मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन आयोजित किया गया. इसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के गौपालकों, पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को समृद्ध बनाने के लिए कई घोषणाएं कीं. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से 'श्वेत क्रांति 2.0' की ओर बढ़ रहा है और सरकार का संकल्प है कि देश का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन इसी धरती पर हो.
प्रदेश में लगभग 80 लाख गौपालक परिवारों और 6 करोड़ से अधिक पशुधन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गौपालन, पशुपालन, प्राकृतिक खेती और दुग्ध सहकारिता को मजबूत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा रही है.
गोवर्धन पूजा से पहले सरकार के 3 नए बड़े संकल्प
CM मोहन यादव ने अगले माह आने वाली गोवर्धन पूजा से पहले सरकार की तीन मुख्य प्राथमिकताओं और संकल्पों का ऐलान किया:
313 ब्लॉक्स के 'वृंदावन ग्राम' में गौपालक प्रतियोगिता
प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों (ब्लॉक्स) में विकसित किए जा रहे 'वृंदावन ग्रामों' में उत्कृष्ट गौपालकों के लिए प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी.
प्रथम पुरस्कार: 1 लाख रुपये
द्वितीय पुरस्कार: 50 हजार रुपये
तृतीय पुरस्कार: 25 हजार रुपये
168 नई गौ-एंबुलेंस का संचालन
वर्तमान में प्रदेश में 406 गौ-एंबुलेंस काम कर रही हैं. गौवंश के त्वरित इलाज और संरक्षण के लिए बेड़े में 168 नई गौ-एंबुलेंस और जोड़ी जाएंगी.
पशु मेले
उन्नत नस्ल (जैसे गिर, साहीवाल) के पशुपालन को बढ़ावा देने और दुग्ध उत्पादन क्षमता में सुधार के लिए जगह-जगह बड़े पशु मेलों का आयोजन किया जाएगा.
कामधेनु योजना में ₹10 लाख की सब्सिडी
गौवंश संवर्धन और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने अहम रियायतों की जानकारी दी. जैसे नगर निगम क्षेत्रों में स्थित गौशालाओं को दिया जाने वाला अनुदान प्रति गाय 20 से बढ़ाकर सीधे 40 रुपये कर दिया गया है.
डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना
पशुपालकों को रोजगार से जोड़ने के लिए इस योजना के तहत 40 लाख रुपये का ऋण लेकर 25 गाय पालने पर सरकार 10 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान कर रही है. वर्तमान में प्रदेश की लगभग 3500 गौशालाओं में 5 लाख से अधिक गौवंश का संरक्षण किया जा रहा है.
हर दिन 50 लाख लीटर दूध कलेक्शन का लक्ष्य
दुग्ध उत्पादन और सहकारिता नेटवर्क पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, विश्व में औसतन प्रति व्यक्ति 330 ग्राम और भारत में 485 ग्राम दूध उपलब्धता है, जबकि मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 750 ग्राम प्रति व्यक्ति है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन सहित 6 दुग्ध सहकारी संघों के माध्यम से दूध कलेक्शन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है. जिन गांवों में अभी दुग्ध समितियां नहीं हैं, वहां नई समितियां गठित की जाएंगी.