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ब्रेनवॉश और 'लव जिहाद' का दावा! हर्षा रिछारिया ने मोहम्मद अशहर के Emails किए शेयर, बोलीं- ऐसे फंसती हैं हिंदू बेटियां

महाकुंभ के दौरान अपने वीडियो से चर्चा में आईं साध्वी हर्षा रिछारिया एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रही हैं. इस बार मामला किसी धार्मिक आयोजन का नहीं, बल्कि उन्हें मिले कुछ ईमेल्स और 'लव जिहाद' की प्रक्रिया पर किए गए दावों का है.

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मोहम्मद अशहर  के ईमेल्स का हवाला देते हुए हर्षा रिछारिया ने शेयर किया वीडियो.(Photo:instagram/harsha_richhariya)
मोहम्मद अशहर के ईमेल्स का हवाला देते हुए हर्षा रिछारिया ने शेयर किया वीडियो.(Photo:instagram/harsha_richhariya)

महाकुंभ से चर्चा बटोरने वाली मध्य प्रदेश की हर्षा रिछारिया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर नई बहस छेड़ दी है. वीडियो में हर्षा खुद को मुस्लिम शख्स के भेजे ईमेल्स को लेकर कथित 'लव जिहाद' या 'ब्रेनवॉश' का दावा करती नजर आईं. 

हर्षा रिछारिया ने वीडियो में कहा, ''मैं एक बात बताती हूं. आज हो सकता है बहुत से लोगों को मिर्ची लगे. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मुझे एक व्यक्ति के कुछ मेल मिले. पिछले कुछ दिनों में जिसने बराबर मुझसे ये पूछा कि तुम कैसी हो, कहां हो? कोई खबर नहीं तुम्हारी, तुम्हारी हेल्थ ठीक है कि नहीं है? तुम कोई पोस्ट क्यों नहीं डाल रही हो? 

देखो हर्षा ये सब चीजें फेम के लिए और फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए तो ठीक हैं, लेकिन आखिर में इससे घर नहीं चलता. इससे इनकम नहीं होती. उसके लिए तुम्हारा क्या फ्यूचर प्लान है? तुम मुझसे शेयर कर सकती हो.'' 

साध्वी हर्षा के मुताबिक, मेल भेजने वाले शख्स ने बराबर मुझे कई मेल्स किए. उसने बाकियों की तरह मुझे 'फेक', 'पाखंडी' जैसा कुछ भी नहीं बोला. उसने मुझे मेल करके पूछा. अब मैं आपको बताती हूं कि आपकी बेटियां 'लव जिहाद' में कैसे फसती हैं. 

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(Photo:instagram/harsha_richhariya)

महाकुंभ में वायरल हुई साध्वी हर्षा रिछारिया ने आगे कहा, ''हमारे खुद के धर्म में यह कमी है कि जब हमें अपने धर्म के लोगों की जरूरत होती है, हमें अपने क्लोज्ड ओन्स की जरूरत होती है तब वो हमारा मजाक उड़ाने में व्यस्त होते हैं.

हमें फेक, पाखंडी, झूठा, मक्कार, फरेबी पता नहीं क्या क्या कहने में व्यस्त होते हैं. तब वो ये सोचने में यह बोलने में व्यस्त होते हैं कि अरे वो तो ये सब दिखावा कर रही है. तब जब आप उस इंसान को मानिसिक और भावानात्मक तौर पर बुर तरह तोड़ देते हैं. 

तब वो कमी दूसरे धर्म के लोग नोटिस करते हैं. और तब उन्हें समझ में आ जाता है कि ये लड़की टूटी हुई है, ये लड़की परेशान है, इसे कंधे की जरूरत है. इसे साथ की जरूरत है. तब वो वो साथ बन के आते हैं.

तब वो ये यकीन दिलाते हैं कि देखो, मैंने तुम्हे तब समझा जब कोई और तुम्हें सुनने तक को राजी नहीं था.

तब उस लड़की को लगता है कि हां, इससे अच्छा मेरे लिए कौन हो सकता है. मेरे धर्म के लोग मुझे नहीं समझ रहे, मेरे धर्म के लोग मुझे नहीं सुन रहे हैं. मेरे अपने मुझे नहीं सुन रहे हैं, तो ये इंसान तो मेरी जिंदगी में फरिश्ता बनकर आया.

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तब वो उस लड़के के कंधे पर सिर रख के रोने लगती है... और तब यहां से शुरुआत होती है 'ब्रेनवॉश' और 'लव जिहाद' की.'' देखें VIDEO:- 

हर्षा रिछारिया ने अंत में यह स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी कमी हमारे खुद के धर्म और समाज की है, जो अपने लोगों को सहारा देने के बजाय उन्हें नीचा दिखाने में व्यस्त रहता है. उन्होंने इसे 'कड़वी हकीकत' बताते हुए "जय श्री राम" के साथ अपनी बात खत्म की.

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