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पुखराज, पन्ना... जयपुर का वो मार्केट, जहां सड़क किनारे मिलते हैं महंगे-महंगे जेम्स!

जयपुर में एक ऐसा बाजार भी है , जहां मंडी की तरह नगीनों का कारोबार होता है. यहां व्यापारी आते हैं और कुछ घंटे में अपना सामान बेचकर चले जाते हैं.

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जयपुर के इस बाजार में कई तरह के जेम्स मिलते हैं. (Photo: Pexels)
जयपुर के इस बाजार में कई तरह के जेम्स मिलते हैं. (Photo: Pexels)

ये तो आप जानते होंगे कि जयपुर में जेम्स स्टोन, स्टोन ज्वैलरी आदि का काफी काम होता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं जयपुर में एक ऐसा बाजार, जो सड़क किनारे लगता है और वहां महंगे से महंगे स्टोन बेचे जाते हैं. इस बाजार की खास बात ये है कि इसमें कोई दुकानें नहीं होती हैं, बस व्यापारी अपना सामान लाते हैं और घूम-घूमकर सामान बेचते हैं. कोई दुकान, कोई स्टॉल नहीं लगती और यहां लाखों का कारोबार होता है. वैसे तो जयपुर का जौहरी बाजार दुनियाभर में फेमस है, लेकिन उसी के पास इन रत्नों की भी मंडी भी लगती है और व्यापारी स्टोन बेचते हैं. 

ये मंगल-बुध बाजार की तरह ही होता है और यहां लोग जमा होते हैं और अपना सामान बेचते हैं. जयपुर के जौहरी बाजार से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर नवाब के चौराहे पर ये मंडी लगती है, जिसे नगीना मंडी लगती है. मंडी में सड़क किनारे पर ही खरीदार और सौदागर के बीच व्यापार होता है. महज चार से पांच घंटे के बीच सैकड़ों लोग लाखों रुपए का लेन-देन यहां पर निपटा देते हैं. यहां शाम में 4 बजे से कारोबार शुरू होता है. यहां भले ही व्यापार नगीनों का होता है, लेकिन हाल किसी सब्ज़ी मंडी से कम नहीं. यहां कांच से लेकर हीरे-पन्ने, रत्न और माणक सब कुछ बिकने आता है.

कैसे होता है व्यापार?

नगीना मंडी में कुछ घंटे के लिए व्यापारी होते हैं, जो स्टोन की क्रिस्टल क्वालिटी कैसी है और इन सब पैमानों को ध्यान में रखने के बाद नजदीक की दुकानों में नग का वजन करवाते हैं और कैरेट के हिसाब से रेट तय करके सौदा करते हैं. वैसे आम तौर पर यहां व्यापारी ही यहां आते हैं और कारीगर अपना माल बेचते हैं. इस मंडी में कुछ खास जानकार भी रहते हैं, जिनसे लोग नगीने खरीदने से पहले चेक करवाते हैं. उन लोगों की सलाह को सर्टिफिकेट के तौर पर माना जाता हैं.

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हालांकि, बाजार में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो कम क्वालिटी के नग को महंगे रेट में बेच देते हैं. ऐसे में अगर आप किसी नग के जानकार हैं तो यहां से खरीद सकते हैं. जानकारी के अभाव में कई बार गलत डील भी हाथ लग जाती है. 

यहां बिजनेस के हैं अपने नियम

नगीनों की इस व्यापारिक मंडी में कोई सौदागर है तो कोई दलाल. हर किसी हाथ में कागज की पुड़िया होती है, जिसमें हीरे-पन्ने लिपटे रहते हैं. मोलभाव की अपनी भाषा और संकेत हैं. अगर एक-दूसरे का हाथ थामकर सौदा पक्का होता है. संकेत और भाषा बाहर का आदमी नहीं समझ सकता. यानी अगर किसी के हाथ पर हाथ रख  दिया तो मान लीजिए डील पूरी हो गई है. जो व्यापारी जौहरी बाजार जैसे मार्केट में गद्दी नहीं ले पाते हैं, वो यहां आकर बिजनेस करते हैं. 
 

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