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3 तलाक के खिलाफ लड़ाई को इन 3 महिलाओं ने अंजाम तक पहुंचाया

15 सालों तक शादी के बंधन में रहने के बाद शायरा को उसके शौहर ने 2015 में तीन तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर दिया. इसके बाद शायरा ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

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BMMA की संस्थापक जाकिया सोमन
BMMA की संस्थापक जाकिया सोमन

लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज तीन तलाक पर अपना फैसला सुना दिया है. पांच जजों की संवैधानिक पीठ में से तीन जजों ने तलाक-ए बिद्दत यानी तील तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया है. यानी इस फैसले के साथ ही देश में तीन तलाक खत्म हो गया है.

तीन तलाक की पीड़ित महिलाओं के अलावा कुछ संगठनों ने भी इस मसले पर कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं. जिनके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पक्ष भी जानें. इस केस में यूं तो कई याचिकाकर्ता हैं, मगर तीन महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने इस बहस को एक नया रूप देने का काम किया.

ये हैं वो तीन महिलाएं...

सायरा बानो

15 सालों तक शादी के बंधन में रहने के बाद सायरा को उसके शौहर ने 2015 में तीन तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर दिया. इसके बाद सायरा ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सायरा ने अपनी याचिका में तलाक-ए बिदत (एक साथ तीन बार तलाक बोलकर तलाक देना), बहुविवाह और निकाह हलाला को संविधान के मौलिक अधिकारों के आधार पर गैरकानूनी घोषित करने की मांग की. सायरा के शौहर ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला देते हुए इन तीनों बिंदुओं का विरोध किया. सायरा उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं.

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पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहां ने अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. 30 साल की इशरत ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके पति ने दुबई से ही फोन पर तलाक दे दिया. अपनी याचिका में इशरत ने कोर्ट में कहा है कि उसका निकाह 2001 में हुआ था और उसके चार बच्चे भी हैं जो उसके पति ने जबरन अपने पास रख लिए हैं.

याचिका में इशरत ने बच्चों को वापस दिलाने और उसे पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की है. इशरत ने कहा है कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है. याचिका में कहा गया है कि ट्रिपल तलाक गैरकानूनी है और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन है.

जाकिया सोमन भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संस्थापक हैं. इनके संगठन ने लगभग 50 हज़ार मुस्लिम महिलाओं के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा था. ज्ञापन में ट्रिपल तलाक को ग़ैर क़ानूनी बनाने की मांग की गई थी. इस ज्ञापन पर मुस्लिम समाज के कई मर्दों ने भी हस्ताक्षर किए थे. खास बात ये है कि ये संस्था पिछले 11 सालों से मुस्लिम महिलाओं के बीच काम कर रही है.

इस संस्था ने देश के 10 राज्यों में मुस्लिम महिलाओं के बीच सर्वे किया था. ये सर्वे करीब 4700 महिलाओं पर किया गया. 2012 में सस्था ने दिल्ली में पहली पब्लिक मीटिंग की, जिसमें देशभर से करीब 100 महिलाएं ऐसी आईं जो ट्रिपल तलाक से पीड़ित थीं.

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इन तीनों महिलाओं के अलावा आफरीन और दूसरी कई महिलाओं ने भी कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ याचिका दायर की थीं.

 

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