ट्रेन में सफर करने वाले लोगों के साथ कई बार ऐसा होता है कि एक ही पीएनआर पर दो या उससे ज्यादा यात्रियों का टिकट बुक किया जाता है, लेकिन चार्ट बनने के बाद कुछ यात्रियों का टिकट कन्फर्म हो जाता है और बाकी वेटिंग में रह जाते हैं. ऐसी स्थिति में यात्रियों के सामने सवाल होता है कि क्या वेटिंग टिकट वाले साथी के साथ ट्रेन में सफर किया जा सकता है? क्या उसे अलग से जनरल टिकट लेना होगा? और अगर वह स्लीपर या एसी कोच में बैठा मिलता है, तो क्या टीटीई जुर्माना लगा सकता है?
इस सवाल का जवाब देने से पहले एक जरूरी बात समझ लें. एक ही पीएनआर पर टिकट बुक होने और सभी यात्रियों को आरक्षित कोच में सफर करने की अनुमति मिलने का मतलब हमेशा एक जैसा नहीं होता. इसके लिए टिकट का ऑनलाइन या रेलवे काउंटर से बुक होना और चार्ट बनने के बाद उसकी स्थिति जानना जरूरी है.
मई 2025 से वेटिंग टिकट को लेकर क्या नियम बताया गया?
मई 2025 में प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया कि अगर एक ही पीएनआर पर कुछ यात्रियों के टिकट कन्फर्म हैं और कुछ वेटिंग में रह जाते हैं, तो वेटिंग वाले यात्रियों को स्लीपर या एसी के आरक्षित कोच में सफर करने का अधिकार नहीं मिलता. इस मुद्दे पर रेलवे के नियमों को लेकर यात्रियों के बीच कंफ्यूजन भी सामने आया. हालांकि, इसे हर तरह के टिकट पर लागू होने वाला एक नया नियम बताने से पहले आधिकारिक स्थिति समझना जरूरी है. आईआरसीटीस के नियमों में पूरी तरह वेटिंग वाले ई-टिकट और आंशिक रूप से कन्फर्म या वेटिंग वाले ई-टिकट के बीच अंतर किया गया है.;
कुछ टिकट कन्फर्म और कुछ वेटिंग में हों तो क्या होगा?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए, चार लोगों ने एक ही पीएनआर पर टिकट बुक किया. चार्ट बनने के बाद दो यात्रियों के टिकट कन्फर्म हो गए, जबकि बाकी दो वेटिंग में रह गए. ऐसी स्थिति में यात्रियों को अपने टिकट का अंतिम स्टेटस चेक करना चाहिए. ऑनलाइन बुकिंग में अगर पूरा टिकट वेटिंग में रह जाता है, तो उसे आरक्षित कोच में यात्रा के लिए वैध नहीं माना जाता और टिकट अपने आप कैंसिल हो जाता है. लेकिन आंशिक रूप से कन्फर्म टिकट के मामले में नियमों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं.
इसलिए सिर्फ एक ही पीएनआर पर नाम होने के आधार पर यह मान लेना ठीक नहीं है कि वेटिंग वाले यात्री को भी कन्फर्म यात्री के साथ आरक्षित कोच में सफर करने की अनुमति मिल जाएगी.
क्या वेटिंग टिकट वाला यात्री जनरल कोच में जा सकता है?
अगर किसी यात्री का ऑनलाइन वेटिंग टिकट चार्ट बनने के बाद पूरी तरह वेटिंग में रह जाता है, तो वह टिकट जनरल कोच में सफर करने के लिए भी वैलिड नहीं माना जाता. जनरल कोच में सफर करना है, तो उसके लिए अलग से उचित अनारक्षित टिकट लेना चाहिए. यहां ध्यान देने वाली बात है कि जनरल टिकट लेकर आरक्षित स्लीपर या एसी कोच में बैठने की अनुमति अपने आप नहीं मिलती. यात्रियों को अपने टिकट और यात्रा की श्रेणी के हिसाब से ही सफर करना चाहिए.
क्या टीटीई जुर्माना लगा सकता है?
अगर कोई यात्री बिना वैध टिकट या अनुमति के आरक्षित कोच में सफर करता है, तो रेलवे के नियमों के अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, जुर्माना कितना होगा और कौन-सी धारा लागू होगी, यह मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है. रेलवे अधिनियम की धारा 155 खास तौर पर आरक्षित डिब्बे में अनधिकृत प्रवेश या अधिकृत यात्री के कहने पर भी वहां से न हटने जैसी परिस्थितियों से जुड़ी है. इसे हर वेटिंग टिकट वाले यात्री पर अपने आप लागू होने वाला जुर्माना बताना सही नहीं होगा.
सफर से पहले क्या करें?
चार्ट बनने के बाद PNR का स्टेटस जरूर जांचें. अगर टिकट आंशिक रूप से कन्फर्म है, तो रेलवे से अपनी स्थिति की पुष्टि कर लें. अगर ऑनलाइन टिकट पूरी तरह वेटिंग में रह गया है, तो उस पर आरक्षित कोच में सफर न करें. जनरल कोच में यात्रा करनी हो, तो अलग से वैलिट रिजर्व टिकट लें.
सोशल मीडिया पर इसे लेकर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें स्लीपर बोगी में टीटीई जितेंद्र मिश्रा टिकट चेक करते हुए एक ऐसे यात्री के पास पहुंचते हैं, जिसने एक ही पीएनआर पर दो लोगों का टिकट बुक कराया था. इनमें से सिर्फ एक यात्री का टिकट कन्फर्म हुआ था, जबकि दूसरे का टिकट कन्फर्म नहीं हुआ था. इसके बावजूद दोनों साथ सफर कर रहे थे. दूसरे यात्री ने परेशानी से बचने के लिए जनरल टिकट भी ले लिया था और स्लीपर कोच में बैठा था. जब टीटीई जितेंद्र मिश्रा वहां पहुंचे, तो उन्होंने यात्री का टिकट चेक किया. इसके बाद उन्होंने जुर्माना लगाने के बजाय उसे बताया कि इस स्थिति में जनरल टिकट लेने की जरूरत नहीं थी.
टीटीई के मुताबिक, अगर एक ही पीएनआर पर दो या उससे ज्यादा यात्रियों के टिकट बुक किए गए हैं और उनमें से कम से कम एक टिकट कन्फर्म हो गया है, तो बाकी यात्रियों की स्थिति के आधार पर भी यात्रा की अनुमति मिल सकती है. टीटीई जितेंद्र मिश्रा इस नियम के बारे में पहले भी बता चुके हैं. उन्होंने यात्री को पूरी बात समझाई और बिना जुर्माना लगाए आगे बढ़ गए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. हालांकि, ऐसे मामलों में यात्रा की अनुमति टिकट की स्थिति और रेलवे के लागू नियमों पर निर्भर करती है. इसलिए यात्रियों को सफर से पहले अपने टिकट का स्टेटस जरूर जांच लेना चाहिए.