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ब्रिटेन में 25 अक्टूबर को एक घंटा पीछे हो जाएगी घड़ी, जानें ऐसा क्यों किया जाता है?

ब्रिटेन में 25 अक्टूबर 2026 को घड़ियां एक घंटा पीछे कर दी जाएंगी. रात के 2 बजते ही समय वापस 1 बज जाएगा. इससे लोगों को एक घंटे ज्यादा सोने का मौका मिलेगा, लेकिन शाम को अंधेरा भी जल्दी होने लगेगा. चलिए जानते हैं ऐसा क्यों होगा.

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जानिए ब्रिटेन में घड़ियों का समय क्यों बदला जाता है और इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा. ( Photo: ITG)
जानिए ब्रिटेन में घड़ियों का समय क्यों बदला जाता है और इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा. ( Photo: ITG)

सोचिए, रात के 2 बजें और अचानक घड़ी फिर से 1 बज जाए! ऐसा लगेगा जैसे समय पीछे लौट गया हो और आपको एक घंटा एक्स्ट्रा मिल गया हो. ब्रिटेन में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को कुछ ऐसा ही होने वाला है. यहां घड़ियों की सुइयां एक घंटा पीछे कर दी जाएंगी. इसके साथ ही गर्मियों में लागू रहने वाला ब्रिटिश समर टाइम (BST) खत्म हो जाएगा और ब्रिटेन फिर ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) पर लौट आएगा. लेकिन सवाल है कि आखिर ब्रिटेन में ऐसा क्यों होता है? क्या सचमुच लोगों को एक घंटा ज्यादा मिल जाता है? और भारत में बैठे लोगों के लिए इसका क्या मतलब है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं.

ब्रिटेन में साल में दो बार घड़ी का समय बदला जाता है. गर्मियों में घड़ी एक घंटा आगे कर दी जाती है, जबकि अक्टूबर के आखिरी रविवार को इसे एक घंटा पीछे कर दिया जाता है. 25 अक्टूबर को जब ब्रिटेन में रात के 2 बजेंगे, तो घड़ी का समय वापस 1 बजे कर दिया जाएगा. यानी रात के 1 बजे से 2 बजे के बीच का एक घंटा दोबारा आएगा. इसका मतलब है कि उस रात लोगों को सोने के लिए एक घंटा ज्यादा मिल सकता है. हालांकि, यह बदलाव सिर्फ घड़ी के समय में होगा, दिन में कोई अतिरिक्त घंटा नहीं जुड़ जाएगा.

आखिर ब्रिटेन में घड़ी का समय क्यों बदला जाता है?
इसका सीधा कनेक्शन सूरज की रोशनी से है. ब्रिटेन में गर्मियों और सर्दियों के दौरान दिन की लंबाई में काफी अंतर होता है. गर्मियों में दिन लंबे होते हैं. ऐसे में घड़ी एक घंटा आगे कर दी जाती है, ताकि शाम को ज्यादा देर तक रोशनी का फायदा मिल सके. इसे ब्रिटिश समर टाइम कहते हैं. वहीं, अक्टूबर में घड़ी एक घंटा पीछे कर दी जाती है. इससे सुबह के समय जल्दी उजाला होता है, लेकिन शाम को अंधेरा भी जल्दी होने लगता है. यानी घड़ी बदलने का मकसद समय को नहीं, बल्कि लोगों के रुटीन को सूरज की रोशनी के हिसाब से ढालना है.

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शाम को जल्दी छा जाएगा अंधेरा 
घड़ी का समय बदलने के बाद ब्रिटेन में लोगों को शाम के समय जल्दी अंधेरा महसूस होगा. जो लोग ऑफिस से लौटते हैं, टहलने जाते हैं या शाम को बाहर समय बिताते हैं, उनके रुटीन पर इसका असर पड़ सकता है. वहीं, सुबह स्कूल और ऑफिस जाने वालों को पहले के मुकाबले जल्दी उजाला मिल सकता है. मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट से जुड़े ज्यादातर उपकरण अपना समय अपने आप बदल लेंगे, लेकिन दीवार घड़ी, कार की घड़ी और कुछ पुराने उपकरणों में समय खुद ठीक करना पड़ सकता है.

भारत में बैठे लोगों के लिए क्या बदलेगा?
भारत में घड़ी की सुइयां बदलने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन भारत और ब्रिटेन के बीच समय का अंतर जरूर बदल जाएगा. अभी ब्रिटेन में समर टाइम लागू होने के दौरान भारत उससे साढ़े चार घंटे आगे है. 25 अक्टूबर को ब्रिटेन के घड़ियां पीछे करने के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच समय का अंतर बढ़कर साढ़े पांच घंटे हो जाएगा.
उदाहरण के लिए, ब्रिटेन में अगर दोपहर 12 बजे हैं, तो भारत में शाम के 5:30 बजे होंगे. इसका असर उन लोगों के लिए खास हो सकता है जो ब्रिटेन में रहने वाले अपने परिवार के सदस्यों से बात करते हैं या वहां की कंपनियों के साथ काम करते हैं.

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क्या भारत में भी कभी घड़ी एक घंटा आगे-पीछे होती है?
भारत में ब्रिटेन जैसी व्यवस्था नहीं है. यहां पूरे देश में एक ही मानक समय यानी इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) चलता है. गर्मी हो या सर्दी, भारत में घड़ियों का समय मौसम के हिसाब से नहीं बदला जाता. यानी ब्रिटेन में एक रात के लिए घड़ी आपको एक घंटा एक्स्ट्रा दे सकती है, लेकिन भारत में रविवार की रात रोज की तरह ही गुजरेगी.

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