Granite Disadvantages: रसोई बनवाते समय सबसे ज्यादा ध्यान जिस चीज पर जाता है, उनमें से एक है स्लैब होती है. जब बी स्लैब बनवाने की बात आती है, तो लोग सबसे मजबूत पत्थर को चुनना पसंद करते हैं. मजबूती के साथ ही लोगों को रसोई की स्लैब के लिए चमकदार और प्रीमियक लुक वाला पत्थर चाहिए होता है. ये सभी चीजों लोगों को ग्रेनाइट में देखने को मिलती हैं, जिसकी वजह से वो लंबे समय से रसोई की स्लैब के लिए उनकी पसंद रहा है. ये गर्म बर्तन और रोजमर्रा के इस्तेमाल को काफी हद तक झेल सकता है और हर स्लैब का पैटर्न भी अलग होता है. लेकिन सिर्फ खूबसूरत और मजबूत दिखने की वजह से इसे रसोई के लिए परफेक्ट मान लेना सही नहीं है.
ग्रेनाइट खरीदने से पहले इसकी कुछ ऐसी कमियां भी जान लेना जरूरी है, जो शोरूम में स्लैब देखते समय नजर नहीं आतीं. बाद में यही चीजें बजट बढ़ाने से लेकर रोजाना की सफाई और मेंटेनेंस तक परेशानी का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं ग्रेनाइट की स्लैब लगवाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
1. जेब पर पड़ सकता है भारी: ग्रेनाइट का सबसे बड़ा नुकसान इसकी कीमत हो सकती है. अच्छी क्वालिटी का ग्रेनाइट दूसरे सस्ते मटीरियल्स के मुकाबले महंगा हो सकता है. इसके अलावा सिर्फ स्लैब खरीदने का खर्च ही नहीं होता, बल्कि कटिंग, किनारों की फिनिशिंग, ट्रांसपोर्ट और इंस्टॉलेशन का खर्च भी जुड़ सकता है. इसलिए रसोई का बजट बनाते समय इन सभी खर्चों को पहले से जोड़ना जरूरी है.
2. सिर्फ लगवाकर भूल नहीं सकते, सीलिंग जरूरी है: ग्रेनाइट देखने में बेहद मजबूत पत्थर लगता है, लेकिन ये पूरी तरह नॉन-पोरस नहीं होता (इसमें थोड़ा-बहुत पानी अंदर जा सकता है.) यानी इसके सरफेस में छोटे-छोटे छेद हो सकते हैं, जिनसे तेल, कॉफी, मसाले या दूसरी चीजों के दाग अंदर तक जा सकते हैं, खासकर जब सरफेस की सीलिंग ठीक न हो.
इसी वजह से ग्रेनाइट स्लैब की समय-समय पर सीलिंग कराना और सही देखभाल करना जरूरी होता है. सीलर कितने समय तक चलेगा, ये इस्तेमाल किए गए प्रोडक्ट और ग्रेनाइट के नेचर पर निर्भर करता है.
3. हर क्लीनर से नहीं कर सकते सफाई: ग्रेनाइट मजबूत जरूर है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इस पर कोई भी क्लीनिंग प्रोडक्ट इस्तेमाल किया जा सकता है. बहुत तेज केमिकल या घिसने वाले क्लीनर इसे नुकसान पहुंचा सकते हैं. ग्रेनाइट की स्लैब को रोजाना साफ करने के लिए आमतौर पर हल्का डिश सोप, गुनगुना पानी और मुलायम कपड़ा सही माना जाता है. खासकर अगर स्लैब की फिनिश और चमक लंबे समय तक बनाए रखना चाहते हैं, तो हार्श क्लीनर से बचना चाहिए.
4. भारी स्लैब को लगाना भी आसान काम नहीं: ग्रेनाइट का स्लैब काफी भारी और बड़ा होता है. इसे घर तक पहुंचाना, सही शेप में काटना और किचन कैबिनेट पर फिट करना नॉर्मल काम नहीं है. गलत तरीके से उठाने या काटने पर स्लैब में क्रैक आने का खतरा रहता है. यानी ग्रेनाइट लगवाते समय सिर्फ पत्थर खरीदना काफी नहीं है, बल्कि किसी को इंस्टॉल करने के लिए भी बुलाना और सही सपोर्ट भी जरूरी है.
5. मजबूत है, लेकिन टूटना नामुमकिन नहीं: ग्रेनाइट को मजबूत और टिकाऊ मटीरियल माना जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि ये कभी भी टूट नहीं सकता है. खासकर इसके किनारे और कोने किसी भारी चीज के तेज टकराने पर चिप या क्रैक हो सकते हैं. अगर एक बार किनारे पर नुकसान हो गया, तो उसे ठीक करने के लिए प्रोफेशनल रिपेयर की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए भारी बर्तन पटकने या कोनों पर बहुत ज्यादा दबाव डालने से बचना बेहतर है.
6. बड़ी रसोई में जोड़ नजर आ सकते हैं: अगर आपकी रसोई बड़ी है या स्लैब L या U शेप में है, तो एक ही ग्रेनाइट स्लैब से पूरा हिस्सा कवर करना मुश्किल होगा. ऐसे में दो या उससे ज्यादा स्लैब जोड़ने पड़ सकते हैं. इस तरह की स्लैब्स के बीच की जॉइनिंग को प्रोफेशनल तरीके से छिपाया जा सकता है, लेकिन कुछ मामलों में सीम यानी जोड़ नजर आ ही सकता है.
खूबसूरत दिखता है, लेकिन खरीदने से पहले ये बातें जरूर देखें
ग्रेनाइट की अपनी खूबियां हैं, ये टिकाऊ है, गर्मी को अच्छी तरह सह सकता है और इसके नेचुरल पैटर्न रसोई को प्रीमियम लुक देते हैं. लेकिन इसे चुनने से पहले कीमत, सीलिंग, सफाई, इंस्टॉलेशन और रिपेयर जैसे पॉइंट्स को भी ध्यान में रखना चाहिए. यानी रसोई के लिए सिर्फ ये देखकर ग्रेनाइट न चुनें कि ये मजबूत और महंगा दिख रहा है. आपके बजट, रसोई के साइज और रोजाना के इस्तेमाल के हिसाब से इसकी देखभाल और एक्स्ट्रा खर्च भी समझना उतना ही जरूरी है.