scorecardresearch
 

Psychology Facts: जो लोग हमेशा Plan-B बनाकर चलते हैं, उनकी सोच कैसी होती है?

Psychology Facts: कुछ लोग जिंदगी के हर काम के लिए पहले से प्लान-B तैयार रखते हैं. लेकिन क्या यह सिर्फ ज्यादा सोचने की आदत है या इसके पीछे उनकी खास मनोवैज्ञानिक सोच होती है?

Advertisement
X
हर प्लान B बनाने वाले व्यक्ति को ओवरथिंकर कहना सही नहीं होगा. ( Photo: ITG)
हर प्लान B बनाने वाले व्यक्ति को ओवरथिंकर कहना सही नहीं होगा. ( Photo: ITG)

Psychology Facts: कुछ लोग किसी भी काम की शुरुआत करने से पहले ही सोच लेते हैं कि अगर पहला प्लान फेल हुआ तो क्या करेंगे. नौकरी का इंटरव्यू है तो दूसरी कंपनी का विकल्प तैयार, घूमने जाना है तो होटल के साथ दूसरा ठिकाना भी तय, कोई बिजनेस शुरू करना है तो नुकसान होने की स्थिति में दूसरा रास्ता भी दिमाग में तैयार. ऐसे लोगों को अक्सर कहा जाता है कि ये बहुत ज्यादा सोचते हैं, लेकिन क्या हमेशा ऐसा ही होता है?

साइकोलॉजी के नजरिए से देखें तो हर स्थिति के लिए एक वैकल्पिक रास्ता तैयार रखना कई बार व्यक्ति की अनिश्चितता से निपटने की रणनीति हो सकती है. हालांकि, अगर हर छोटी-बड़ी बात में व्यक्ति सिर्फ इस डर से दूसरा प्लान बनाता रहे कि पहला जरूर फेल होगा, तो यह सोच चिंता और तनाव से भी जुड़ सकती है.

प्लान B बनाने वाले लोग भविष्य को लेकर सतर्क रहते हैं
जो लोग हमेशा बैकअप प्लान तैयार रखते हैं, वे आमतौर पर आगे होने वाली संभावित परिस्थितियों के बारे में पहले से सोचते हैं. वे यह समझने की कोशिश करते हैं कि अगर चीजें उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुईं तो उनके पास क्या विकल्प होगा. उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति ने नौकरी के लिए आवेदन किया. वह इंटरव्यू की तैयारी पूरी करने के साथ-साथ दूसरी कंपनियों में भी आवेदन करता रहता है. इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि उसे अपनी पहली नौकरी मिलने पर भरोसा नहीं है. वह सिर्फ अपने विकल्प खुले रखना चाहता है. ऐसी सोच व्यक्ति को अचानक आने वाली परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने में मदद कर सकती है.

Advertisement

इन लोगों को अनिश्चितता पसंद नहीं होती
प्लान B की आदत का एक कारण अनिश्चितता को कम करने की कोशिश भी हो सकता है. जब किसी स्थिति का परिणाम साफ नहीं होता, तो कुछ लोगों को बेचैनी होने लगती है. ऐसे में वे सोचते हैं कि अगर यह नहीं हुआ तो दूसरा क्या किया जा सकता है? और अगर दूसरा भी नहीं हुआ तो तीसरा रास्ता क्या होगा?
इस तरह विकल्प तैयार करने से उन्हें लगता है कि स्थिति पूरी तरह उनके नियंत्रण से बाहर नहीं है. हालांकि, वास्तविक जीवन में हर चीज को पहले से नियंत्रित करना संभव नहीं होता.

