Kitchen Utensils Expiry Date: आमतौर पर जब हम बाजार से खाने-पीने की चीजें, दवाइयां या कॉस्मेटिक्स खरीदते हैं तो सबसे पहले उसकी एक्सपायरी डेट चेक करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन बर्तनों में हम रोजाना खाना बनाते और खाते हैं, उनकी भी एक निश्चित उम्र यानी एक्सपायरी डेट होती है.
जी हां, यह बिल्कुल सच है. हमारी रसोई में मौजूद कई बर्तन एक समय के बाद इस्तेमाल के लायक नहीं रह जाते, भले ही वे दिखने में बिल्कुल ठीक लगें. 90% भारतीय घरों में बर्तनों को तब तक इस्तेमाल किया जाता है, जब तक कि वे पूरी तरह टूट या पिचक न जाएं.
लेकिन आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों ही मानते हैं कि एक तय समय के बाद पुराने बर्तन भोजन में हानिकारक केमिकल्स और धातुएं छोड़ने लगते हैं जो धीरे-धीरे हमारे शरीर को बीमार बना देते हैं. आइए जानते हैं रसोई के उन 6 बर्तनों के बारे में जिन्हें समय रहते बदलना बेहद जरूरी है, खासकर चौथे नंबर वाले बर्तन के बारे में जानकर आपके होश उड़ जाएंगे.
इन 6 बर्तनों की होती है एक्सपायरी डेट
1. नॉन-स्टिक पैन और कड़ाही (लाइफ: 2 से 3 साल): नॉन-स्टिक बर्तनों पर 'टेफ्लॉन' (PTFE) की कोटिंग होती है. लगातार इस्तेमाल या कड़े स्क्रबर से साफ करने पर यह कोटिंग छिलने लगती है. कोटिंग छिलने के बाद जब इसे गर्म किया जाता है, तो इससे कैंसरकारी कार्सिनोजेनिक गैसें और केमिकल्स निकलते हैं जो सीधे आपके भोजन में मिल जाते हैं. अगर आपके नॉन-स्टिक बर्तन पर स्क्रैच आ गए हैं, तो उसे तुरंत बदल दें.
2. एल्युमिनियम के बर्तन (लाइफ: 3 से 5 साल): एल्युमिनियम के बर्तनों में लगातार खट्टी या एसिडिक चीजें (जैसे टमाटर, कढ़ी, नींबू) वाली चीजें पकाने से धातु धीरे-धीरे गलने लगती है. समय के साथ ये बर्तन पतले हो जाते हैं क्योंकि एल्युमिनियम भोजन के जरिए हमारे शरीर में जमा होने लगता है, जो लिवर, किडनी और याददाश्त कमजोर होने का कारण बन सकता है.
3. प्लास्टिक के डिब्बे और बोतलें (लाइफ: 6 महीने से 1 साल): किचन में मसालों या फ्रिज में पानी रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के कंटेनर्स की उम्र बहुत कम होती है. डिशवॉशर या गर्म पानी से धोने पर इनसे 'बिसफेनॉल-ए' (BPA) और माइक्रोप्लास्टिक्स निकलने लगते हैं. यदि प्लास्टिक का रंग बदल गया है या उस पर स्क्रैच आ गए हैं, तो वह एक्सपायर हो चुका है.
4. तांबे और पीतल के बर्तन (बिना कलई के असुरक्षित): तांबे (Copper) और पीतल (Brass) के बर्तनों की उम्र तो लंबी होती है, लेकिन इनकी असली एक्सपायरी इनकी कलई (Tin Coating) से तय होती है. बिना कलई वाले पीतल या तांबे के बर्तन में अगर खट्टा, नमक या दूध से बनी चीजें रखी जाएं तो धातु भोजन के साथ रिएक्ट करके पॉइजनिंग का कारण बन सकती है. अगर आपके इन बर्तनों के अंदर की कोटिंग घिस गई है या हरा-कालापन दिखने लगा है तो इनका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें और दोबारा कलई करवाएं.
5. मेलामाइन की क्रॉकरी और प्लेट्स (लाइफ: 2 से 3 साल): दिखने में सुंदर लगने वाली मेलामाइन की प्लेट्स और बाउल्स अगर हल्के से भी चटक जाएं या उन पर चाकू-चम्मच के निशान पड़ जाएं, तो वे जहरीले हो जाते हैं. गर्म खाना परोसने पर इनसे मेलामाइन केमिकल रिलीज होता है, जो किडनी में स्टोन और यूरिन इन्फेक्शन की वजह बन सकता है.
6. कटे-फटे लकड़ी के स्पैटुला और चॉपिंग बोर्ड (लाइफ: 1 साल): खाना चलाने वाले लकड़ी के चम्मच और चॉपिंग बोर्ड में लगातार नमी रहने के कारण बारीक दरारें पड़ जाती हैं. इन दरारों में खाना फंस जाता है और बैक्टीरिया (जैसे ई-कोलाई और साल्मोनेला) पनपने लगते हैं, जिन्हें नॉर्मल लिक्विड सोप से साफ नहीं किया जा सकता. इन्हें हर साल बदल देना चाहिए.