP में सेक्स सॉर्टेड सीमेन से डेयरी सेक्टर को मिलेगी रफ्तार.(Photo: AI Generated)
MP में सेक्स सॉर्टेड सीमेन से डेयरी सेक्टर को मिलेगी रफ्तार.(Photo: AI Generated)

मध्यप्रदेश में डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन पर जोर दे रही है. सेक्स सॉर्टेड सीमेन और कृत्रिम गर्भाधान को इस अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है. इसका उद्देश्य बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी करना है.

नस्ल सुधार के लिए प्रदेश में सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस तकनीक से करीब 90 प्रतिशत बछिया पैदा होने की संभावना रहती है.

वर्तमान में प्रदेश में होने वाले कुल कृत्रिम गर्भाधान में करीब 20 प्रतिशत सेक्स सॉर्टेड सीमेन का इस्तेमाल किया जा रहा है. भोपाल स्थित केंद्रीय वीर्य केंद्र में गिर, साहिवाल, थारपारकर और मुर्रा जैसी उन्नत नस्लों के वीर्य का उत्पादन किया जा रहा है.

केंद्रीय वीर्य केंद्र में फिलहाल करीब 5 लाख डोज प्रतिवर्ष तैयार की जा रही हैं. आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है.

हिरण्यगर्भा अभियान में 47.50 लाख AI का लक्ष्य

सरकार ने कृत्रिम गर्भाधान को बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना बनाई है. हिरण्यगर्भा अभियान के तहत चालू वित्त वर्ष में 47.50 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य तय किया गया है.

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पिछले वर्ष करीब 28 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए थे. वहीं, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ही 10.5 लाख से अधिक कृत्रिम गर्भाधान हो चुके हैं. अगले पांच वर्षों में कृत्रिम गर्भाधान की कवरेज को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है.

MP में तेजी से बढ़ रहा दूध संकलन

नस्ल सुधार और पशुपालन को बढ़ावा देने का असर दुग्ध संकलन में भी दिखाई दे रहा है. पिछले करीब डेढ़ वर्ष में प्रदेश का दैनिक दूध संकलन 8.73 लाख किलोग्राम से बढ़कर जुलाई 2026 में करीब 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गया.

प्रदेश सरकार ने अगले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए प्रदेश में 26 हजार दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने की योजना है.

उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या करीब दोगुनी

21वीं पशु संगणना के आंकड़ों में भी नस्ल सुधार की दिशा में हो रहे बदलाव का उल्लेख है. इसके मुताबिक, 20वीं पशु संगणना की तुलना में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या करीब दोगुनी हुई है.

सरकार का जोर केवल पशुओं की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने पर भी है. भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशी और गैर-प्रमाणित मवेशियों की उत्पादकता 2014-15 में 927 किलो प्रति पशु प्रतिवर्ष थी, जो 2024-25 में बढ़कर 1,343.2 किलो हो गई.

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इसी अवधि में भैंसों की उत्पादकता 1,880 से बढ़कर 2,365.2 किलो और गाय के दूध की औसत उत्पादकता 1,648 से बढ़कर 2,251 किलो  प्रति पशु प्रतिवर्ष हुई.

MP में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी बढ़ी

मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता भी राष्ट्रीय औसत से अधिक बताई गई है. प्रदेश में यह आंकड़ा 550 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 707 ग्राम प्रतिदिन हो गया है. वहीं, राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम प्रतिदिन है. नस्ल सुधार के साथ बेहतर पोषण, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक पशुपालन को दूध उत्पादन बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है.

इन योजनाओं से नस्ल सुधार को मिल रही रफ्तार

उन्नत नस्ल के पशुओं के प्रजनन और प्रसार के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है. इनमें मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शामिल हैं. इन योजनाओं के जरिए पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने के साथ दूसरे राज्यों से बेहतर नस्ल के पशु प्रदेश में लाने को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है.

18 लाख परिवारों तक पहुंचा दुग्ध समृद्धि अभियान

प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के तहत करीब 18 लाख परिवारों से संपर्क किया गया है. ‘गोरस ऐप’ के माध्यम से पशुपालकों को संतुलित आहार और बेहतर पोषण के बारे में जानकारी दी जा रही है.

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इसके साथ ही साइलेज के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत साइलेज उत्पादन से जुड़े नए प्रोजेक्ट भी स्थापित किए जा रहे हैं.

पांच साल में 'मिल्क कैपिटल' बनने का लक्ष्य

मध्यप्रदेश सरकार की योजना में नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स सॉर्टेड सीमेन, बेहतर पोषण, दुग्ध संकलन और सहकारी समितियों का विस्तार प्रमुख आधार हैं. अगर तय लक्ष्यों के मुताबिक काम आगे बढ़ता है तो आने वाले वर्षों में प्रदेश में बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या और प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ डेयरी सेक्टर को बड़े स्तर पर विस्तार देने की कोशिश की जा रही है.

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