उत्तराखंड पुलिस के पूर्व सिपाही शेर सिंह का दो दिन पुराना एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हरिद्वार में छात्रों के समर्थन में भीम आर्मी द्वारा आयोजित जिला मुख्यालय प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे शेर सिंह ने यह बयान दिया. उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में अपना इस्तीफा लहराया था. इस दौरान उन्होंने कुमाऊं आईजी निवेदिता कुकरेती के बयान को चुनौती दी. शेर सिंह ने अपना इस्तीफा पहले ही देने, अपने निलंबन की कॉपी होने, समाज के हक की आवाज उठाने और विभिन्न गांवों में 85 से अधिक भीम पाठशालाएं चलाने का दावा करते हुए अपनी बात रखी.
आईजी के बयान पर तीखा पलटवार
वायरल वीडियो में पूर्व सिपाही शेर सिंह ने कुमाऊं आईजी निवेदिता कुकरेती के बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने खुद को हिस्ट्रीशीटर बताने वालों की हिस्ट्रीशीट खोलने का दावा किया. शेर सिंह ने बताया कि 2 अप्रैल के भारत बंद मामले में वह निर्दोष साबित हुए थे, जिसकी कॉपी उनके पास मौजूद है. उन्होंने कहा कि कोई भी किसी को बिना आधार के ऐसा टैग नहीं दे सकता.
'समाज की आवाज दबाने के लिए नहीं स्वीकारा इस्तीफा'
शेर सिंह ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा काफी पहले ही दे दिया था. हालांकि, अधिकारियों ने उसे मंजूर नहीं किया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि वह अपने समाज के हक और अधिकारों की आवाज उठाएं. उन्होंने बताया कि वह अलग-अलग गांवों में 85 से अधिक भीम पाठशालाएं भी संचालित कर चुके हैं.
जंतर-मंतर की घटना और सरकार पर गंभीर आरोप
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए शेर सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि Fast Track Court से पहले छात्रों से वार्ता की जाती तो कई जानें बच सकती थीं. उन्होंने लोगों से अपनी आने वाली नस्लों को बचाने के लिए घरों से बाहर निकलने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की.