अक्सर आपने देखा होगा कि लोग अपने घर के बाहर सड़क पर गाड़ी खड़ी करने की जगह को अपनी पार्किंग समझ लेते हैं. कई लोग तो बाकायदा वहां ईंट, ड्रम या कुर्सी रखकर जगह घेर लेते हैं और दूसरे लोगों को गाड़ी खड़ी करने से रोकते हैं. लेकिन क्या घर के सामने सड़क पर मौजूद जगह सच में आपकी होती है?
अगर आप किसी घर के सामने सड़क किनारे गाड़ी खड़ी देखते हैं, तो अक्सर मन में सवाल आता है कि आखिर उस जगह पर पार्किंग का अधिकार किसका है? कई लोग अपने घर के बाहर की सड़क को अपनी प्राइवेट पार्किंग समझ लेते हैं. कुछ लोग तो सड़क पर ईंट, कुर्सी, ड्रम या अन्य सामान रखकर जगह घेर लेते हैं और दूसरों को वहां गाड़ी खड़ी करने से रोकते हैं. लेकिन सिर्फ इसलिए कि सड़क आपके घर के सामने है, क्या उस पर आपका मालिकाना हक हो जाता है? इसका जवाब है- नहीं.
घर के बाहर मौजूद सार्वजनिक सड़क आमतौर पर उस व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती, जिसके घर के सामने वह सड़क है. दिल्ली के मामले में सार्वजनिक सड़कों को लेकर कानून काफी स्पष्ट है. साथ ही, पार्किंग को लेकर नियम भी हैं, जिनका पालन वाहन मालिकों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन को भी करना होता है.
घर के सामने की सड़क किसकी होती है?
सार्वजनिक सड़क के किनारे घर होने मात्र से किसी व्यक्ति को उस सड़क पर मालिकाना हक नहीं मिल जाता. दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत सार्वजनिक सड़क पर नगर निगम का अधिकार होता है. धारा 298 के अनुसार सार्वजनिक सड़कें निगम के अधीन होती हैं. इन सड़कों का रखरखाव और नियंत्रण तय नियमों के अनुसार किया जाता है. इसका सीधा मतलब है कि घर के बाहर सड़क का होना और उस सड़क के किनारे पार्किंग की जगह का मालिक होना दो अलग-अलग बातें हैं.
व्यक्ति लंबे समय से किसी जगह पर गाड़ी खड़ी करता आ रहा है, तो इससे भी उस जगह पर उसका स्थायी अधिकार नहीं बन जाता. इसलिए अगर किसी व्यक्ति ने अपने घर के बाहर सड़क के एक हिस्से को यह कहकर घेर रखा है कि यह उसकी पार्किंग है, तो केवल ऐसा करने से वह जगह उसकी निजी संपत्ति नहीं बन जाती.
क्या सार्वजनिक सड़क पर गाड़ी पार्क करना गलत है?
ऐसा नहीं है कि सार्वजनिक सड़क पर हर तरह की पार्किंग गैरकानूनी है. कई जगहों पर नियमों के तहत सड़क किनारे वाहन खड़ा किया जा सकता है. लेकिन पार्किंग कहां और कितनी देर के लिए की जा सकती है, इसे स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के नियम तय कर सकते हैं. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 117 के तहत राज्य सरकारों को वाहन पार्किंग से जुड़े नियम बनाने का अधिकार है. इसके तहत यह तय किया जा सकता है कि किस जगह पर वाहन खड़ा किया जा सकता है और कितनी देर तक पार्किंग की अनुमति होगी. यानी सार्वजनिक सड़क पर पार्किंग अपने आप में अपराध नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि आप जहां चाहें, जितनी देर चाहें, गाड़ी खड़ी कर सकते हैं.
कब पार्किंग पर कार्रवाई हो सकती है?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 122 के तहत किसी वाहन को सार्वजनिक स्थान पर इस तरह खड़ा करना मना है, जिससे दूसरे लोगों के लिए खतरा, रुकावट या परेशानी पैदा हो. अगर कोई गाड़ी सड़क पर इस तरह खड़ी है कि ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है या लोगों की आवाजाही में बाधा आ रही है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. वहीं, धारा 127 के तहत पार्किंग नियमों का उल्लंघन करने वाले लावारिस या बिना निगरानी के वाहनों को हटाया या टो किया जा सकता है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति आपके घर के सामने गाड़ी खड़ी करता है, तो सिर्फ यह कहकर कि यह आपके घर के सामने है, आप उसे हटाने के हकदार नहीं हो जाते. लेकिन अगर वह गाड़ी आपके गेट, रास्ते या सार्वजनिक आवागमन में बाधा डाल रही है, तो नियमों के तहत शिकायत की जा सकती है.
दिल्ली में पार्किंग को लेकर क्या नियम हैं?
