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चेक बाउंस केस में पूर्व IAS और फिल्म डायरेक्टर रमेश थेटे गिरफ्तार, जमानत मिली; 11.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला

मध्य प्रदेश में IAS अफसर रहे और 'द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव' फिल्म के डायरेक्टर रमेश थेटे को ₹11.5 लाख के चेक बाउंस मामले में जमानत मिल गई है. नागपुर से गिरफ्तारी के एक दिन बाद भोपाल कोर्ट ने 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया.

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₹11.5 लाख के चेक बाउंस मामले में पूर्व IAS रमेश थेटे को राहत.(File Photo:ITG)
₹11.5 लाख के चेक बाउंस मामले में पूर्व IAS रमेश थेटे को राहत.(File Photo:ITG)

रिटायरमेंट के बाद फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखने वाले और 'द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव' फिल्म का निर्देशन करने वाले पूर्व IAS अफसर रमेश थेटे को 11.5 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में जमानत मिल गई है. उन्हें एक दिन पहले नागपुर से गिरफ्तार किया गया था.

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कल्पना कोटवाल ने गुरुवार को रमेश एस. थेटे की जमानत अर्जी मंजूर कर ली और उन्हें 10,000 रुपये के मुचलके (बॉन्ड) पर रिहा करने का आदेश दिया.

थेटे ने अदालत को बताया कि वह किसी जमानतदार (श्योरिटी) का इंतजाम नहीं कर पाए हैं, इसलिए उन्होंने निजी मुचलके पर रिहा करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा, "अदालत मेरी दलीलों से सहमत हो गई और मुझे एक मिनट में जमानत दे दी. कल उनका दिन था... अब मेरा दिन आएगा. मैं तथ्यों के साथ सामने आऊंगा."

भोपाल की एमपी नगर पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से बुधवार को उन्हें नागपुर से गिरफ्तार किया था.

शिकायतकर्ता प्रदीप रामटेके के अनुसार, थेटे ने उनसे 11.5 लाख रुपये उधार लिए थे और उसे चुकाने के लिए एक चेक दिया था. खाते में पर्याप्त रकम न होने के कारण चेक बाउंस हो गया, जिसके बाद रामटेके ने मामला दर्ज कराया.

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अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, थेटे को सुनवाई के दौरान पेश होने के कई मौके दिए गए, लेकिन वे बार-बार पेश होने में विफल रहे. मार्च में अदालत ने टिप्पणी की थी कि हालात से ऐसा लगता है कि वे जानबूझकर वारंट की तामील से बच रहे हैं.

इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि थेटे फरार हैं और अदालत के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं. तब अदालत ने उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 299 के तहत 'फरार' घोषित कर दिया और उनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया.

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मध्य प्रदेश कैडर के 1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी थेटे 31 जुलाई 2020 को रिटायर हुए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि IAS अधिकारी होने के बावजूद उन्हें कभी जिला कलेक्टर के पद पर नियुक्त नहीं किया गया और अंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़े होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया.

रिटायरमेंट के बाद थेटे ने एक प्रोडक्शन कंपनी बनाई और 'द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव' फिल्म का निर्देशन किया. यह फिल्म शुरू में 17 सितंबर 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण रिलीज नहीं हो सकी. अपनी फिल्म के बारे में पूछे जाने पर, थेटे ने बताया कि इसे जनवरी 2028 में रिलीज किया जाएगा.

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