बढ़ते वजन और मोटापे से परेशान लोगों के घुटनों में दर्द होना आम बात है लेकिन वहीं कुछ लोगों को अर्थराइटिस में भी ये समस्या होती है. उम्र बढ़ने के साथ घुटने में दर्द होना आम बात है लेकिन आजकल कम उम्र के लोगों में भी ये समस्या होने लगी है. कई बार कुछ लोगों को घुटने की सर्जरी की जरूरत पढ़ती है लेकिन क्या आप जानते हैं आमतौर पर वजन घटाने और डायबिटीज के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं अब आपके घुटनों को सर्जरी से बचा सकती हैं.
मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, वजन कम करने वाली दवाएं लेने वाले मरीजों में घुटने के रिप्लेसमेंट की जरूरत काफी हद तक कम देखी गई है. इस स्टडी ने मेडिकल जगत में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या ये इंजेक्शन बिना किसी ऑपरेशन के खराब हो रहे घुटनों को ठीक रखने में मददगार साबित हो सकते हैं?
लाखों मरीजों के डेटा से सामने आया चौंकाने वाला सच
रीजनल एनेस्थीसिया और पेन मेडिसिन जर्नल में पब्लिश हुई एक रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक्सपर्ट्स ने साल 2010 से 2024 के बीच घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित करीब 68 लाख वयस्क मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड का एनालिसिस किया. रिसर्चर्स ने पाया कि जिन मरीजों ने कम से कम 3 साल तक नई जनरेशन की जीएलपी-1 (GLP-1) कैटेगरी की एंटी-ओबेसिटी दवाएं ली थीं, उनमें घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी का रिस्क करीब 5 प्रतिशत तक घट गया था.
सर्जरी टलने के पीछे क्या है असली वजह?
एक्सपर्ट्स का कहना है, जब कोई मोटापे का शिकार होता है तो उसके घुटनों के जोड़ों पर शरीर का पूरा मैकेनिकल प्रेशर पड़ता है जिससे वहां मौजूद कार्टिलेज (गद्दी) घिसने लगती है. एवरीडे हेल्थ की एक रिपोर्ट में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जय कर्री का कहना है, ये दवाएं सिर्फ वजन ही कम नहीं करतीं बल्कि जोड़ों में होने वाली सूजन को भी कम करती हैं. इन दवाओं के एंटी-इन्फ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुणों के कारण मरीजों को चलने-फिरने में आसानी होती है, कार्टिलेज का डैमेज धीमा हो जाता है और उन्हें ऑपरेशन थिएटर तक नहीं जाना पड़ता.
एक्सपर्ट्स ने दी यह बड़ी चेतावनी!
डॉक्टर्स और आर्थराइटिस एक्सपर्ट्स ने मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. ब्रिटिश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट मार्क बॉडिच के मुताबिक, यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है और यह पूरी तरह साबित नहीं करती कि दवाएं ही सीधे सर्जरी को रोकती हैं.
ब्रिटिश रिसर्च ऑर्गनाइजेशन वर्सस आर्थराइटिस की डायरेक्टर प्रोफेसर लूसी डोनाल्डसन का कहना है कि ये दवाएं फिलहाल ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज के लिए अप्रूव्ड नहीं हैं. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के सिर्फ घुटने के दर्द को ठीक करने के लिए इन महंगे इंजेक्शंस का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए.