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अयोध्या पर किताबें लिखने वाले लेखक ने बताया, ऐसे निकले विवाद का हल

अयोध्या के रहने वाले लेखक यतीन्द्र मिश्र ने कहा कि राम की याद सिर्फ 6 दिसंबर को ही आती है, मीडिया अयोध्या के सांस्कृतिक उत्सवों और राम के जीवन से जुड़े अन्य पहलुओं पर चर्चा नहीं करता. राजनेता भी इसपर कोई बात नहीं करते क्योंकि इससे चुनावी फायदा नहीं है.

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यतीन्द्र मिश्र और हेमंत शर्मा (फोटो- आजतक)
यतीन्द्र मिश्र और हेमंत शर्मा (फोटो- आजतक)

'साहित्य आजतक' के दूसरे दिन हल्ला बोल चौपाल मंच पर सत्र 'श्री राम की अयोध्या' का आयोजन किया गया. इस सत्र में अयोध्या पर किताबें लिखने वाले प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार हेमंत शर्मा के साथ हिन्दी के बड़े लेखक यतीन्द्र मिश्र ने शिरकत की. कार्यक्रम में अयोध्या की भूमि से लेकर मंदिर-मस्जिद विवाद और श्री राम के जीवन मूल्यों पर रोचक बातचीत हुई.

अयोध्या के रहने वाले लेखक यतीन्द्र मिश्र ने कहा कि राम की याद सिर्फ 6 दिसंबर को ही आती है मीडिया अयोध्या के सांस्कृतिक उत्सवों और राम के जीवन से जुड़े अन्य पहलुओं पर चर्चा नहीं करता. राजनेता भी इसपर कोई बात नहीं करते क्योंकि इससे चुनावी फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि राम एक नहीं है, आज सबसे राम अलग-अलग हैं. गांधी के राम से लेकर कबीर के राम, तुलसीदास के राम, वाल्मिकी के राम, साकेत के राम सब अलग हैं.

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अयोध्या विवाद पर हेमंत शर्मा ने कहा कि यह पूरा विवाद मंदिर-मस्जिद का नहीं बल्कि दो विचारधाराओं का विवाद है. उन्होंने कहा कि इतिहास अयोध्या का है, अयोध्या राम की है, राम लोक के हैं और कितनी भी कोशिशों के बाद राम को अयोध्या से अलग नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि और बाबरी विवाद होने पर उन्होंने कहा कि इस विवाद का हल कानून और कोर्ट से नहीं बल्कि सहमति और संवाद से निकल सकता है.

राम के नाम पर राजनीति को लेकर यतीन्द्र मिश्र ने कहा कि अयोध्या के लिए राम कभी भी राजनीति का विषय नहीं हो सकते. उन्होंने कहा कि अयोध्या वालों के लिए राम ब्रांड का मामला नहीं बल्कि उनकी आस्था और संस्कार का विषय हैं. हम राम नाम की ब्रांड में खुद को फिट नहीं करना चाहते.

हेमंत शर्मा ने कहा कि राम के नाम को जब से वोट बैंक से जोड़ा गया तब से उनका राजनीतिकरण हो गया है. शर्मा ने कहा कि पहले राम सबके थे लेकिन अब सिर्फ उन्हें एक पार्टी से जोड़कर देखा जाने लगा है. 

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