25 सितंबर 1926 को फोर्ड ने अपनी पूरी कंपनी में हमेशा के लिए यानी स्थायी रूप से 5 वर्क डे मॉडल को लागू कर दिया था. इसके तहत कर्मचारियों के लिए सप्ताह में 5 कार्य दिवस और काम के सिर्फ 40 घंटे तय किए गए. वैसे इस कंपनी के ऑटोमोबाइल फैक्ट्री में यह व्यवस्था 4 महीने पहले 1 मई 1926 को शुरू हो गई थी, लेकिन पूरी कंपनी में इसे 25 सितंबर 1926 को लागू किया गया.
फोर्ड की सभी फैक्ट्रियों और ऑफिसों में काम करने वालों के लिए आधिकारिक तौर पर कंपनी भर में पांच दिन, 40 घंटे की कार्यसूची को स्थायी कर दिया. औद्योगिक क्रांति के दौर में फैक्ट्रियों में लोग 16- 16 घंटे काम करते थे. हर कर्मचारी को प्रतिदिन लगभग 10 से 16 घंटे काम करना पड़ता था. 1890 के दशक में फैक्ट्रियों के मेन्युफैक्चरिंग यूनिटों में काम करने वाले कर्मचारियों को सप्ताह में 100 घंटे तक काम करना पड़ता था.
ऐसे में अगर कोई फैक्ट्री प्रबंधन काम करने के लिए दिन में सिर्फ आठ घंटे तय कर दे और सप्ताह में दो दिन का अवकाश भी दे, तो यह बड़ी बात थी. साथ ही आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेत था.
1914 की शुरुआत में बढ़ती अशांति और बेरोजगारी के साथ फोर्ड मोटर के संस्थापक हेनरी फोर्ड ने अपने पुरुष कर्मचारियों को हर 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए 5 डॉलर का भुगतान करने की घोषणा की. जबकि पहले, नौ घंटे के कार्य दिवस के लिए यह दर 2.34 डॉलर निर्धारित की गई थी. कर्मचारियों के वेतन को दोगुना से ज्यादा करने से दूसरे उद्योगपति हैरान रह गए, लेकिन उत्पादन में तेजी आई.
ऐसे ही करते-करते 25 सितंबर, 1926 को फोर्ड मोटर कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया. इसके बाद वह पहली ऐसी महत्वपूर्ण कंपनियों में से एक बन गए, जिन्होंने अपनी कार्य नीति को बदलकर 40 घंटे का सप्ताह कर दिया. इसमें 5 कार्य दिवस थे और वेतन में कोई बदलाव नहीं किया गया.
1926 में वर्ल्ड्स वर्क नामक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में फोर्ड ने कहा था कि बढ़ते उपभोक्ता बाजार में अवकाश एक जरूरी चीज है, क्योंकि कामकाजी लोगों को ऑटोमोबाइल सहित उपभोक्ता उत्पादों के उपयोग के लिए पर्याप्त खाली समय की आवश्यकता होती है.फोर्ड ने कहा था कि समय आ गया है कि हम इस धारणा से मुक्त हो जाएं कि श्रमिकों के लिए अवकाश या तो 'खोया हुआ समय' है या वर्ग विशेषाधिकार है.
कहा ये भी जाता है कि हैनरी फोर्ड ने अपने कर्मचारियों की सुविधा या उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसा नहीं किया. उन्होंने महसूस किया कि अगर कंपनियों को मुनाफा कमाना है, तो ग्राहकों को खरीदारी करने की जरूरत है और खरीदारी करने के लिए, ग्राहकों को आराम करने और मौज-मस्ती करने का समय चाहिए. इसके लिए उन्हें काम से ज्यादा समय की छुट्टी की जरूरत होती है.