दिल्ली में पार्किंग को लेकर अलग से नियम बनाए गए हैं. दिल्ली पार्किंग स्थल रखरखाव एवं प्रबंधन नियम, 2019 के तहत पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है. इन नियमों के तहत सड़क के मोड़ और चौराहे के आसपास 25 मीटर के क्षेत्र में सड़क पर पार्किंग प्रतिबंधित की गई है. इसके अलावा हरित क्षेत्र, पार्क, फुटपाथ, बस स्टॉप और कुछ अन्य स्थानों पर भी पार्किंग की अनुमति नहीं होती. इन नियमों का उद्देश्य केवल गाड़ियों के लिए जगह बनाना नहीं है, बल्कि सड़क पर यातायात को सुचारू रखना, पैदल चलने वालों के लिए रास्ता सुरक्षित रखना और जाम जैसी समस्याओं को कम करना भी है.
कॉलोनी की सड़कों पर भी लागू होते हैं नियम
अक्सर लोग मानते हैं कि कॉलोनी की सड़क होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को सड़क पर पार्किंग की जगह पर विशेष अधिकार मिल जाता है. लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. दिल्ली के पार्किंग नियमों में आवासीय इलाकों की पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी प्रावधान हैं. एरिया पार्किंग प्लान में स्थानीय निवासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी RWA की सलाह को शामिल किया जा सकता है. इसका उद्देश्य यह है कि जिस इलाके में घरों की संख्या ज्यादा है और उपलब्ध पार्किंग कम है, वहां वाहनों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा करने की व्यवस्था बनाई जा सके. साथ ही कॉलोनी की सड़कों पर आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता खाली रखना भी जरूरी है.
यानी किसी कॉलोनी में पार्किंग की समस्या है तो उसका समाधान सड़क के एक हिस्से को किसी व्यक्ति की निजी पार्किंग घोषित कर देना नहीं है. इसके लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पार्किंग की व्यवस्था तय कर सकती हैं. दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस की ओर से भी ऐसे इलाकों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां अतिक्रमण, सड़क किनारे अवैध पार्किंग या गंभीर ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं ज्यादा हैं. ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करके यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने, नियमों का सख्ती से पालन कराने और अवैध पार्किंग पर रोक लगाने की कोशिश की जाती है. इससे साफ है कि पार्किंग की समस्या सिर्फ किसी एक घर या व्यक्ति की समस्या नहीं है. यह पूरे इलाके की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ा मामला है.
कोर्ट ने भी पार्किंग को गंभीर समस्या माना
सुप्रीम कोर्ट भी दिल्ली के पार्किंग संकट पर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है. एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (2019)** मामले में कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ती गाड़ियों की संख्या और जमीन की सीमित उपलब्धता के बीच पैदा होने वाली समस्या पर ध्यान दिया. कोर्ट ने माना कि पार्किंग प्रबंधन का शहरी नियोजन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है. इसका मतलब यह है कि बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के बीच पार्किंग की समस्या का समाधान व्यवस्थित योजना के जरिए किया जाना चाहिए.
कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिल्ली पार्किंग स्थल रखरखाव एवं प्रबंधन नियम, 2019 को अधिसूचित करने का निर्देश भी दिया था. कोर्ट ने यह भी माना कि प्रभावी पार्किंग नीति से भीड़भाड़, प्रदूषण और अपराध जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है.
अगर कोई आपके घर के सामने गाड़ी खड़ी कर दे तो क्या करें?
अगर कोई व्यक्ति आपके घर के सामने सार्वजनिक सड़क पर गाड़ी खड़ी कर देता है, तो सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि उसकी पार्किंग नियमों के मुताबिक है या नहीं. अगर गाड़ी सिर्फ सड़क किनारे खड़ी है और उससे किसी तरह की परेशानी या रुकावट नहीं हो रही, तो केवल घर के सामने होने के आधार पर उसे हटाने का दावा नहीं किया जा सकता. लेकिन अगर गाड़ी आपके गेट को पूरी तरह बंद कर रही है, रास्ता रोक रही है, ट्रैफिक में बाधा डाल रही है या वहां पार्किंग प्रतिबंधित है, तो संबंधित ट्रैफिक पुलिस या स्थानीय प्रशासन से शिकायत की जा सकती है. खुद से गाड़ी को नुकसान पहुंचाना, टायर की हवा निकालना या किसी तरह जबरदस्ती हटाना सही तरीका नहीं है. ऐसे मामलों में कानूनी रास्ता अपनाना बेहतर होता है.
आखिर किसकी है घर के बाहर की पार्किंग?
सीधी बात यह है कि घर के बाहर की सार्वजनिक सड़क सिर्फ इसलिए आपकी प्राइवेट पार्किंग नहीं बन जाती क्योंकि आपका घर वहां है. सड़क का प्रबंधन संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण करता है. पार्किंग की अनुमति भी उसी के नियमों के अनुसार तय होती है. अगर किसी व्यक्ति की गाड़ी आपके घर के गेट के सामने इस तरह खड़ी है कि आने-जाने में बाधा पैदा हो रही है, तो वह भी नियमों का उल्लंघन कर सकता है. इसलिए पार्किंग को लेकर अधिकार और नियम दोनों को समझना जरूरी है.
यानी न घर के सामने की हर जगह आपकी निजी पार्किंग है और न ही वहां कोई भी व्यक्ति मनमाने तरीके से गाड़ी खड़ी कर सकता है. असली अधिकार और जिम्मेदारी सड़क के नियमों और स्थानीय पार्किंग व्यवस्था से तय होती है.