कर्नाटक विधानसभा में 'वंदे मातरम्' को लेकर सोमवार को विवाद की स्थिति बन गई. सदन में गीत का ऑडियो दो स्टैंजा के बाद रोक दिया गया. इसके बाद बीजेपी विधायकों ने बाकी स्टैंजा खुद गाना शुरू कर दिए. इस दौरान स्पीकर एक नोट पढ़ते रहे, जबकि बीजेपी विधायक लगातार 'वंदे मातरम्' गाते रहे.
इस पूरे विवाद की शुरुआत कर्नाटक सरकार के उस आदेश से हुई है, जिसमें सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के सिर्फ पहले दो स्टैंजा गाने की व्यवस्था की गई है. 10 सितंबर 2026 को सामने आए इस आदेश के मुताबिक, सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के पहले दो स्टैंजा गाए जाएंगे. वहीं, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में सभी छह स्टैंजा गाने की बात कही गई है.
कर्नाटक में दो स्टैंजा का नियम क्यों?
कर्नाटक सरकार के आदेश के मुताबिक, सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में गीत के पहले दो स्टैंजा ही गाए जाएंगे. बाकी चार स्टैंजा इन कार्यक्रमों में नहीं होंगे. इसी व्यवस्था को लेकर बीजेपी ने विरोध जताया है. विधानसभा में भी यही स्थिति दिखाई दी. ऑडियो दो स्टैंजा पूरे होने के बाद बंद हो गया, लेकिन बीजेपी विधायकों ने बाकी स्टैंजा खुद गाने शुरू कर दिए. स्पीकर इस दौरान अपना नोट पढ़ते रहे.
केंद्र का प्रोटोकॉल क्या कहता है?
कर्नाटक के आदेश को समझने के लिए केंद्र के निर्देश को भी देखना जरूरी है. गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को 'वंदे मातरम्' के गायन को लेकर पहली बार विस्तृत प्रोटोकॉल जारी किया था. इसमें आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए गीत के सभी छह स्टैंजा गाने या बजाने की बात कही गई थी. निर्देश में यह भी कहा गया था कि अगर किसी कार्यक्रम में 'वंदे मातरम्' और राष्ट्रगान 'जन गण मन' दोनों हों, तो पहले 'वंदे मातरम्' के सभी छह स्टैंजा गाए या बजाए जाएं. इसके बाद राष्ट्रगान होगा.
यही वजह है कि कर्नाटक के दो-स्टैंजा वाले आदेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कर्नाटक हाई कोर्ट में भी इस आदेश को चुनौती दी जा चुकी है. याचिका में राज्य सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए गए हैं.
विधानसभा में कैसे बढ़ा विवाद?
सोमवार को सदन में 'वंदे मातरम्' का ऑडियो चलाया गया. दो स्टैंजा के बाद इसे रोक दिया गया. इसके तुरंत बाद बीजेपी विधायकों ने बाकी स्टैंजा खुद गाना शुरू कर दिया. वे लगातार गीत गाते रहे, जबकि स्पीकर अपना नोट पढ़ते रहे.
इस तरह दो स्टैंजा के बाद ऑडियो रोकने का मामला सीधे विधानसभा की कार्यवाही में दिखाई दिया. कर्नाटक सरकार के आदेश, केंद्र के प्रोटोकॉल और बीजेपी के विरोध के बीच 'वंदे मातरम्' का मुद्दा अब सदन में भी बहस का विषय बन गया है.