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क्यों हाथी के गोबर में लोटते हैं जंगली कुत्ते? जान लीजिए वजह

इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ जंगली कुत्ते हाथी के गोबर पर लोटते नजर आ रहे हैं. ऐसे में जानते हैं कि जंगली कुत्तों की इस हरकत के पीछे वीडियो में जो दावा किया जा रहा है, वो कहां तक सही है.

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अक्सर शाकाहारी पशुओं के गोबर पर लोटते दिख जाते हैं शिकारी जानवर (Photo - Youtube/@ayushshuklaspeaks)
अक्सर शाकाहारी पशुओं के गोबर पर लोटते दिख जाते हैं शिकारी जानवर (Photo - Youtube/@ayushshuklaspeaks)

जंगली जानवरों के कुछ व्यवहार ऐसे होते हैं, जिसे समझना काफी मुश्किल होता है. हालांकि, उनके इन्हीं लक्षणों से पता चलता है कि वो जंगली हैं. ऐसे में कभी- कभी हमारे पालतू कुत्तों में भी ऐसे व्यवहार दिख जाते हैं जो इस बात का प्रमाण हैं कि हजारों सालों से इंसानों के नजदीक रहकर घरेलू जानवर बन जाने के बावजूद इनमें अब भी जंगलीपन वाला जीन मौजूद है. 

सोशल मीडिया पर जंगली जानवरों से जुड़े काफी वीडियो सामने आते रहते हैं, जिसमें उनके अजीबोगरीब हरकतें दिखाई देती है. ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ जंगली कुत्ते हाथी के गोबर पर लोटते दिखाई दे रहे हैं. वैसे तो इस वीडियो में दावा किया गया है कि जंगली कुत्ते अपनी गंध छिपाने के लिए ऐसी हरकत कर रहे हैं. ताकि, जब वो किसी जानवर पर हमला करने के लिए जाएं, तो उनके शिकार को शिकारी कुत्तों की गंध पता न चले. 

क्यों ऐसी हरकत करते हैं शिकारी जानवर
कई मामलों में यह तर्क सही है. सिर्फ शिकारी कुत्ते ही नहीं, तेंदुए, शेर, बाघ, लकड़बग्घे भी ऐसा करते हैं. ये मांसाहारी शिकारी जानवर भी शाकाहारी पशुओं के गोबर पर लोटते हैं, ताकि इनके शरीर की असली गंध छुप जाए और शिकार को लगे कि आसपास उनके ही कुल का कोई जानवर है. इस वजह से वह सतर्क नहीं हो पाते हैं और इन शिकारी जानवरों के लिए शिकार करना आसान हो जाता है. 

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हालांकि, कई विशेषज्ञ शिकारी जानवरों की ऐसी हरकत करने के पीछे और भी अलग- अलग तर्क देते हैं. कभी- कभी हायना या भेड़िये मरे हुए जानवरों के शवों पर भी लोटते हैं. ये जानवर ऐसे जानवरों के शवों पर भी लोटते दिखाई देते हैं, जिनका वो शिकार नहीं करते. ऐसे में यह तर्क फेल हो जाता है कि ऐसे जानवर शिकार को धोखा देने के लिए गोबर या शाकाहारी पशुओं के शव में लोटते हैं. 

कई बार लकड़बग्घे, शिकारी कुत्ते या भेड़िये को मांसाहारी पशुओं के शव पर लोटते देखा गया है. यहां तक कि एक बार एक लकड़बग्घे को एक वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट ने अजगर के शव पर लोटते देखा. जबकि, लकड़बग्घा कभी अजगर को नहीं खाता है. ऐसे में विशेषज्ञों ने काफी अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि ये शिकारी जानवर अपने समूह में संवाद के लिए भी ऐसी हरकत करते हैं. 

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जब वो किसी ऐसे पशु के गोबर या शव पर लोटकर अपने समूह में जाते हैं, जिसका वो शिकार नहीं करते, तो उनकी गंध से उनके समूह के दूसरे सदस्य सतर्क हो जाते हैं कि उनके आसपास वैसे जानवर हैं, जिनसे उन्हें खतरा हो सकता है. वहीं जब वो किसी शाकाहारी या शिकार होने वाले जानवर के गोबर या शव में लोटकर आते हैं तो उनकी गंध इस बात का संकेत देता है कि आसपास आसान शिकार मौजूद है और समूह के उस सदस्य ने शिकार के इलाके की पहचान कर ली है. 

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दूसरे जानवरों के गोबर या शव पर लोटना जंगली जानवरों का नैसर्गिक गुण होता है. कभी- कभी यह लक्षण हमें अपने पालतू कुत्तों में भी दिखाई देते हैं. जब हम उन्हें सैर पर ले जाते हैं तो वो गोबर या किसी मरे जानवर के अवशेषों पर लोटने लग जाते हैं. इससे पता चलता है कि पालतू बनने से हजारों साल पहले जब ये कुत्ते जंगली हुआ करते थे. उस समय के जंगली गुण इनमें अब भी मौजूद है.  

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