कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने गन्ना किसानों और चीनी मिल के मालिकों के साथ बातचीत सफल की. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि केंद्र सरकार की ओर से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय किए जाने के बाद किसानों को दी जाने वाली कीमत पर फैसला किया जाएगा.
गन्ना किसान प्रति टन 6,000 रुपये के प्रोत्साहन की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान के मुताबिक, किसान और मिल मालिक प्रस्ताव पर आपस में चर्चा करने के बाद दो दिनों के अंदर अपना अंतिम फैसला घोषित कर सकते हैं.
शिवकुमार ने कहा, “किसानों के साथ ही मिलों का भी बने रहना जरूरी है. किसानों की रोजी-रोटी सरकार के लिए अहम है.” उन्होंने बताया कि किसान केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से बातचीत कर चुके हैं और उन्हें भरोसा मिला है. मिल मालिक भी केंद्र की ओर से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय होने के बाद किसानों को मिलने वाली कीमत पर फैसला करने के लिए तैयार हैं.
10 घंटे तक चली बातचीत
इस मामले में सोमवार को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध और सर्किट हाउस में करीब 10 घंटे तक पांच दौर की बातचीत हुई. चर्चा सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई और आधी रात तक चली. सुवर्णा विधान सौध योजना में शुरुआती चर्चा के बाद सीएम ने दूर करने का रास्ता निकालने के लिए सर्किट हाउस में दो और दौर की बातचीत की.
मुख्यमंत्री ने कहा, “किसान और मिल मालिक समझौते के करीब पहुंच गए हैं. हम उनके समर्थन में खड़े रहेंगे. वे केंद्र सरकार से भी बात करेंगे और हम भी केंद्र से बातचीत करेंगे.” उनके मुताबिक, किसानों ने प्रस्ताव पर आपस में चर्चा करके अंतिम फैसला लेने के लिए दो दिनों का समय मांगा है.
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मुख्यमंत्री ने बताया कि आंदोलन का आपसी समाधान हो गया है, और वह किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए आगे आए हैं. उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार से बातचीत करने के लिए तैयार हैं. साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्रीय मंत्री किसानों को दिए गए आश्वासनों को पूरा करेंगे. उन्होंने किसानों के लिए राज्य सरकार का समर्थन भी दोहराया.
बैठक में शामिल हुए 70 विधायक
सोमवार को हुई बातचीत में नौ मंत्री और करीब 70 विधायक शामिल हुए. किसान नेताओं के साथ 80 में से 79 चीनी मिलों के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद रहे. मंत्री सतीश जारकीहोली, लक्ष्मण सावदी और संतोष लाड, विधायक यशवंतराय गौड़ा पाटिल और एन एच कोनारेड्डी के अलावा किसान नेताओं और चीनी मिल मालिकों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया.
करीब 10 घंटे की बातचीत के बाद किसान और चीनी मिल मालिक सहमति के करीब पहुंचे हैं. अब केंद्र की ओर से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय होने और दोनों पक्षों की अंदरूनी चर्चा के बाद किसानों को दी जाने वाली कीमत पर अंतिम फैसला सामने आने की उम्मीद है.