कांच का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई जगह होता है. घर की खिड़कियों से लेकर कार, बोतल, चश्मे और दुकानों के दरवाजों तक, हम हर दिन अलग-अलग तरह के कांच देखते हैं. इनमें से कुछ कांच बिल्कुल साफ होते हैं, जिनके आर-पार आसानी से देखा जा सकता है. वहीं कुछ कांच हरे, नीले, भूरे या दूसरे रंगों के दिखाई देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर एक ही चीज यानी कांच के रंग अलग-अलग क्यों होते हैं? क्या कांच बनाते समय उसमें रंग मिलाया जाता है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह है? दिलचस्प बात यह है कि कांच का रंग उसके अंदर मौजूद खास तत्वों और इस बात पर निर्भर करता है कि वह रोशनी के साथ किस तरह व्यवहार करता है.
सबसे पहले समझिए, कांच बनता कैसे है?
कांच बनाने के लिए मुख्य रूप से सिलिका यानी रेत का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, साधारण रेत को गर्म करके सीधे कांच नहीं बनाया जा सकता. इसके लिए रेत में सोडा ऐश और चूना पत्थर जैसी चीजें मिलाई जाती हैं. इन सभी चीजों को बहुत ज्यादा तापमान पर गर्म किया जाता है. गर्म होने पर यह मिश्रण पिघलकर एक गाढ़े तरल में बदल जाता है. इसके बाद इसे मनचाहा आकार दिया जाता है और धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है. इस तरह कांच तैयार होता है. कांच की खास बात यह है कि इसकी अंदरूनी बनावट में क्रिस्टल जैसी नियमित व्यवस्था नहीं होती. इसी वजह से इसे एक तरह का अमॉर्फस सॉलिड कहा जाता है.
ट्रांसपेरेंट कांच के आर-पार कैसे दिखाई देता है?
जब हम किसी साफ कांच से बाहर देखते हैं तो हमें दूसरी तरफ की चीजें साफ दिखाई देती हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सामान्य साफ कांच दिखाई देने वाली रोशनी के ज्यादातर हिस्से को अपने अंदर से गुजरने देता है. रोशनी जब कांच से टकराती है तो उसका कुछ हिस्सा वापस लौट जाता है, कुछ हिस्सा कांच में सोख लिया जाता है और बाकी हिस्सा दूसरी तरफ निकल जाता है.
साफ कांच में दिखाई देने वाली रोशनी का बहुत कम हिस्सा सोखा जाता है. इसलिए उसके आर-पार की चीजें दिखाई देती हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कांच रोशनी को पूरी तरह अपने अंदर से गुजरने देता है. मोटा कांच होने पर या उसमें मौजूद अशुद्धियों के कारण उसका रंग हल्का हरा या दूसरा रंग भी दिखाई दे सकता है.
कांच का रंग हरा क्यों होता है?
क्या आपने कभी मोटे कांच के किनारे को ध्यान से देखा है? कई बार वह हल्का हरा दिखाई देता है. ऐसा कांच में मौजूद लोहे यानी आयरन की थोड़ी मात्रा के कारण होता है. कांच बनाने में इस्तेमाल होने वाली रेत और दूसरे कच्चे माल में लोहे के बहुत छोटे कण मौजूद हो सकते हैं. कांच तैयार होने के दौरान ये कण उसमें रह जाते हैं. आयरन के ये कण रोशनी के कुछ रंगों को दूसरों की तुलना में ज्यादा सोखते हैं. खासकर लाल और नीले रंग की रोशनी के कुछ हिस्सों के मुकाबले हरे रंग की रोशनी ज्यादा बाहर निकल पाती है. इसी वजह से कांच हल्का हरा दिखाई देने लगता है. कांच जितना मोटा होगा, उसमें से गुजरने वाली रोशनी का रास्ता उतना ही लंबा होगा. ऐसे में हरे रंग का असर ज्यादा साफ नजर आ सकता है. यही कारण है कि कई सामान्य खिड़कियों और मोटे कांच की शीट के किनारे हरे दिखाई देते हैं.
