मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसा रेलवे स्टेशन है जो किसी रहस्य से कम नहीं है. करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेशन बना दिया गया, प्लेटफॉर्म भी तैयार, टिकट काउंटर भी तैयार, वेटिंग हॉल भी तैयार, लेकिन न यहां कोई ट्रेन रुकती है, न कोई यात्री उतरता है और न ही यहां रेलवे स्टाफ की ड्यूटी लगती है. सवाल ये है कि आखिर 6 करोड़ रुपये का ये स्टेशन दो साल से किसका इंतजार कर रहा है?
हर रेलवे स्टेशन की अपनी एक कहानी होती है… लेकिन भोपाल के निशातपुरा रेलवे स्टेशन की कहानी सबसे अलग है. करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से जून 2023 में बनकर तैयार हुआ यह स्टेशन आज भी यात्रियों का इंतजार कर रहा है. यहां प्लेटफॉर्म है… टिकट काउंटर है… वेटिंग एरिया है… टॉयलेट हैं… लाइटिंग है… लेकिन नहीं है तो सिर्फ एक चीज़… ट्रेनों का ठहराव.
दिनभर यहां सन्नाटा पसरा रहता है. तेज रफ्तार ट्रेनें स्टेशन के सामने से गुजर जाती हैं… लेकिन कोई ट्रेन यहां रुकती नहीं. न कोई यात्री उतरता है, न कोई चढ़ता है. स्टेशन तैयार है… लेकिन संचालन शुरू नहीं हुआ.
हैरानी की बात ये है कि इस स्टेशन को बनाने के पीछे रेलवे की बड़ी योजना थी. भोपाल जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम करना… लंबी दूरी की ट्रेनों की देरी घटाना… और इंजन बदलने व घुमाने में लगने वाला 30 से 40 मिनट का समय बचाना.
आज भी पश्चिमी रेलवे से आने वाली कई ट्रेनों को प्लेटफॉर्म खाली होने का इंतजार करना पड़ता है. अगर निशातपुरा स्टेशन चालू हो जाए तो यही काम यहीं हो सकता है और भोपाल जंक्शन पर दबाव काफी कम हो जाएगा. लेकिन सवाल यही है कि जब स्टेशन पूरी तरह बन चुका है तो आखिर शुरुआत क्यों नहीं हो रही?
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इंस्पेक्शन, सुरक्षा मंजूरी, स्टाफ की तैनाती और ऑपरेशन से जुड़ी प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं. साथ ही ड्रेनेज और एप्रोच रोड का कुछ काम भी बाकी है.
रेलवे का दावा है कि बचा हुआ काम पूरा होते ही स्टेशन से ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा. लेकिन फिलहाल तस्वीर यही है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बना स्टेशन… यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि इंतजार के लिए खड़ा है.