मशहूर बॉलीवुड सिंगर अलका याग्निक ने बताया है कि वो पिछले दो सालों से सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस (कान की अंदरूनी नस या सुनने की नस से जुड़ी बीमारी) से जूझ रही हैं. यह एक दुर्लभ बीमारी है. पद्म भूषण से सम्मानित होने के बाद उन्होंने अपनी सेहत से जुड़ी मुश्किलों और धीरे-धीरे हो रहे सुधार के बारे में बताया. याग्निक ने इस मुश्किल समय में लोगों से मिले सपोर्ट के लिए आभार जताया और कहा कि वो धीरे-धीरे फिर से लाइमलाइट में लौट रही हैं.
सोशल मीडिया पर पर लेजेंडरी सिंगर ने पिछले दो सालों के बारे में एक भावुक पोस्ट शेयर किया. उन्होंने बताया कि सेहत से जुड़ी समस्याओं के कारण वो काफी समय तक लोगों की नजरों से दूर रही थीं.
अलका ने की ये भावुक पोस्ट
अलका ने पोस्ट में लिखा, 'पिछले दो सालों से मैं लाइमलाइट और पब्लिक इवेंट्स से दूर रही हूं और अपनी जिंदगी के सफर के बारे में ज्यादा कुछ शेयर नहीं किया है. आप में से कई लोग जानते थे कि मैं सेहत से जुड़ी मुश्किलों से गुजर रही थी और इस दौरान आपका प्यार, दुआएं, मैसेज और अटूट साथ हर कदम पर मेरे साथ रहा.'
पद्म भूषण से सम्मानित होने पर उन्होंने कहा, 'यह पल मेरे लिए बहुत खास है क्योंकि यह न सिर्फ मेरे काम को मिली पहचान है बल्कि प्यार, उम्मीद और हिम्मत से मिलने वाली ताकत की याद भी दिलाता है. मैं धीरे-धीरे वापसी कर रही हूं और आज मैं यहां आना चाहती थी. न सिर्फ अपने लिए बल्कि आप सभी के लिए जो इस सफर का हिस्सा रहे हैं.'
अलका याग्निक को क्या हुआ था?
बॉलीवुड सिंगर अलका याग्निक ने बताया है कि उन्हें सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस (sensorineural nerve hearing loss) नाम की एक दुर्लभ बीमारी हुई है.
सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस क्या है?
सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) का मतलब है कान के अंदरूनी हिस्से या उन नसों (नर्व पाथवे) का डैमेज होना जो कान से दिमाग तक आवाज के सिग्नल पहुंचाती हैं. इसे काफी रेयर बीमारी माना जाता है. सुनने की क्षमता खोने के कुल मामलों में से लगभग 5-15% मामले इसी तरह के होते हैं.
यह समस्या कई वजहों से हो सकती है जैसे तेज आवाज के संपर्क में आना, इन्फेक्शन, ऑटोइम्यून बीमारियां, चोट, न्यूरोलॉजिकल या ब्लड वेसल से जुड़ी समस्याएं, कुछ खास दवाएं और रेयर मामलों में ट्यूमर.
यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है और ये कुछ समय या हमेशा के लिए भी हो सकती है.
सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस के कारण
कुछ लोगों में यह बीमारी जन्म से हो सकती है और कुछ लोगों में ये जीवन के किसी भी चरण में हो सकती है.
जन्म से होने वाली वजहों में जेनेटिक कारण या प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली दिक्कतें शामिल हैं.
इसके अलावा बाद में होने वाली वजहों में कुछ कारण शामिल हैं.
तेज आवाज के संपर्क में आना: लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से शोर के कारण सुनने की क्षमता कम हो सकती है.
उम्र बढ़ना: उम्र के साथ कान के अंदरूनी हिस्सों का धीरे-धीरे कमजोर होना.
इन्फेक्शन और बीमारियां: जैसे मेनिन्जाइटिस, मम्प्स, खसरा (मीजल्स) और ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे मेनियर्स डिजीज.
चोट: सिर में चोट लगने से सुनने वाली नस (ऑडिटरी नर्व) पर असर पड़ना.
ओटोटॉक्सिक दवाएं: कुछ खास दवाएं जो कान के अंदरूनी हिस्से की सेंसरी सेल्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
इस बीमारी के लक्षण और इलाज
आम लक्षणों में बातचीत समझने में दिक्कत, आवाज का साफ न सुनाई देना, कानों में घंटी बजना (टिनिटस), तेज पिच वाली आवाजे सुनने में परेशानी और शरीर का संतुलन बनाए रखने में दिक्कत शामिल हैं.
ज्यादातर मामलों में इस स्थिति को ठीक नहीं किया जा सकता है. हालांकि, हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट, दवाएं और सुनने में मदद करने वाले डिवाइस जैसे इलाज लक्षणों को कंट्रोल करने और जीवन को आसान बनाने में मदद कर सकते हैं.