मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के बहादुरपुर स्वास्थ्य केंद्र में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. यहां एक किशोरी के पोस्टमार्टम के बाद शव को घर तक ले जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने वाहन उपलब्ध नहीं कराया. घंटों इंतजार के बाद मजबूर परिजन शव को चादर में लपेटकर पैदल ही ले जाने लगे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया.
दरअसल, खेरोदा चक्क गांव की निवासी 15 साल की मन्तोबाई पुत्री रामचरण आदिवासी ने शनिवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम बहादुरपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया.
घंटों का इंतजार
शनिवार सुबह 10 बजे पोस्टमार्टम पूरा हो गया था, लेकिन दोपहर 1:30 बजे तक शव वाहन नहीं मिला. परिजन शव को हाथों में उठाकर कुछ दूर तक ले गए और फिर सड़क किनारे तेज धूप में रखकर वाहन का इंतजार करते रहे. आखिरकार एक स्थानीय व्यक्ति ने अपनी निजी कार देकर शव को गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था की.
कलेक्टर साकेत मालवीय का एक्शन
मामला संज्ञान में आते ही कलेक्टर साकेत मालवीय देर रात ही बहादुरपुर अस्पताल और पोस्टमार्टम गृह का जायजा करने पहुंच गए. उनके साथ SDM और CMHO भी मौजूद थे.
कलेक्टर ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अस्पताल के केयरटेकर को तत्काल प्रभाव से काम से हटा दिया गया है. इसके अलावा, पोस्टमार्टम इंचार्ज की लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी को पत्र भेजा गया है।
कलेक्टर ने साफ किया कि शव को सम्मानपूर्वक घर पहुंचाना शासन की प्राथमिकता है. अगर अस्पताल में वाहन नहीं है, तो अन्य जगह से व्यवस्था करना अनिवार्य है.