कर्नाटक सरकार ने निरीक्षण कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे विभागों को अधिकृत निजी एजेंसियों की मदद लेने का निर्देश दिया है. बुधवार को जारी सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, सबसे पहले उन विभागों में यह व्यवस्था लागू होगी, जहां कर्मचारियों की कमी के चलते नियमित जांच समय पर नहीं हो पा रही है. इस फैसले का मकसद निरीक्षण की प्रक्रिया को तेज करना और लंबित काम को समय पर पूरा करना है. इसके लिए विभागों को निजी एजेंसियों को सूचीबद्ध करने और उनकी पात्रता तय करने की कार्ययोजना तैयार करनी होगी.
नई व्यवस्था के तहत विधिक माप विज्ञान विभाग में बाट और मापने वाले उपकरणों का सालाना निरीक्षण और मुहर लगाने का काम निजी एजेंसियों को दिया जा सकता है. खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन के तहत खाद्य कारोबारों, रेस्तरां, मेडिकल स्टोर और दवा दुकानों की जांच में भी उनकी मदद ली जाएगी. इसके अलावा, कारखाना और बॉयलर विभाग में औद्योगिक बॉयलरों की सुरक्षा जांच और सालाना प्रमाणन के काम में भी निजी एजेंसियां भूमिका निभाएंगी.
हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि निजी एजेंसियों को निरीक्षण का काम सौंपने का मतलब सरकारी अधिकारियों के अधिकार खत्म करना नहीं है. खाद्य और दवा के नमूने लेना, सामान जब्त करना और मुकदमा चलाना जैसे कानूनी अधिकार केवल सरकारी अधिकारियों के पास रहेंगे.
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लापरवाही पर ब्लैकलिस्ट होंगी एजेंसियां
सरकार ने निजी एजेंसियों के काम पर निगरानी रखने का भी फैसला किया है. उनकी रिपोर्ट और जांच के आधार पर अधिकारी ज्यादा जोखिम वाले संस्थानों पर ध्यान दे सकेंगे. साथ ही, विभागीय अधिकारी अचानक मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे और एजेंसियों की रिपोर्ट की सटीकता परखेंगे. अगर किसी एजेंसी के काम में लापरवाही, गड़बड़ी या चूक पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है.
प्रशासनिक सुधारों के तहत लिया गया फैसला
यह आदेश प्रजा सेवा विभाग के प्रमुख सचिव हर्ष गुप्ता ने कर्नाटक प्रशासनिक सुधार आयोग-2 की सिफारिशों के आधार पर जारी किया है. उन्होंने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है.
इस योजना में एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया और पात्रता के नियम शामिल होंगे. मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कर्नाटक विकास कार्यक्रम की प्रगति समीक्षा बैठक में भी इसकी समीक्षा की जाएगी.