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History Behind The Raita: गलती से बना था रायता! इसके पीछे की कहानी शायद ही जानते होंगे आप

बिरयानी के साथ रायता खाएं तो याद रखिएगा कि यह सिर्फ एक साइड डिश नहीं है, बल्कि भाषा और इतिहास की एक दिलचस्प गलतफहमी है. रायता का नाम कैसे पड़ा और राई का से रायता कैसे बना, इस बारे में आर्टिकल में जानेंगे.

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रायते का नाम एक गलती के कारण रखा गया था. (Photo: AI Generated)
रायते का नाम एक गलती के कारण रखा गया था. (Photo: AI Generated)

बिरयानी या पुलाव की थाली जब सामने आती है तो रायते के बिना वह अधूरी लगती है. इसके अलावा खीरा या बूंदी का रायता खाते ही मानो दिल खुश हो जाता है.  लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दही में पानी मिलाकर बनाई गई इस तरकारी को 'रायता' ही क्यों कहते हैं? दरअसल, इसके नाम के पीछे काफी दिलचस्प कहानी है. माना जाता है कि रायता शब्द का जन्म किसी डिश के नामकरण की योजना से नहीं, बल्कि सुनने में हुई एक गलती से हुआ है. आखिर कैसे एक शब्द का गलत मतलब निकाला गया और वह हमेशा के लिए डिश का नाम बन गया? आइए जानते हैं इस मजेदार फूड मिस्ट्री के बारे में.

'राई का' और रायता का कनेक्शन

कुछ इतिहासकारों और फूड राइटर्स का मानना है कि आज हम जिसे रायता कहते हैं, वह असल में एक गलतफहमी से बना. कहानी यह है कि मुगल दरबार के दौरान जब पहली बार दही में राई (Mustard Seeds) का तड़का और मसाले डालकर एक डिश पेश की गई. 

किसी मुगल ने पहली बार रायता देखा तो वो इसके बारे में जानना चाहते थे इसलिए उन्होंने पूछा, यह कौन सी तरकारी परोसी जा रही है? तरकारी स्थानीय भाषा में सब्जी को कहते हैं. बनाने वालों ने उत्तर दिया, 'राई का'. जिसका अर्थ है वह डिश जिसमें राई का इस्तेमाल हुआ है.

कैसे नाम पड़ गया रायता?

यह नाम एक भाषा की चूक का परिणाम है. जब लोग इसे 'राई का' कहा तो सुनने वालों ने इसे गलत समझ लिया. 'राई का' शब्द धीरे-धीरे अपभ्रंश होकर रायता में बदल गया. यह कहानी इस बात का सबूत है कि भाषाएं कैसे बदलती हैं और कैसे कभी-कभी कोई गलत शब्द, सही जानकारी से ज्यादा मशहूर हो जाता है. धीरे-धीरे उत्तर भारत में राई का इस्तेमाल कम हो गया लेकिन रायता नाम इतिहास के साथ जुड़ गया.

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क्या रायता मुगल डिश है या इससे भी पुरानी?

यदि हम भारतीय खानपान के इतिहास को देखें, तो दही का इस्तेमाल सदियों से हो रहा है. 'द जगरनॉट' (The Juggernaut) के एक आर्टिकल के अनुसार, रायता या दही से बनी ऐसी चीजें दक्षिण भारत में पचड़ी के रूप में काफी पहले से मौजूद थीं. इसका मतलब है कि रायता कोई नई खोज नहीं थी, बल्कि यह अलग-अलग संस्कृतियों के मेल-जोल का परिणाम है. 

मुगल बादशाहों के दौर में जब इसे शाही अंदाज में परोसा गया तो इसने अपनी एक नई पहचान बनाई. नाम को लेकर कन्फ्यूजन जरूर रहा लेकिन इसकी पॉपुलैरिटी पूरे देश में फैल गई.

दही खाने के फायदे भी हैं अनेक

नाम की कहानी अपनी जगह है, लेकिन रायते के फायदे इसे आज भी हमारी थाली का सबसे जरूरी हिस्सा बनाए हुए हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक, दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं जो गट हेल्थ के लिए बेहतरीन हैं. स्पाइसी बिरयानी खाने के बाद पेट में होने वाली जलन को शांत करने के लिए रायता एक शानदार कूलिंग एजेंट है. यह न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि पाचन को भी आसान बनाता है. 

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