मध्य प्रदेश के ग्वालियर में प्रस्तावित Telecom Manufacturing Zone (TMZ) को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को बेंगलुरु में आयोजित निवेशक बैठक के बाद कहा कि कई कंपनियों ने ग्वालियर के इस प्रस्तावित जोन में निवेश में रुचि दिखाई है. इससे पहले दिल्ली और मुंबई में हुई निवेशक बैठकों से करीब 5,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं और इससे करीब 18,000 रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है.
24 कंपनियां निवेश प्रक्रिया में शामिल
सिंधिया के मुताबिक बेंगलुरु रोडशो के साथ निवेशकों तक पहुंच बनाने के पहले चरण का काम पूरा हुआ है. करीब 24 कंपनियां TMZ के लिए आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो चुकी हैं. सरकार का लक्ष्य ग्वालियर में सिर्फ एक औद्योगिक इकाई स्थापित करना नहीं, बल्कि दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों का पूरा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है.
सिंधिया ने कहा कि यदि किसी निवेशक को TMZ से जुड़ी कोई समस्या या सवाल होता है तो सरकार उसे 48 घंटे के भीतर हल करने की दिशा में काम करेगी. उनका कहना है कि ग्वालियर को ऐसा मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बनाना है, जहां उद्योगों को सरकार एक सहयोगी और जवाबदेह पार्टनर के रूप में मिले.
₹5500 करोड़ के निवेश से 18 हजार रोजगार की उम्मीद
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक दिल्ली और मुंबई में हुई निवेशक बैठकों के बाद करीब ₹5,500 करोड़ की निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आईं, जिनसे लगभग 18,000 रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है. बेंगलुरु बैठक में भी निवेशकों ने प्रस्तावित TMZ का दौरा कर इसकी संभावनाओं का मूल्यांकन करने की बात कही.
सरकार के अनुसार प्रस्तावित TMZ में करीब 24-25 टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा.
170 एकड़ में तैयार होगा Telecom Manufacturing Zone
ग्वालियर में प्रस्तावित TMZ के पहले चरण के लिए करीब 170 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है. इसमें 90 एकड़ से ज्यादा SADA और 70 एकड़ से ज्यादा IT Park क्षेत्र में है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार निवेशकों की दिलचस्पी उपलब्ध जमीन से भी ज्यादा रही है और जरूरत के मुताबिक आगे जमीन बढ़ाने की योजना है.
इस जोन में टेलीकॉम उपकरणों के साथ मोबाइल डिवाइस, ऑप्टिकल फाइबर, टेलीकॉम इक्विपमेंट और अगली पीढ़ी की 5G/6G तकनीक से जुड़े निर्माण, रिसर्च और इनोवेशन पर फोकस किया जाएगा.
'Make in India, Make for the World' पर जोर
सिंधिया ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत को केवल सेवाएं देने वाली अर्थव्यवस्था से आगे ले जाकर उत्पाद निर्माण और इनोवेशन का केंद्र बनाना है. उन्होंने टेलीकॉम क्षेत्र में घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने, भारत में बौद्धिक संपदा तैयार करने और भारतीय डिजाइन एवं भारतीय निर्माण वाले उत्पादों को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि टेलीकॉम सेक्टर में अगला लक्ष्य आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाना है और इसके लिए “Make in India, Make for the World” की दिशा में काम किया जाएगा.
MP सरकार दे रही करीब ₹8000 करोड़ का पैकेज
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार मिलकर ग्वालियर के लिए टेलीकॉम सेक्टर में एक विशेष मॉडल तैयार कर रही हैं. राज्य सरकार की ओर से निवेशकों के लिए करीब ₹8,000 करोड़ के प्रोत्साहन और सब्सिडी का पैकेज बताया गया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार निवेशकों को जमीन, 24 घंटे बिजली, कनेक्टिविटी, युवा मैनपावर और पर्याप्त लैंड बैंक जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रही है.
सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी
प्रस्तावित TMZ को केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से विकसित किया जा रहा है. इसके लिए एक Special Purpose Vehicle (SPV) बनाया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
केंद्र सरकार ने TMZ के पहले चरण के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹493 करोड़ की सहायता का प्रावधान किया है.
Qualcomm में भी हुई बातचीत
बेंगलुरु निवेशक बैठक से पहले सिंधिया ने Qualcomm का दौरा किया. वहां उन्होंने कंपनी के नेतृत्व और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टेलीकॉम तकनीक, सेमीकंडक्टर क्षमता, स्वदेशी उत्पाद विकास, रिसर्च और इनोवेशन जैसे मुद्दों पर चर्चा की.
इस पूरी पहल का मकसद ग्वालियर में टेलीकॉम निर्माण से जुड़ी कंपनियों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंपोनेंट निर्माताओं, निवेशकों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ना है.
ग्वालियर का यह TMZ भारत के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में घरेलू उत्पादन, निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए प्रस्तावित एक बड़े औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है.