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'बबीता खो तो नहीं सकती, जहां हो फोन करो...',बोला भाई, 6 दिन बाद भी दयारा बुग्याल खामोश

उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रैक पर लापता महिला ट्रैकर बबीता पांडे का छह दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियां लगातार खोज अभियान चला रही हैं. परिवार को उम्मीद है कि वह सुरक्षित होंगी, जबकि पहाड़ों की खामोशी के बीच उनके लापता होने को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं.

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'बबीता खो तो नहीं सकती, जहां हो फोन करो',बोला भाई (Photo: itg)
'बबीता खो तो नहीं सकती, जहां हो फोन करो',बोला भाई (Photo: itg)

उत्तरकाशी के विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक पर लापता हुई महिला ट्रैकर बबीता पांडे को तलाशते हुए अब छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन पहाड़ अब तक कोई जवाब नहीं दे पाए हैं. जो ट्रैक कभी अपनी खूबसूरती और सुकून के लिए जाना जाता था, वही अब सवालों, आशंकाओं और इंतजार का केंद्र बन गया है. दिन बीत रहे हैं, टीमें बदल रही हैं, सर्च एरिया बढ़ रहा है, लेकिन बबीता का कोई सुराग नहीं.

6 दिन से तलाश में कई टीमें

इस खोज अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि कई एजेंसियां लगातार मैदान में हैं. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, राजस्व विभाग, वन विभाग, डीडीएमए की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. घटना स्थल और आसपास के इलाकों में विशेष खोज प्रयास किए गए हैं तथा उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कठिन इलाकों तक पहुंच बनाई गई है. स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि खोज अभियान के लिए अतिरिक्त विशेष संसाधनों का सहारा लिया गया, हालांकि संबंधित तैनाती और भूमिका की आधिकारिक पुष्टि संबंधित एजेंसियों से ही मानी जाएगी.

सूत्रों के अनुसार ट्रैक रूट, कैंपिंग साइट, ढलानों, जंगलों और संभावित मार्गों की बार-बार जांच की जा चुकी है. यहां तक कि कुछ कठिन क्षेत्रों में विशेष खोज तकनीकों और गहन तलाशी का सहारा लिया गया, लेकिन अब तक कोई निर्णायक संकेत नहीं मिला. 

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'वो खो नहीं सकती, अनुभवी ट्रैकर है'

इस बीच परिवार के बयान ने मामले को नया आयाम दिया है. बबीता के चचेरे भाई पंकज पांडे ने आज तक से बातचीत में कहा कि बबीता कोई सामान्य पर्यटक नहीं, बल्कि एक अनुभवी ट्रैकर है. वो खो नहीं सकती, उसे ट्रैकिंग की अच्छी खासी नॉलेज है, खो भी गई तो आराम से वापस आ जाएगी. परिवार को यह मानना मुश्किल लग रहा है कि वह आसानी से जंगल में रास्ता भटक सकती हैं. पुलिस को किडनैपिंग के एंगल से भी जांच करनी चाहिए.

'अगर कहीं पर हो तो हमें फोन करो'

परिवार की ओर से अब एक नई संभावना भी सामने रखी जा रही है- क्या ऐसा हो सकता है कि बबीता किसी कारणवश खुद ही ट्रैक क्षेत्र छोड़कर निचले इलाके की ओर निकल गई हों? पंकज पांडे ने भावुक अपील करते हुए कहा- 'अगर बबीता तुम कहीं सुरक्षित हो और ये खबर देख रही हो, तो बस एक बार परिवार को फोन कर दो… कोई कुछ नहीं कहेगा.'

दयारा बुग्याल में भालू होने की आशंका

उधर स्थानीय ग्रामीणों के बीच एक और चर्चा भी सामने आई. कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि हाल के दिनों में दयारा क्षेत्र से लगे जंगलों में दो भालुओं के संघर्ष जैसी तेज दहाड़ें सुनाई दी थीं और कुछ स्थानों पर खून जैसे निशान भी देखे गए. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्थानीय लोगों ने भी इसे बबीता के मामले से जोड़कर देखने से इनकार किया है.

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फिलहाल सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं खड़ा है- क्या यह केवल एक ट्रैकिंग हादसा है? क्या बबीता किसी दूसरे रास्ते पर निकल गईं? या फिर इस कहानी का वह हिस्सा अभी सामने आना बाकी है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की? इन सवालों के जवाब फिलहाल पहाड़ों की खामोशी में छिपे हैं और पूरा उत्तरकाशी इंतजार कर रहा है.
 

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