घर बनाते या उसका रिनोवेशन कराते समय घर की फ्लोरिंग का चुनाव काफी अहम होता है. घर की फ्लोरिंग ऐसी होना चाहिए जो देखने में अच्छा लगे, साफ करना आसान हो और रोजमर्रा के इस्तेमाल में जल्दी खराब भी न हो. यही वजह है कि अब कई लोग पारंपरिक लैमिनेट फ्लोरिंग की जगह विनाइल फ्लोरिंग को पसंद कर रहे हैं. लैमिनेट फ्लोरिंग लंबे समय से घरों में पसंद की जाती रही है. यह लकड़ी जैसी दिखाई देती है और इसकी कीमत भी आमतौर पर किफायती होती है. लेकिन इसकी एक बड़ी परेशानी पानी और नमी है. इसी वजह से घर के ऐसे हिस्सों में जहां पानी गिरने की संभावना ज्यादा रहती है, लोग विनाइल फ्लोरिंग को बेहतर विकल्प मान रहे हैं.
लैमिनेट और विनाइल में सबसे बड़ा फर्क क्या है?
दोनों फ्लोरिंग ऊपर से देखने में लकड़ी या पत्थर जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनके अंदर इस्तेमाल होने वाली सामग्री अलग होती है. लैमिनेट फ्लोरिंग के अंदर दबाए गए लकड़ी के रेशों से बना बोर्ड होता है. अगर इसके किनारों या जोड़ से पानी अंदर चला जाए तो यह लकड़ी वाला हिस्सा पानी सोख सकता है. इसके बाद बोर्ड फूलने लगता है और कई बार उसके किनारे ऊपर उठ जाते हैं या फर्श टेढ़ा दिखने लगता है. वहीं, विनाइल फ्लोरिंग मुख्य रूप से सिंथेटिक प्रोडक्ट, जैसे पीवीसी, से बनाई जाती है. इसमें लकड़ी के रेशे नहीं होते, इसलिए पानी पड़ने पर इसके अंदर लकड़ी की तरह फूलने की समस्या नहीं होती.
लैमिनेट फ्लोरिंग
लैमिनेट फ्लोरिंग की बात करें तो कई परतों से मिलकर बनी होती है और इसकी ऊपरी सतह को लकड़ी, पत्थर या दूसरे डिजाइन जैसा लुक दिया जाता है. यह देखने में काफी आकर्षक लगती है और आमतौर पर लकड़ी के असली फर्श से कम खर्चीली होती है. इसकी सफाई भी आसान होती है, लेकिन पानी और नमी इसके लिए परेशानी बन सकती है. अगर पानी इसके किनारों या जोड़ से अंदर चला जाए तो इसकी अंदरूनी परत फूल सकती है और फर्श खराब हो सकता है. इसलिए इसे ऐसे हिस्सों में लगाना बेहतर होता है जहां पानी का संपर्क कम हो.
विनाइल फ्लोरिंग
वहीं, विनाइल फ्लोरिंग सिंथेटिक मटेरियल से बनाई जाती है और इसमें लकड़ी, मार्बल या पत्थर जैसे कई डिजाइन मिलते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पानी और नमी के मामले में लैमिनेट की तुलना में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. इसे साफ करना भी आसान होता है और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए यह एक सुविधाजनक विकल्प माना जाता है. हालांकि, हर विनाइल फ्लोरिंग पूरी तरह वाटरप्रूफ नहीं होती, इसलिए खरीदते समय उसकी क्वालिटी और निर्माता की गाइडलाइन जरूर देखनी चाहिए.
पानी वाले हिस्सों में विनाइल क्यों बेहतर माना जाता है?
किचन, एंट्री एरिया या घर के उन हिस्सों में जहां गीले जूते या पानी गिरने की संभावना रहती है, विनाइल काफी उपयोगी हो सकता है. अगर लैमिनेट के जोड़ से पानी अंदर चला जाए तो उसके अंदर का लकड़ी वाला हिस्सा खराब हो सकता है. विनाइल में यह समस्या कम होती है. यही वजह है कि नमी वाले इलाकों में लोग इसे पसंद कर रहे हैं. विनाइल फ्लोरिंग का एक फायदा इसकी आसान सफाई भी है. रोज की धूल के लिए झाड़ू या वैक्यूम किया जा सकता है.
जरूरत पड़ने पर हल्के गीले पोछे और सामान्य न्यूट्रल क्लीनर से भी इसे साफ किया जा सकता है. इसके अलावा अच्छी क्वालिटी की विनाइल फ्लोरिंग पैरों के नीचे थोड़ी नरम महसूस हो सकती है और चलते समय आवाज भी कम कर सकती है. पहले विनाइल फ्लोरिंग को देखकर आसानी से पता चल जाता था कि यह असली लकड़ी नहीं है. लेकिन अब इसकी डिजाइन काफी बदल गई है. आज बाजार में ऐसी विनाइल फ्लोरिंग मिलती है जो लकड़ी, मार्बल या स्लेट जैसी दिखाई देती है. अलग-अलग रंग, पैटर्न और डिजाइन के कारण इसे घर की इंटीरियर डिजाइन के हिसाब से चुना जा सकता है.
लेकिन हर विनाइल फ्लोरिंग एक जैसी नहीं होती
सिर्फ यह सोचकर विनाइल फ्लोरिंग खरीद लेना सही नहीं है कि यह लंबे समय तक चलेगी. इसकी मजबूती उसकी क्वालिटी, मोटाई और ऊपर लगी सुरक्षा वाली परत पर काफी निर्भर करती है. घर के बेडरूम में फर्श पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता, लेकिन एंट्री एरिया या होम ऑफिस में लगातार आवाजाही और कुर्सियों के पहिए फर्श पर ज्यादा दबाव डाल सकते हैं. इसलिए खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि जिस जगह के लिए फ्लोरिंग ली जा रही है, उसके हिसाब से वह कितनी मजबूत है.
लगाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
विनाइल फ्लोरिंग लगाने से पहले नीचे की सतह को भी अच्छी तरह चेक करना जरूरी है. फ्लोरिंग का बेस समतल और मजबूत होना चाहिए. अगर नीचे की सतह पहले से खराब या ऊबड़-खाबड़ है तो नई फ्लोरिंग लगाने के बाद भी समस्या आ सकती है. कंक्रीट या लकड़ी के नीचे नमी या पानी का रिसाव तो नहीं है, यह भी चेक करना चाहिए. इसके अलावा नए फर्श की ऊंचाई दरवाजे, चौखट और दूसरे कमरों के फर्श से कितनी रहेगी, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है.
तो क्या विनाइल ही सबसे अच्छा विकल्प है?
लैमिनेट और विनाइल दोनों के अपने फायदे हैं. अगर किसी घर में पानी और नमी की समस्या ज्यादा है तो विनाइल ज्यादा सुविधाजनक विकल्प हो सकता है. वहीं, कम नमी वाले कमरे में अच्छी क्वालिटी का लैमिनेट भी अच्छा विकल्प हो सकता है. इसलिए सिर्फ कीमत या दिखावट देखकर फर्श चुनने के बजाय कमरे की जरूरत, पानी की संभावना, आने-जाने का दबाव और फ्लोरिंग की क्वालिटी देखकर फैसला करना बेहतर है. विनाइल फ्लोरिंग का बढ़ता चलन सिर्फ इसके लुक की वजह से नहीं है.