कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार के गठन के बाद हुए पहले बड़े चुनावी मुकाबले में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विधान परिषद (एमएलसी) की सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं भारतीय जनता पार्टी को दो सीटें मिलीं, जबकि जनता दल (सेक्युलर) अपना खाता भी नहीं खोल सकी.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चुनाव नतीजों में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश क्रॉस वोटिंग का रहा. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को कुल 151 वोट मिले, जबकि उसके पास अपेक्षित 140 वोट ही थे. यानी बीजेपी और जेडी(एस) के करीब 11 विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बीजेपी के तीन और जेडी(एस) के आठ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जबकि बीजेपी के एक विधायक का वोट अमान्य घोषित किया गया.
कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों में थिप्पन्नप्पा कमकनूर, पी.वी. मोहन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद, बी.एस. शिवन्ना और विनय कार्तिक प्रकाश शामिल हैं. वहीं बीजेपी के लिंगराज पाटिल और रघु आर. ने जीत हासिल की. जेडी(एस) के एकमात्र उम्मीदवार गोविंदराजू केवल 14 वोट ही जुटा सके और चुनाव हार गए.
कांग्रेस की इस जीत को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के नेतृत्व की बड़ी सफलता माना जा रहा है. पार्टी न केवल अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने में सफल रही, बल्कि विपक्षी दलों के विधायकों का समर्थन भी हासिल करने में कामयाब रही.
दूसरी ओर बीजेपी के लिए यह नतीजा बड़ा झटका माना जा रहा है. पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर असंतोष की चर्चा पहले से थी, जिसे क्रॉस वोटिंग ने और उजागर कर दिया. वरिष्ठ बीजेपी नेता आर. अशोक ने स्वीकार किया कि पार्टी के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने भी कहा कि जांच के बाद पार्टी उचित फैसला लेगी.
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने परिणाम को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विधायकों के भरोसे की जीत बताया. उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के विधायकों ने कांग्रेस का समर्थन किया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गुप्त मतदान होने के कारण उन्हें यह जानकारी नहीं है कि किसने किसे वोट दिया.
बता दें कि 224 सदस्यीय विधानसभा (वर्तमान प्रभावी संख्या 222) में कांग्रेस के पास 135 विधायक हैं. इस जीत के बाद विधान परिषद में कांग्रेस की संख्या बढ़कर 39 हो जाएगी, जबकि बीजेपी की संख्या घटकर 28 और जेडी(एस) की संख्या 6 रह जाएगी. कांग्रेस के लिए यह जीत राजनीतिक मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है, जबकि विपक्ष के लिए यह आत्ममंथन का विषय बन गई है.