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केदारनाथ पहुंचे 10 लाख श्रद्धालु, जोशीमठ में 20KM तक जाम... चारधाम यात्रा ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस साल नए रिकॉर्ड बना रही है. केदारनाथ धाम में सिर्फ 39 दिनों में 10 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब में भी आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा है. रिकॉर्ड भीड़ के बीच जोशीमठ समेत कई इलाकों में भारी जाम, स्वास्थ्य चुनौतियां और व्यवस्थाओं पर दबाव भी बढ़ गया है.

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39 दिन में 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे.(Photo: ITG)
39 दिन में 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे.(Photo: ITG)

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस साल नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है. बाबा केदारनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धाम के कपाट खुलने के महज 39 दिनों के भीतर 10 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों का पहुंचना अपने आप में एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है.

22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे. इसके बाद से लगातार यात्रियों की संख्या बढ़ती रही और अब यह आंकड़ा 10 लाख के पार पहुंच गया है. यात्रा सीजन के शुरुआती दौर में ही रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से साफ है कि इस बार चारधाम यात्रा को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है.

यह भी पढ़ें: बाबा केदार के दर्शन करने पहुंचे 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु, चारधाम यात्रा को लेकर भक्तों में दिखा जबरदस्त उत्साह

रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने बताया कि अब तक 10 लाख श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन यात्रा मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए लगातार काम कर रहे हैं तथा हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है.

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बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब में भी उमड़ी भारी भीड़

केदारनाथ के साथ-साथ बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब में भी श्रद्धालुओं का सैलाब देखने को मिल रहा है. अब तक 7.25 लाख से अधिक श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंच चुके हैं. खास बात यह है कि लगातार बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है.

सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब में भी इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. कई स्थानों पर बर्फबारी के बीच यात्रियों को सुरक्षा बलों और स्वयंसेवकों की मदद से रास्ता पार कराया जा रहा है. बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी कठिन मौसम के बावजूद यात्रा पूरी कर रहे हैं.

चारधाम यात्रा के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 24 लाख से अधिक श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच चुके हैं. प्रशासन लगातार व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटा है और यात्रियों की शिकायतों का तत्काल समाधान करने का दावा कर रहा है.

मैदानी इलाकों की गर्मी, पहाड़ों की ओर बढ़ता रुख

देश के कई हिस्सों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का रुख कर रहे हैं. चमोली जिले में बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, औली, नीति-माणा घाटी और अन्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है.

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पहाड़ों में कहीं बारिश तो कहीं बर्फबारी का दौर जारी है. ठंडा मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को आकर्षित कर रहा है. यही वजह है कि तीर्थयात्रियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी उत्तराखंड पहुंच रहे हैं.

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जोशीमठ में रेंग रही गाड़ियां, 20 किलोमीटर तक जाम

बढ़ती भीड़ का सबसे बड़ा असर जोशीमठ क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. यहां मारवाड़ी से गोविंदघाट और जोशीमठ से सेलंग तक कई स्थानों पर 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है. हालत यह है कि सुबह से लेकर देर रात और कई बार तड़के तीन बजे तक वाहन सड़कों पर रेंगते नजर आते हैं.

यातायात को नियंत्रित करने के लिए वन-वे सिस्टम लागू किया गया है, लेकिन यात्रियों की भारी संख्या के सामने यह व्यवस्था भी नाकाफी साबित हो रही है. पिछले एक सप्ताह से लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है और जून में भीड़ और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

जाम में फंसे यात्री भी मौसम का ले रहे आनंद

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों से आए कई श्रद्धालु जाम के बावजूद यात्रा का आनंद लेते नजर आ रहे हैं. हेमकुंड साहिब यात्रा पर आए कुछ श्रद्धालुओं ने जोशीमठ में सड़क किनारे गैस स्टोव पर चाय और मैगी बनाकर समय बिताया.

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यात्रियों का कहना है कि मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी की तुलना में उत्तराखंड का ठंडा मौसम उन्हें राहत दे रहा है. उनका कहना है कि बाबा के दर्शन के लिए निकले हैं तो जाम जैसी परेशानी उनके उत्साह को कम नहीं कर सकती.

होटल कारोबार चरम पर, कमरे मिलना मुश्किल

श्रद्धालुओं और पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ का सीधा फायदा होटल उद्योग को मिल रहा है. जोशीमठ, बदरीनाथ, गोविंदघाट और आसपास के क्षेत्रों में अधिकांश होटल और गेस्ट हाउस लगभग पूरी तरह भर चुके हैं.

होटल एसोसिएशन जोशीमठ के अध्यक्ष अजय भट्ट के अनुसार इस बार पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है. कई होटल पहले से बुक हैं और यात्रियों को अंतिम समय में कमरा ढूंढने में परेशानी हो रही है.

स्वास्थ्य चुनौतियां भी बढ़ीं, 40 मौतों की पुष्टि

रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. चमोली जिला प्रशासन के अनुसार बदरीनाथ यात्रा के दौरान अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है.

आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऊंचाई वाले इलाकों में पहुंचने के बाद स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं. वहीं जोशीमठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर गौतम के अनुसार रोजाना 20 से अधिक श्रद्धालुओं को बदरीनाथ धाम से रेफर करना पड़ रहा है.

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डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली, मुंबई और अन्य मैदानी शहरों से सीधे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहुंचने पर सांस और हृदय संबंधी मरीजों को अधिक परेशानी हो रही है. विशेषज्ञ यात्रियों को सलाह दे रहे हैं कि वे चरणबद्ध तरीके से यात्रा करें और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले निचले इलाकों में कुछ समय अवश्य रुकें.

क्या बेहिसाब भीड़ ने बढ़ा दी हैं व्यवस्थागत चुनौतियां?

स्थानीय लोगों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि इस बार यात्रा में संख्या संबंधी नियंत्रण लगभग समाप्त होने से दबाव बढ़ा है. बदरीनाथ धाम में मई और जून जैसे पीक सीजन के दौरान भागवत कथा कार्यक्रमों को भी अनुमति दी गई है. इससे श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ी है.

परिणामस्वरूप होटल कम पड़ने लगे हैं, सड़कें जाम से भर रही हैं और दर्शन व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है. वीआईपी लाइन में भी लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. आने वाले दिनों में जून के महीने में भीड़ और बढ़ने की संभावना है, ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस विशाल जनसैलाब को सुरक्षित और सुचारु तरीके से संभालने की होगी.

फिलहाल उत्तराखंड के पहाड़ों पर आस्था, पर्यटन और प्रकृति का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है, जिसने चारधाम यात्रा को एक बार फिर देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कर दिया है.

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