Psychology Facts: क्या आपको कभी कोई सुंदर नोटबुक दिखी है और उसे देखते ही मन हुआ हो कि इसे खरीद लेना चाहिए? भले ही घर में पहले से कई नोटबुक पड़ी हों, फिर भी रंग-बिरंगे पेन, प्यारी सी डायरी या सुंदर डिजाइन वाला प्लानर देखते ही उसे लेने का मन कर जाता है. कई बार हम खुद भी सोचते हैं कि आखिर इसकी जरूरत क्या है, फिर भी दिल उस चीज को खरीदने के लिए कहता है.
अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इसे सिर्फ फिजूलखर्ची या सामान इकट्ठा करने की आदत समझना सही नहीं होगा. इसके पीछे हमारी पसंद, इमोशन और पर्सनैलिटी भी बड़ी वजह हो सकते हैं. साइकोलॉजी के मुताबिक सुंदर स्टेशनरी कई लोगों के लिए सिर्फ लिखने का सामान नहीं होती. यह उनके लिए अपनी पसंद जाहिर करने, मन की बात लिखने और खुद को थोड़ा खुश करने का एक तरीका भी हो सकती है.
सुंदर चीजें हमें अपनी सी क्यों लगती हैं?
साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि हम अक्सर वही चीजें पसंद करते हैं, जिनमें हमें अपनी पर्सनैलिटी की झलक दिखाई देती है. किसी को चमकीले रंग पसंद होते हैं तो किसी को हल्के और सादे रंग. किसी को फूलों वाली डायरी अच्छी लगती है तो किसी को सादी और सिंपल नोटबुक. यही वजह है कि जब हमें अपनी पसंद की कोई नोटबुक या पेन दिखाई देता है तो उसके साथ एक अलग तरह का जुड़ाव महसूस हो सकता है. ऐसा लगता है जैसे यह चीज हमारे लिए ही बनी है. अगर कोई व्यक्ति खुद को क्रिएटिव मानता है तो उसे सुंदर रंगों वाली स्टेशनरी ज्यादा पसंद आ सकती है. वहीं जिसे चीजों को सही से अरेंज कर रखना अच्छा लगता है, उसे प्लानर या साफ-सुथरी डायरी ज्यादा पसंद आ सकती है. यानी कई बार हम सिर्फ नोटबुक नहीं खरीद रहे होते, बल्कि अपनी पसंद का एक छोटा सा हिस्सा अपने साथ घर ला रहे होते हैं.
सुंदर पेन से लिखने में क्यों आता है मजा?
सोचिए, आपको किसी जरूरी काम की लिस्ट बनानी है. मोबाइल में लिखने के बजाय अगर आप अपनी पसंद की नोटबुक खोलकर उसमें पसंदीदा पेन से लिखते हैं तो अनुभव थोड़ा अलग हो सकता है. सुंदर कवर, अच्छा कागज और पसंदीदा पेन छोटी सी चीज को भी खास बना देते हैं. रोज का काम वही रहता है, लेकिन उसे करने का मन ज्यादा हो सकता है. कई लोगों को डायरी लिखना इसलिए भी अच्छा लगता है क्योंकि उसमें वे अपने मन की बातें लिख पाते हैं. दिनभर की भागदौड़ के बीच कुछ मिनट अपने लिए निकालना उन्हें सुकून दे सकता है. इस तरह एक छोटी सी नोटबुक सिर्फ कागज नहीं रह जाती. वह ऐसी जगह बन जाती है, जहां कोई अपने विचार, सपने, प्लान और इमोशन लिख सकता है.
स्टेशनरी देखकर बचपन क्यों याद आता है?
सुंदर नोटबुक और पेन का रिश्ता हमारी पुरानी यादों से भी हो सकता है. स्कूल के दिनों में नई कॉपी और नया पेन मिलने की खुशी शायद आपको भी याद होगी. नई कॉपी के पहले पन्ने पर नाम लिखना, साफ-सुथरी लिखावट में काम करना, पेन से लिखे शब्दों को बार-बार देखना, ये छोटी-छोटी बातें बचपन की यादों से जुड़ी होती हैं. आज जब ज्यादातर काम मोबाइल और कंप्यूटर पर होने लगा है, तब कागज पर हाथ से लिखना कई लोगों को पुराने दिनों की याद दिला सकता है. यही वजह है कि कोई सुंदर डायरी या पेन देखते ही मन में एक अपनापन पैदा हो जाता है.
कभी-कभी खुद को खुश करने के लिए भी खरीदते हैं
हर खरीदारी किसी बड़ी जरूरत के लिए नहीं होती. कई बार हम अपने लिए कोई छोटी चीज सिर्फ इसलिए लेते हैं क्योंकि उससे हमें खुशी मिलती है. जैसे कोई व्यक्ति अपनी पसंद की चाय खरीदता है, कोई पौधा घर लाता है और किसी को सुंदर स्टेशनरी खरीदना अच्छा लगता है. ये छोटी-छोटी चीजें रोजमर्रा की जिंदगी में खुशी के पल जोड़ देती हैं. सुंदर नोटबुक खरीदने के बाद उसे खोलना, उसमें कुछ लिखना या उसे अपने टेबल पर रखना भी कई लोगों को अच्छा महसूस करा सकता है.
इसका मतलब यह नहीं कि आप फिजूलखर्च हैं
अगर आपको भी सुंदर नोटबुक और पेन खरीदने का शौक है तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आप बेवजह पैसे खर्च करते हैं. हर व्यक्ति के लिए ऐसी चीजों का मतलब अलग होता है. किसी के लिए यह सिर्फ स्टेशनरी है, किसी के लिए क्रिएटिविटी का हिस्सा और किसी के लिए अपने मन को खुश करने का छोटा सा तरीका.
इसलिए अगली बार जब कोई खूबसूरत नोटबुक देखकर आपका मन उसे खरीदने का करे, तो खुद को सिर्फ यह कहकर मत रोकिए कि 'मेरे पास तो पहले से है.' हो सकता है आपको उस नोटबुक की जरूरत न हो, लेकिन उसके रंग, डिजाइन या उससे जुड़ी याद ने आपके मन में एक अच्छी भावना पैदा कर दी हो. कभी-कभी जिंदगी की खुशी बड़ी चीजों में नहीं, बल्कि ऐसी ही छोटी-छोटी चीजों में छिपी होती है. एक सुंदर नोटबुक, पसंदीदा पेन और उसमें लिखे कुछ अपने शब्द भी दिन को थोड़ा बेहतर बना सकते हैं.