मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरदार सरोवर प्रोजेक्ट की निर्माण लागत और नर्मदा अवार्ड से जुड़े पेमेंट विवाद पर चार राज्यों के बीच हुए समझौते को राज्य के लिए एक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि गुजरात को 50 प्रतिशत के बजाय 75 प्रतिशत लागत उठानी चाहिए, और मध्य प्रदेश को अब केवल 217 करोड़ रुपये देने होंगे.
हालांकि, विपक्षी कांग्रेस ने उन पर 'गुजरात लॉबी' के फायदे के लिए राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया. यह आरोप नर्मदा नदी से सटे चार राज्यों - मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र - के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में समझौता होने के एक दिन बाद लगाया गया.
अधिकारियों के अनुसार, नर्मदा नदी प्रोजेक्ट के बाढ़-प्रभावित इलाकों में लोगों के विस्थापन और जमीन के मुआवजे से जुड़ा लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब सुलझा लिया गया है.
भोपाल में राज्य कैबिनेट की बैठक को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि सरदार सरोवर प्रोजेक्ट से जुड़ा जटिल मुद्दा, जो पिछले 30 वर्षों से लंबित था, सर्वसम्मति से सुलझा लिया गया है.
एक विज्ञप्ति के अनुसार, यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल का आभार व्यक्त किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के अटॉर्नी जनरल ने फरवरी 2026 में राय दी थी कि पुनर्वास की लागत को इसमें शामिल राज्यों के बीच बांटा जाना चाहिए.
CM यादव ने कहा, "इस राय के अनुसार, मध्य प्रदेश लगभग 1500 करोड़ रुपये का भुगतान करने की स्थिति में था. नई दिल्ली में हुई बैठक में यह तय किया गया कि गुजरात को 50 प्रतिशत के बजाय 75 प्रतिशत लागत उठानी चाहिए और इस तरह मध्य प्रदेश को अब केवल 217 करोड़ रुपये देने होंगे."
30 साल पुराना विवाद खत्म या अधिकारों से समझौता?
इससे पहले दिन में, एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया, ''मुख्यमंत्री मोहन यादव आज गुजरात लॉबी के सामने दंडवत प्रणाम करते हुए नतमस्तक हैं. जिस मध्य प्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना के लिए अपनी जमीन दी, अपने जंगल दिए, अपने गांव डुबोए और लाखों लोगों का विस्थापन झेला, उसी मध्य प्रदेश सरकार ने गुजरात सरकार से 7,669 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा था.
लेकिन मोहन यादव जी ने प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय गुजरात सरकार से समझौता कर लिया और अब उल्टा 550 करोड़ रुपये गुजरात को देने पर सहमति जता दी.
मां नर्मदा का उद्गम मध्य प्रदेश में है और इसका अधिकांश प्रवाह भी यहीं है. फिर भी प्रदेश के अनेक हिस्से आज भी सिंचाई और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, गांवों तक नहरें नहीं पहुंचतीं, लेकिन हमारे हिस्से का पानी और हमारे संसाधनों का लाभ कहीं और पहुंच जाता है.
पूरा प्रदेश देख रहा है कि किस तरह आज मोहन सरकार ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सामने मध्य प्रदेश के हितों से समझौता कर लिया.''
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने भी यादव पर निशाना साधा और इस समझौते को 'विवादास्पद' बताया. उन्होंने पूछा, "किसके फायदे के लिए मध्य प्रदेश के अधिकारों से समझौता किया गया, और इतनी बड़ी रकम माफ करने का फैसला क्यों लिया गया, जबकि राज्य ने खुद हजारों करोड़ रुपये का दावा किया था?" सिंघार ने मांग की कि मुख्यमंत्री पूरे समझौते की शर्तें और तथ्य सार्वजनिक करें.
'गुजरात के पक्ष में छोड़ दिया ₹7770 करोड़ का अधिकार'
सीनियर विधायक अजय सिंह ने आरोप लगाया कि यादव ने सरदार सरोवर प्रोजेक्ट के लिए मिलने वाले लगभग 7,770 करोड़ रुपये के मुआवजे पर मध्य प्रदेश का अधिकार गुजरात के पक्ष में छोड़ दिया है. उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश सरकार अब गुजरात को 550 करोड़ रुपये देगी, जबकि सरदार सरोवर बांध प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा इसी पश्चिमी राज्य को मिला है.
192 गांवों के किसानों के साथ विश्वासघात: अजय सिंह
सिंह ने कहा, "दबाव में आकर मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश के पक्ष को मजबूती से नहीं रखा और राज्य के हितों को नजरअंदाज करते हुए चुपचाप समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए. उनका यह कदम उन 192 गांवों के किसानों के साथ धोखा है जो सरदार सरोवर बांध के कारण डूब जाएंगे."