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क्या पिरामिड एलियंस ने बनाए थे? जानें क्यों उठते हैं ये सवाल

मिस्र के शानदार पिरामिड का निर्माण क्या एलियंस ने किया था? अक्सर ऐसे सवाल उठते रहते हैं. आखिर ऐसे सवाल क्यों खड़े होने लगे. ऐसे कॉन्सपिरेसी थ्योरीज के पीछे की असली वजह क्या है? चलिए जानते हैं पिरामिड निर्माण से जुड़े मजेदार किस्से.

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पिरामिड के निर्माण को लेकर उठते रहे हैं ऐसे सवाल (Photo - Pexels)
पिरामिड के निर्माण को लेकर उठते रहे हैं ऐसे सवाल (Photo - Pexels)

मिस्र में मौजूद सभी पिरामिडों में से सबसे प्रसिद्ध निस्संदेह गीजा का महान पिरामिड है. यह प्राचीन विश्व के सात अजूबों में सबसे पुराना था और एकमात्र ऐसा अजूबा है जो आज भी मौजूद है. लगभग 4,000 वर्षों तक यह दुनिया की सबसे ऊंची मानव निर्मित संरचना के रूप में खड़ा रहा. अब मिस्र में 50 से अधिक पिरामिड बचे हैं. वास्तुकला के ये विशालकाय नमूने, फिरौन की प्राचीन सभ्यता के स्थायी स्मारक हैं.

पिरामिडों की जटिलता प्राचीन मिस्र का अध्ययन करने वाले पुरातत्वविदों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है. आखिर इस सभ्यता ने इतने भव्य और तकनीकी रूप से सटीक स्मारकों का निर्माण कैसे किया? स्टोनहेंज जैसे स्मारकों की तरह ही, इन सवालों के जवाब खोजने दौरान कई चैलेंजिग थ्योरी मिलते हैं कि पिरामिडों का निर्माण किसने और कैसे किया? इनमें से ही एक कॉन्सपिरेसी थ्योरी की कहानी भी काफी प्रचलित है, जो सवाल उठाती है कि क्या प्राचीन मिस्र के पिरामिडों का निर्माण एलियंस ने किया था?

क्या पिरामिडों का निर्माण एलियंस ने किया था? 
इस सिद्धांत के अनुसार, पिरामिड दशकों तक चलने वाली निर्माण परियोजनाओं का परिणाम नहीं थे, जिनमें हजारों लोग, विशाल रसद और प्रशासनिक प्रयास, पत्थरों की लगभग असीमित आपूर्ति और कुशल वास्तुकार और इंजीनियर शामिल थे. बल्कि, इनका निर्माण एलियंस द्वारा किया गया था, या कम से कम एलियंस ने मनुष्यों को इन्हें बनाना सिखाया था.

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किसी प्राचीन सभ्यता के इतने भव्य स्मारकों के निर्माण को समझाने के लिए केवल बाहरी खगोलीय  हस्तक्षेप की थ्योरी ही एकमात्र सिद्धांत नहीं रहा है. कुछ कॉन्सपिरेसी थ्योरिस्ट के मुताबिक, समुद्र में डूब चुकी अति उन्नत सभ्यता अटलांटिस के लोगों ने इसके निर्माण में मदद की होगी. हालांकि, अटलांटिस जैसी भी कोई सभ्यता थी, इसके रहस्य से भी अब तक पर्दा नहीं उठा है. 

पिरामिडों के बारे में, उनके निर्माण से लेकर उनके अंदर क्या है? अब तक बहुत कुछ आज भी अज्ञात है, इसलिए शायद आश्चर्य की बात नहीं है कि कई गलत धारणाएं इनको लेकर पनपने लगी.  इस तरह इन अनसुलझे रहस्यों को समझाने का  प्रयास करने वालों में कई कॉन्सपिरेसी थ्योरी भी मौजूद हैं.

पिरामिड निर्माण की कॉन्सपिरेसी थ्योरी को खारिज करने वाले सबूत
पुरातत्वीय साक्ष्य दृढ़ता से यह संकेत देते हैं कि प्राचीन मिस्र के पिरामिडों का निर्माण बाहरी लोगों ने नहीं, बल्कि प्रभावी उपकरणों से लैस और प्रभावशाली प्रशासन के निर्देश पर मिस्र के श्रमिकों के बड़े समूहों ने किया था.

