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इंसानों को डंक मारते ही मधुमक्खी क्यों मर जाती है?

मधुमक्खी जब हमें डंक मारती है तो काफी दर्द होता है. कुछ समय बाद हम दर्द से उबर जाते हैं, लेकिन मधुमक्खी को ऐसा करने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है. क्योंकि, इंसानों को डंक मारने के बाद उसकी मौत हो जाती है.

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इंसानों को डंक मारते ही मर जाती मधुमक्खी (Photo - Pexels)
इंसानों को डंक मारते ही मर जाती मधुमक्खी (Photo - Pexels)

आपने शायद यह बात कई बार सुनी होगी कि मधुमक्खी किसी इंसान को डंक मारती है तो उसकी खुद की मौत हो जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? एक छोटे से डंक की वजह से मधुमक्खी को अपनी जान क्यों गंवानी पड़ती है? इसके पीछे प्रकृति का एक बेहद दिलचस्प और हैरान कर देने वाला विज्ञान छिपा हुआ है.

अगर कोई मधुमक्खी आपको डंक मार दे, तो दर्द तो आपको होता ही है. लेकिन उस डंक की सबसे बड़ी कीमत खुद मधुमक्खी को चुकानी पड़ती है. इंसान को डंक मारने के कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो जाती है. इसके पीछे उसकी शरीर की बनावट जिम्मेदार होती है.

ऐसा क्या खास होता है मधुमक्खी के डंक में?
मधुमक्खी का डंक सामान्य सुई जैसा नहीं होता. यह खोखला और नुकीला होता है, ठीक मेडिकल इंजेक्शन की सुई की तरह. लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके किनारों पर छोटे-छोटे कांटे या हुक बने होते हैं.

इन कांटों की बनावट मछली पकड़ने वाले कांटे या हार्पून जैसी होती है. जब मधुमक्खी किसी इंसान की त्वचा में डंक मारती है, तो ये कांटे त्वचा में फंस जाते हैं और डंक को मजबूती से पकड़ लेते हैं.

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फिर डंक निकाल क्यों नहीं पाती?
इंसान की त्वचा काफी मोटी और लचीली होती है. जब मधुमक्खी डंक मारने के बाद उड़ने की कोशिश करती है, तो उसका डंक त्वचा में फंसा रह जाता है. वह उसे वापस नहीं निकाल पाती.

डंक को बाहर खींचने की कोशिश में मधुमक्खी के शरीर का निचला हिस्सा फट जाता है. उसके साथ डंक, जहर की थैली, मांसपेशियां और पेट के कुछ अंदरूनी अंग भी शरीर से अलग हो जाते हैं.यानी मधुमक्खी एक तरह से डंक मारने के बाद अपना ही अंग काटकर पीछे छोड़ देती है.डंक निकलने के दौरान मधुमक्खी के पेट के पिछले हिस्से में बड़ा घाव बन जाता है. यह नुकसान इतना गंभीर होता है कि वह ज्यादा देर तक जीवित नहीं रह पाती.

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कुछ-कुछ किसी जीव के अत्यधिक खून बहने जैसी स्थिति होती है. हालांकि मधुमक्खियों में इंसानों जैसा खून नहीं होता, लेकिन शरीर के जरूरी तरल पदार्थ और अंगों के बाहर निकल जाने से उनकी मौत हो जाती है.

डंक निकलने के बाद भी जहर छोड़ता रहता है
दिलचस्प बात यह है कि मधुमक्खी के उड़ जाने या मर जाने के बाद भी उसका डंक काम करता रहता है. त्वचा में फंसा डंक कुछ समय तक जहर छोड़ता रहता है.

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ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डंक से जुड़ी जहर की थैली और मांसपेशियां शरीर से अलग होने के बाद भी थोड़ी देर तक सक्रिय रहती हैं. वे लगातार जहर को घाव के अंदर पहुंचाती रहती हैं.

क्या हर मधुमक्खी डंक मारकर मर जाती है?
आमतौर पर शहद बनाने वाली मधुमक्खियां (हनीबी) इंसानों जैसे स्तनधारी जीवों को डंक मारने के बाद मर जाती हैं. लेकिन यदि वे किसी दूसरे कीड़े या पतली त्वचा वाले जीव को डंक मारें, तो कई बार डंक वापस निकाल सकती हैं और जीवित भी रह सकती हैं.यही वजह है कि एक छोटा सा डंक मधुमक्खी के लिए जीवन और मृत्यु का सवाल बन जाता है.

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