ये लोग रिस्क लेने से पहले उसका हिसाब लगाते हैं
प्लान B बनाने वाला व्यक्ति जरूरी नहीं कि जोखिम लेने से डरता हो. कई बार वह जोखिम लेने से पहले उसके संभावित नतीजों के बारे में सोचता है. मान लीजिए कोई व्यक्ति नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करना चाहता है. वह नौकरी छोड़ने से पहले कुछ महीनों की बचत रखता है और यह भी सोचता है कि अगर बिजनेस उम्मीद के मुताबिक नहीं चला तो वह दोबारा नौकरी कैसे खोजेगा. यह तरीका उसे बिना सोचे-समझे फैसला लेने के बजाय संभावित जोखिमों को समझने में मदद कर सकता है.

लेकिन ज्यादा प्लानिंग परेशानी भी बन सकती है
प्लान B रखना तब तक उपयोगी हो सकता है, जब तक वह आपको आगे बढ़ने में मदद कर रहा है. समस्या तब शुरू होती है जब व्यक्ति हर समय सबसे खराब स्थिति के बारे में सोचता रहे. अगर कोई व्यक्ति हर फैसले से पहले दस अलग-अलग नतीजों की कल्पना करता है और हर नतीजे के लिए अलग योजना बनाने लगता है, तो वह फैसला लेने में ही उलझ सकता है.

Advertisement

क्या ये लोग ज्यादा सोचने वाले होते हैं?
हर प्लान B बनाने वाले व्यक्ति को ओवरथिंकर कहना सही नहीं होगा. प्लानिंग और ओवरथिंकिंग में अंतर है. प्लानिंग में व्यक्ति संभावित समस्या के बारे में सोचता है और उसका समाधान तैयार करता है. इसके बाद वह अपने काम पर आगे बढ़ जाता है. वहीं ओवरथिंकिंग में व्यक्ति एक ही स्थिति को बार-बार दिमाग में दोहराता रहता है. वह अलग-अलग नतीजों की कल्पना करता है और फैसला लेने के बाद भी सोचता रहता है कि कहीं गलती तो नहीं हो गई. यानी प्लान B बनाना अपने आप में समस्या नहीं है. असली बात यह है कि उस प्लान की जरूरत कितनी है और वह आपके फैसलों को कितना प्रभावित कर रहा है.

कभी-कभी पुराने अनुभव भी इसकी वजह होते हैं
किसी व्यक्ति के पिछले अनुभव उसकी सोच को प्रभावित कर सकते हैं. अगर किसी के साथ पहले ऐसा हुआ है कि उसने किसी एक विकल्प पर भरोसा किया और अचानक वह विकल्प खत्म हो गया, तो भविष्य में वह ज्यादा सावधानी बरत सकता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की नौकरी अचानक चली गई और उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था, तो अगली नौकरी में वह बचत करने, दूसरी नौकरी खोजते रहने या एक्स्ट्रा इनकम का रास्ता तैयार रखने पर ज्यादा ध्यान दे सकता है. इसलिए हर व्यक्ति के प्लान B के पीछे एक जैसी वजह नहीं होती.

Advertisement

प्लान B कब फायदेमंद और कब नुकसानदायक?
अगर बैकअप प्लान आपको मेंटल सिक्योरिटी देता है, जोखिम को समझने में मदद करता है और जरूरत पड़ने पर रास्ता बदलने की आजादी देता है, तो यह एक उपयोगी आदत हो सकती है. लेकिन अगर आप इस डर से कोई कदम ही नहीं उठा पा रहे कि शायद सब खराब हो जाएगा, तो यही आदत आपके लिए परेशानी बन सकती है. इसलिए बैलेंस जरूरी है.मुख्य प्लान पर काम कीजिए, जरूरी स्थिति के लिए एक व्यावहारिक बैकअप रखिए और हर छोटी संभावना के लिए पांच नए प्लान बनाने से बचिए. आखिरकार, जिंदगी में हर चीज पहले से तय नहीं की जा सकती. समझदारी सिर्फ प्लान B तैयार रखने में नहीं, बल्कि परिस्थिति बदलने पर खुद को उसके मुताबिक ढालने में भी है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement