scorecardresearch
 

'जहां से पानी टनल में घुसा, वहां पहले भी टपकता था...', चमोली हादसे पर बड़ा दावा, कंपनी पर भी उठे सवाल

उत्तराखंड के चमोली जिले में टनल हादसे के बाद अब कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं. टनल में काम करने वाले एक युवक ने दावा किया है कि जिस जगह से पानी टनल के अंदर घुसा, वहां पहले भी पानी टपकता था. यह आम बात हो गई थी.

Advertisement
X
रेस्क्यू ऑपरेशन में टीएचडीसी, एचसीसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ और जिला प्रशासन की टीमें लगी हैं. (Photo: ITG)
रेस्क्यू ऑपरेशन में टीएचडीसी, एचसीसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ और जिला प्रशासन की टीमें लगी हैं. (Photo: ITG)

चमोली के पीपलकोटी में जलविद्युत परियोजना की टनल में हादसे के बाद कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. टनल में काम करने वाले युवक अंकुश नेगी का दावा है कि हादसे से करीब 3 दिन पहले से पानी ज्यादा रिस रहा था और गंदा पानी भी आ रहा था, लेकिन कंपनी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

अंकुश के मुताबिक, हादसे के वक्त पानी के साथ करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा आई. कुछ ही मिनटों में टनल के अंदर हालात बिगड़ गए और सब कुछ तहस-नहस हो गया.

ये दावे ऐसे समय सामने आए हैं, जब मुख्यमंत्री हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे चुके हैं. वहीं, हादसे के करीब 60 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. 22 लोगों में से 12 को सुरक्षित निकाला जा चुका है. 8 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 3-3 और उत्तराखंड के 2 लोग शामिल हैं. वहीं, 2 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.

यह भी पढ़ें: 'सरकार नहीं सुन रही, अब जेल भरो आंदोलन...', रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों की हुंकार

जिस जगह से पानी टनल के अंदर घुसा वहां पर पानी पहले भी टपकता था, ये आम सी बात हो गई थी, लेकिन 13 अगस्त से 2-3 दिन पहले पानी ज्यादा आने लगा था. गंदा पानी भी टनल में आ रहा था. इसके बारे में कंपनी के लोगों को बताया था, लेकिन उन्होंने कोई सपोर्ट नहीं किया.

Advertisement

अंकुश का दावा है कि टनल के अंदर ऊपरी हिस्से में करीब 20 मीटर के दायरे में एक जगह रिप करीब एक मीटर नीचे थी. इससे वहां पानी होल्ड होता रहा. कितना पानी जमा हुआ, इसकी जानकारी अंदर काम करने वाले मजदूरों को भी नहीं थी.

Photo: PTI

उनका आरोप है कि 13 अगस्त की शाम अचानक पानी और हवा इतनी तेज आई कि टनल के अंदर सब कुछ तहस-नहस हो गया. पानी और हवा के तेज बहाव से टनल एक तरफ से ब्लॉक हो गई. हादसे के बाद टनल का एक हिस्सा पूरी तरह बंद है. 

दूसरी तरफ से मलबा हटाकर रेस्क्यू शुरू नहीं हो सका है. फिलहाल बचाव अभियान सिर्फ एक तरफ से चल रहा है. टनल के अंदर सबसे बड़ी चुनौती पानी है. 7 डिवाटरिंग पंप लगातार पानी बाहर निकाल रहे हैं, लेकिन पानी का रिसाव पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. पानी के साथ आया मलबा कई जगह दलदल में बदल चुका है.

इस वजह से रेस्क्यू टीमों को एक साथ तीन काम करने पड़ रहे हैं. पानी निकालना, मलबा हटाना और आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित रास्ता बनाना. दलदल में सामान्य तरीके से आगे बढ़ना भी मुश्किल है, क्योंकि मलबे के नीचे की स्थिति साफ नहीं दिखाई दे रही. 

Advertisement

रेस्क्यू ऑपरेशन में टीएचडीसी, एचसीसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ और जिला प्रशासन की टीमें लगी हैं. करीब 125 लोगों की टीम दो शिफ्ट में लगातार काम कर रही है.

टीएचडीसी के अनुसार 1440 मीटर चेनज पर अचानक तेज आवाज के साथ बड़ी मात्रा में पानी और मलबा टनल में आया था. हालांकि पानी का वास्तविक स्रोत क्या था, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement