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इतना ऊंचा है बुर्ज खलीफा... कि ऊपर के फ्लोर में तो बदल जाता है सूरज ढलने का टाइम!

अगर आप सोचते हैं कि एक शहर में सभी लोगों के लिए सूर्यास्त का समय एक जैसा होता है, तो बुर्ज खलीफा आपको हैरान कर देगा. यहां ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोगों के लिए सूरज कुछ मिनट बाद डूबता है. इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह बेहद दिलचस्प है.

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 क्या सच में दो बार सूर्यास्त देखा जा सकता है (Photo: Pexel)
क्या सच में दो बार सूर्यास्त देखा जा सकता है (Photo: Pexel)

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की पहचान उसकी 828 मीटर ऊंचाई है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी ऊंचाई की वजह से इस इमारत के अलग-अलग फ्लोर पर सूर्यास्त का समय भी बदल जाता है? सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन यह पूरी तरह विज्ञान पर आधारित सच है.

दरअसल, पृथ्वी पूरी तरह समतल नहीं बल्कि गोलाकार है. जैसे-जैसे कोई व्यक्ति ऊंचाई पर जाता है, उसका क्षितिज (होराइजन) दूर होता जाता है. इसका सीधा असर सूर्यास्त पर पड़ता है. जमीन पर खड़े व्यक्ति को जब सूरज डूबता हुआ दिखाई देना बंद हो जाता है, तब भी 80वीं, 100वीं या 150वीं मंजिल पर खड़े व्यक्ति को सूरज कुछ देर तक नजर आता रहता है.

यही वजह है कि 828 मीटर ऊंचे बुर्ज खलीफा में ऊपर रहने वाले लोगों के लिए सूरज जमीन की तुलना में करीब 2 से 3 मिनट बाद डूबता हुआ दिखाई देता है. यही कारण है कि रमजान के दौरान यहां रहने वाले सभी लोग एक साथ इफ्तार नहीं करते.

इसलिए अलग-अलग समय पर खुलता है रोजा

साल 2011 में बीबीसी और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई के प्रमुख इस्लामी विद्वान अहमद अब्दुल अज़ीज़ अल-हद्दाद ने कहा था कि ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोगों को ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद लोगों के मुकाबले लगभग 2 मिनट बाद रोजा खोलना चाहिए. वहीं इस्लामी विद्वान मोहम्मद अल-कुबैसी के अनुसार, बुर्ज खलीफा में रहने वालों के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है.

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यह भी पढ़ें: बुर्ज खलीफा की 163वीं मंजिल तक पानी कैसे पहुंचता है? जवाब कमाल का है

ग्राउंड फ्लोर से 80वीं मंजिल तक रहने वाले लोग सामान्य सूर्यास्त के समय इफ्तार करेंगे.
80वीं मंजिल से ऊपर रहने वालों को लगभग 2 मिनट इंतजार करना होगा.
150वीं मंजिल और उससे ऊपर रहने वालों को करीब 3 मिनट बाद इफ्तार करना चाहिए.

इस्लामी विद्वानों का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है. इस्लामी परंपरा में पहले से माना जाता है कि पहाड़ जैसी ऊंची जगहों पर रहने वाले लोग अपने स्थान से सूर्यास्त होने के बाद ही रोजा खोलेंगे.

विज्ञान भी देता है यही जवाब

वैज्ञानिकों के मुताबिक, पृथ्वी की वक्रता (Curvature of Earth) की वजह से ऊंचाई बढ़ने पर सूर्य कुछ देर तक दिखाई देता रहता है. बुर्ज खलीफा जैसी ऊंची इमारत में यह अंतर करीब 2 से 3 मिनट तक पहुंच जाता है. यही कारण है कि इमारत के अलग-अलग फ्लोर पर सूर्यास्त का समय अलग महसूस होता है.

क्या सच में दो बार सूर्यास्त देखा जा सकता है?

जी हां. अगर कोई व्यक्ति पहले ग्राउंड फ्लोर से सूर्यास्त देखे और फिर तुरंत दुनिया की सबसे तेज लिफ्टों में से एक के जरिए बुर्ज खलीफा के 124वें या 148वें फ्लोर पर पहुंच जाए, तो वहां उसे कुछ देर तक सूरज फिर से दिखाई दे सकता है. इसी वजह से कई लोग कहते हैं कि बुर्ज खलीफा में एक ही दिन में दो बार सूर्यास्त देखने का अनुभव संभव है.

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