हिस्ट्रीएक्स्ट्रा के मुताबिक, मैनचेस्टर विश्वविद्यालय की मिस्रविज्ञानी प्रोफेसर जॉयस टाइल्डस्ले बताती हैं, अगर हम गीजा के महान पिरामिड को देखें, तो हम जानते हैं कि इसका निर्माण एक तरह की राष्ट्रीय सेवा या बेगार प्रणाली के तहत बुलाए गए श्रमिकों के समूहों द्वारा किया गया था. उनके पास अपेक्षाकृत सरल लेकिन कारगर औजार थे और श्रमिक पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े काटकर उन्हें निर्माण स्थल तक ले जाने और धीरे-धीरे पिरामिड का निर्माण करने में सक्षम थे. 

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उन्होंने कहा कि तकनीक के कुछ हिस्से आज हमें दिखाई नहीं देते – उदाहरण के लिए, रैंप – लेकिन मूल रूप से, यह विशाल मानव शक्ति ही थी जिसने इसे संभव बनाया. ग्रेट पिरामिड के स्थल के पास चूना पत्थर की खदान की मौजूदगी, साथ ही श्रमिकों के शिविर स्थलों के सबूत, यह दर्शाते हैं कि यह परियोजना कितनी व्यापक रही होगी.

 प्रोफेसर टाइल्डस्ले कहते हैं कि हमारे पास इस बात के साक्ष्य हैं कि उन्हें कैसा भोजन दिया जाता था और उन्हें किन कब्रिस्तानों में दफनाया गया था. सिर्फ पिछले 50 से 70 वर्षों में ही पिरामिड निर्माण के बारे में हमारी समझ में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. इससे पहले लंबे समय तक इसकी खोज में एक ऐसा खालीपन बना रहा, जिस वजह से कॉन्सपिरेसी सिद्धांत जड़ पकड़ने में सक्षम रहे. 

कैसे एलियन थ्योरी इतना ज्यादा प्रचलित हो गया
पिरामिड चार हजार साल से भी ज़्यादा समय से मौजूद हैं और दुनिया भर की कई सभ्यताओं में – एलियंस का विचार अपेक्षाकृत नया था. प्रोफेसर टाइल्डस्ले कहते हैं कि मेरा मानना ​​है कि यह विचार वास्तव में एचजी वेल्स द्वारा 1897 में 'द वॉर ऑफ द वर्ल्ड्स' प्रकाशित करने के बाद विकसित हुआ. इससे विज्ञान कथा पुस्तकों की एक श्रृंखला शुरू हुई.

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खास तौर पर 1898 में प्रकाशित एक पुस्तक है, 'एडिसन की मंगल पर विजय' अमेरिकी खगोलशास्त्री और लेखक गैरेट पी सर्विस ने लिखी थी. यह किताब फिक्शनल थी और इसमें लिखा था कि ग्रेट पिरामिड और स्फिंक्स मंगल ग्रह पर बन हैं. हालांकि, इसे गंभीर पुस्तक नहीं माना जाता. क्योंकि, यह विज्ञान फंतासी की किताब है और कोरी  काल्पनिक रचना है. लेकिन यह विचार कि पृथ्वी के बाहर से कोई मिस्र आया होगा और उसने पिरामिडों का निर्माण किया होगा, प्रचलित हो गया.

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1968 में स्विस लेखक एरिक वॉन डैनिकेन ने अपनी सबसे अधिक बिकने वाली किताब - "देवताओं के रथ? अतीत के अनसुलझे रहस्य" प्रकाशित की. जिसने इस सिद्धांत को लोकप्रिय बनाने में बहुत योगदान दिया कि प्राचीन अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी का दौरा किया, उनका देवताओं के रूप में स्वागत किया गया और उन्होंने प्राचीन सभ्यताओं की संस्कृतियों, धर्मों, प्रौद्योगिकियों और, निश्चित रूप से, वास्तुकला को बहुत प्रभावित किया.

यह एक ठोस तर्क है कि प्राचीन एलियंस द्वारा पृथ्वी पर आने और अपने श्रेष्ठ ज्ञान का प्रसार करने की मान्यता, कम से कम प्रारंभ में, इस बात को मानने से इनकार करने से उत्पन्न हुई कि कोई प्राचीन सभ्यता वास्तव में इतने प्रभावशाली स्मारकों का निर्माण कर सकती है. अतः, इसका श्रेय किसी बाहरी शक्ति को जाता है.

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