पाइराइट एक नैचुरल खनिज है, जो आयरन सल्फाइड से बनता है. यह सोने जैसा चमकदार और पीला दिखाई देता है. इसलिए इसे 'फूल्स गोल्ड' भी कहते हैं. पाइराइट एक प्राकृतिक रूप में चट्टानों में पाया जाता है. इसके भी बड़े- बड़े खान होते हैं.
चूंकि, आयरन सल्फाइड एक ऐसा खनिज है जो रेत और चूना पत्थर जैसी चट्टानों में मौजूद सल्फर और लोहे के रिएक्शन से बनता है. यह पत्थर आमतौर पर तब बनता है जब मैग्मा चट्टानों के संपर्क में आता है.
इसे पैसे की बरसात वाला स्टोन भी माना जाता है. क्योंकि, इसका इस्तेमाल क्रिस्टल हीलिंग और फेंगशुई में होता है. पाइराइट को मेनिफेस्टेशन स्टोन माना जाता है. ऐसा विश्वास है कि इसकी ऊर्जा सकारात्मकता, नए अवसर और धन को अपनी ओर खींचती है. इसलिए लोग इसके आभूषण का इस्तेमाल करते हैं.
पाइराइट कई रूपों में पाया जाता है, लेकिन सबसे आम पीले और चमकदार रंग का होता है जो सोने जैसा दिखता है. कुछ मामलों में, पाइराइट क्वार्ट्ज क्रिस्टल के साथ पाया जाता है, जिससे वे नाजुक सुई जैसे नुकीले आकार ले लेते हैं. यह दानेदार रूपों, चपटी डिस्क या लंबे क्रिस्टल के रूप में भी पाया जा सकता है.
पाइराइट, जाहिर है, सोने से काफी हल्का होता है और ऑक्सीजन के संपर्क में न आने पर कभी-कभी हल्का चांदी जैसा पीला दिखाई देता है. ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर, यह अपना सुनहरा रंग खो देता है और इसके बजाय गहरा और अधिक धूसर हो जाता है.
पाइराइट की प्रमुख विशेषताओं में से एक इसका सोने जैसा पीला रंग, चमक और इसका आकर्षक रूप होता है. हालांकि यह सोने जैसा दिखता है, लेकिन यह सोने जितना चमकदार नहीं होता. इसके बजाय, यह थोड़ा फीका होता है और इसमें हरे रंग की हल्की झलक और काले रंग की धारियां होती हैं.
कहां होता है इस स्टोन का इस्तेमाल
पाइराइट का इस्तेमाल रत्न के रूप में किया जा सकता है. इससे फैशनेबल मोती और हार बनाए जा सकते हैं . इसे कैबोचोन के आकार में काटा जा सकता है या विभिन्न आकृतियों में तराशा जा सकता है जिनका इस्तेमाल सजावट के लिए किया जा सकता है.
आभूषण बनाने में पाइराइट का इस्तेमाल करने का एकमात्र नुकसान यह है कि यह आसानी से धूमिल हो जाता है और ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर इसका रंग जल्दी बदल सकता है. इसका सबसे ज्यादा इंडस्ट्रियल इस्तेमाल होता है. पाइराइट से सल्फ्यूरिक एसिड बनाए जाते हैं.
सजावटी इस्तेमाल के अलावा, कुछ क्षेत्र, विशेष रूप से लैटिन अमेरिका और एशिया में, पाइराइट को पॉलिश करके मिरर के रूप में उपयोग किया जाता है. इसका इस्तेमाल कागज उद्योग के लिए सल्फर डाइऑक्साइड के उत्पादन में भी किया जाता है. पाइराइट की चमक और आग पैदा करने की क्षमता इसे फ्लिंटलॉक हथियारों के निर्माण में एक महत्वपूर्ण घटक और मटेरियल बनाती है.
कहां मिलता है पाइराइट
यह पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे आम सल्फाइड खनिज है. यह भारत के अलावा स्पेन, पेरू, रूस, चीन और अमेरिका जैसी जगहों की खदानों से निकाला जाता है. स्पेन हमेशा से ही विश्व में पाइराइट का सबसे बड़ा उत्पादक रहा है. लेकिन यह इटली, चीन, रूस, पेरू, कजाकिस्तान और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विश्व के अन्य क्षेत्रों में भी पाया जाता है.
भारत में यह बिहार, राजस्थान, आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा मिलता है. बिहार के रोहतास स्थित अमझर की खान, पाइराइट का सबसे बड़ा सोर्स है.
इसकी कीमत क्या होती है?
भारत में प्राकृतिक पाइराइट स्टोन की कीमत आमतौर पर 200 से 4,000 प्रति पीस या 500 से 10,000 प्रति किलोग्राम तक होती है. पाइराइट की कीमत इसकी क्वालिटी, वजन और प्रकार पर निर्भर करती है.
कच्चा पाइराइट 200 से 1000 रुपये पीस मिल जाता है. विदेशी पाइराइट की कीमत 1000 से 5000 रुपये पीस होती है. वहीं पॉलिश किए हुए पाइराइट आभूषण के रूप में अलग- अलग कीमतों में उपलब्ध होते हैं.