उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है. शुरुआती जांच में आरोप पहली नजर में सही पाए जाने के बाद आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है. वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले की हाई लेवल जांच के आदेश देते हुए 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है.
चढ़ावा चोरी मामले में आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 और 316(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है. इससे पहले मंगलवार को प्रारंभिक जांच में आरोप पहली नजर में सही पाए जाने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था.
4 जुलाई को बीकेटीसी अध्यक्ष द्वारा जांच समिति गठित किए जाने के तीन दिन बाद, जब समिति बद्रीनाथ पहुंची, तो चढ़ावा चोरी के आरोपी और अध्यक्ष के निजी सचिव प्रमोद नौटियाल पर कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया.
एफआईआर में क्या कहा गया?
बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह प्रथम दृष्टया पुष्टि हुई कि सुबह करीब 9 बजे से 9:30 बजे के बीच प्रमोद नौटियाल ने थाली भेंट गणना स्थल से अवैध रूप से धनराशि उठाई थी. इसी आधार पर उन्हें कार्यालय आदेश के तहत निलंबित किया गया.
एफआईआर में आगे कहा गया है कि 7 जुलाई 2026 के कार्यालय आदेश के मुताबिक, संबंधित कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रमोद नौटियाल ने मंदिर की थाली भेंट में आई धनराशि को अवैध रूप से अपने निजी हित में अपने साथ ले जाने का प्रयास किया, जिसके आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है.
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जांच में क्या मिला है?
बीकेटीसी जांच समिति के मुताबिक, शुरुआती जांच में आरोप पहली नजर में सही पाए गए हैं. इसके साथ ही, जांच प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें सस्पेंड किया गया है. नौटियाल को जोशीमठ स्थित बीकेटीसी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में जांच के आदेश भी दे दिए हैं, जो अब मौजूदा जांच समिति से विवेचना अपने हाथ में ले लेगी. समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप करेंगे. इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान सदस्य होंगे.
सरकार के आदेश के मुताबिक, समिति पूरे मामले की जांच करेगी और 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी. जरूरत पड़ने पर समिति किसी भी अधिकारी या विशेषज्ञ से जानकारी ले सकेगी. इसके साथ ही, दान और चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए भी सुझाव देगी.
निर्णायक साबित होगी जांच?
3 जुलाई को भैरव सेना द्वारा देश के सबसे पवित्र चारधामों में से एक बद्रीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी का खुलासा किया गया. इसके साथ ही, बीकेटीसी के मौजूदा सीईओ सोहन सिंह ने बयान दिया की सीसीटीवी जांच में कुछ स्पष्ट नहीं दिख रहा है और उसी दिन बीकेटीसी ने बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सचिव प्रमोद नौटियाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. प्रमोद नौटियाल थाली भेंट गणना समिति का सदस्य और प्रोटोकॉल अधिकारी भी था.
जारी नोटिस में नौटियाल से पूछा गया, “मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाये गए दान व चढ़ावे की राशि की भेट गणना स्थान पर सामान्य गणना अतिरिक्त कुछ वस्तु आपने अपने मोबाइल के साथ अपने कंट्रोल में रखी गई है. ऐसा सीसीटीवी कैमरे में देखा गया.”
4 जुलाई को बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने खंडन किया की आरोपी उनका निजी सचिव नहीं है और जांच का ऐलान भी कर दिया. इस मामले के बाहर आने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ-साथ बीजेपी के सीनियर लीडर और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए चढ़ावा चोरी की निंदा की. वहीं, मंगलवार को बद्रीनाथ के कांग्रेस विधायक लखपत सिंह भुटोला अपने समर्थकों के साथ मौन धरने पर भी बैठे रहे.
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बद्रीनाथ धाम न सिर्फ उत्तराखंड के चारधामों में, बल्कि देश के प्रमुख चारधामों में भी शामिल है. करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र धाम में श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं. ऐसे स्थान पर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की बात सामने आने से लोग अचंभे में हैं. अभी राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला शांत भी नहीं हुआ था कि हिमालय में मचे शोर ने देश को हिला कर रख दिया है.
एक तरफ प्रमोद नौटियाल को सस्पेंड कर दिया है और कमिश्नर गढ़वाल की अध्यक्षता में जांच शुरू होने वाली है. तीर्थ पुरोहितों, श्रद्धालुओं और उत्तराखंड के स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी हुई है. सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.