नीले रंग का कांच कैसे बनता है?
नीले रंग का कांच बनाने के लिए उसमें खास धातुओं के ऑक्साइड मिलाए जाते हैं. इनमें कोबाल्ट ऑक्साइड एक प्रमुख उदाहरण है. इसकी थोड़ी मात्रा भी कांच को नीला रंग दे सकती है. दरअसल, अलग-अलग धातुओं के ऑक्साइड रोशनी के अलग-अलग रंगों को सोखते हैं. जब कांच में कोबाल्ट ऑक्साइड मिलाया जाता है तो वह कुछ रंगों की रोशनी को सोख लेता है और नीले रंग की रोशनी को बाहर निकलने देता है. इस कारण कांच नीला दिखाई देता है. इसी तरह कांच में इस्तेमाल होने वाले दूसरे तत्वों की मदद से हल्का नीला, गहरा नीला और कई दूसरे शेड तैयार किए जा सकते हैं.
क्या कांच को दूसरे रंगों में भी बदला जा सकता है?
कांच को सिर्फ हरा और नीला ही नहीं, बल्कि कई दूसरे रंगों में भी बनाया जा सकता है. इसके लिए कांच बनाते समय अलग-अलग धातुओं और उनके ऑक्साइड का इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के लिए:
- हरा कांच: इसे बनाने में आयरन ऑक्साइड और क्रोमियम ऑक्साइड जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
- नीला कांच: इसमें कोबाल्ट ऑक्साइड मिलाया जा सकता है.
- भूरा कांच: इसके लिए आयरन और सल्फर से जुड़े यौगिकों का इस्तेमाल किया जाता है.
- बैंगनी कांच: इसे बनाने में मैंगनीज के यौगिक इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
- लाल कांच: इसे बनाने के लिए सेलेनियम या तांबे जैसे तत्वों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
हालांकि, कांच का अंतिम रंग इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसमें इन पदार्थों की कितनी मात्रा मिलाई गई है और कांच को किस तरह तैयार किया गया है. रंगीन कांच का इस्तेमाल सिर्फ सजावट के लिए नहीं होता. कांच को अलग-अलग रंगों में बनाने का मकसद हमेशा खूबसूरती बढ़ाना नहीं होता. कई बार इसका इस्तेमाल खास जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है. उदाहरण के लिए, हरे और भूरे रंग की बोतलों का इस्तेमाल कई पेय पदार्थों और दवाओं की पैकेजिंग में किया जाता है.
ये रंग रोशनी के कुछ हिस्सों को रोकने में मदद करते हैं. इससे अंदर रखे कुछ उत्पादों को रोशनी से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है. वहीं, इमारतों में नीले या दूसरे रंगों के कांच का इस्तेमाल धूप और गर्मी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. ऐसे खास कांच सूर्य की रोशनी और गर्मी के कुछ हिस्सों को रोक सकते हैं. इससे कमरे का तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलती है.
क्या हर ट्रांसपेरेंट कांच बिल्कुल रंगहीन होता है?
हर ट्रांसपेरेंट कांच पूरी तरह रंगहीन नहीं होता. कई बार कांच देखने में बिल्कुल साफ लगता है, लेकिन उसके किनारे पर हल्का हरा या नीला रंग दिखाई देता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कांच की मोटाई बढ़ने के साथ उसमें मौजूद तत्वों का रंग ज्यादा नजर आने लगता है. इसी वजह से बाजार में लो-आयरन ग्लास भी मिलता है. इसमें लोहे की अशुद्धियां बहुत कम रखी जाती हैं, जिससे कांच सामान्य कांच की तुलना में ज्यादा साफ और रंगहीन दिखाई देता है. यानी कांच का पारदर्शी, हरा या नीला होना कोई संयोग नहीं है. इसके पीछे रोशनी, धातुओं और कांच में मौजूद तत्वों का विज्ञान काम करता है. यही वजह है कि एक ही कच्चे माल से अलग-अलग रंग और गुणों वाला कांच तैयार किया जा सकता है.