ये उत्तर प्रदेश है. यहां कुछ भी संभव है. जी हां, ऐसा ही कुछ हुआ उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) यानि यूपी रोडवेज बसों के चेंकिंग स्टाफ के साथ. चेंकिंग स्टाफ ने एक बस की चेकिंग की तो तीन यात्रियों को बिना टिकट पाया. ऐसे में बस के कंडक्टर और ड्राईवर के खिलाफ कार्रवाई होना तय था. लेकिन कंडक्टर और ड्राईवर ने कुछ और ही ठान रखी थी.
चेकिंग स्टाप के आरोप के मुताबिक कंडक्टर ने यात्रियों को भड़का दिया कि उसकी नौकरी चली जाएगी. कंडक्टर ने कार्रवाई से बचने के लिए पहले चेकिंग स्टाफ की गाड़ी के आगे लेटने का नाटक किया. बात नहीं बनी तो बाद में ड्राईवर के साथ मिलकर उसने चेकिंग स्टाफ के तीनों सदस्यों को बंधक बनाकर बस को दौड़ा दिया. फिर कई किलोमीटर बस चलने के बाद चेकिंग स्टाफ को मीतई गांव के पास उतारा.
ये घटना हाथरस जिले के थाना सादाबाद क्षेत्र की है. यही राष्ट्रीय राजमार्ग-93 (NH-93) पर बौहरे का बासगांव के पास आगरा के ताज डिपो की एक बस को चेकिंग स्टाफ ने रुकवाया था. बस पर 70 यात्री सवार थे. चैकिंग करने पर बस के 3 यात्री बिना टिकिट मिले. इस पर कार्रवाई करते हुए चेकिंग स्टाफ ने बिना टिकिट प्रकरण बनाने के बाद कंडक्टर से मैन्युअल मार्ग पत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा. इस पर कंडक्टर ने पहले आनाकानी की और नियमों के खिलाफ हरकतों पर उतर आया.
इस मामले में बस के कंडक्टर-ड्राईवर के खिलाफ रोडवेज के आगरा क्षेत्र यातायात अधीक्षक भूप सिंह ने सरकारी काम में बाधा डालने की रिपोर्ट दर्ज कराई है.