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श‍िवसेना ने मोदी सरकार से पूछा- महंगाई के राक्षस को बोतल में बंद क्यों नहीं किया?

शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की जमकर खबर ली है. गुरुवार के अंक में छपे संपादकीय में पार्टी ने लिखा है कि महंगाई अब जनसामान्य के गले में फांसी का फंदा बन चुकी है. दो दिन पहले ही पार्टी ने कश्मीर और सीमा पर बढ़ती आतंकी घटनाओं पर भी नरेंद्र मोदी की सरकार को कोसा था.

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शि‍वसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे
शि‍वसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे

शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की जमकर खबर ली है. गुरुवार के अंक में छपे संपादकीय में पार्टी ने लिखा है कि महंगाई अब जनसामान्य के गले में फांसी का फंदा बन चुकी है. दो दिन पहले ही पार्टी ने कश्मीर और सीमा पर बढ़ती आतंकी घटनाओं पर भी नरेंद्र मोदी की सरकार को कोसा था.

'भयंकर महंगाई' शीर्षक से लिखे गए संपादकीय में ने लिखा है कि सत्ता में आने के एक साल बाद भी नई सरकार महंगाई को रोकने में असमर्थ दिख रही है, जबकि पिछली सरकार में महंगाई का ठीकर मनमोहन सिंह के माथे पर फोड़ना सरल बन चुका था. पार्टी ने लिखा है, 'नई गुल्ली-डंडे वाली सरकार के कार्यकाल को भी एक वर्ष पूरा होने को है. नई सरकार ने जादुई छड़ी घुमाकर अभी तक महंगाई के राक्षस को बोतल में बंद नहीं किया.'

संपादकीय में दाल, प्याज और सब्जि‍यों की कीमत का जिक्र करते हुए लिखा गया है, 'आम आदमी यह सवाल पूछना चाहता है कि क्या यह सत्ता परिवर्तन महंगाई के राक्षस को अपनी छाती पर सवार करने के लिए किया गया था?' शि‍वसेना ने आगे लिखा है कि यूपीए के शासनकाल में अर्थवेत्ता मनमोहन सिंह की ख‍िल्ली उड़ाना तमाम लोगों का शौक बन चुका था.

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'कीमतों को देखकर बेचैन हो रहा मन'
शि‍वसेना ने लेख को जनभावना बताते हुए लिखा है कि दाल समेत खाद्यानों की बढ़ती कीमतों को देखकर मन बेचैन हो रहा है. पहले से ही अकाल पीड़ि‍त है. जनता चारों तरफ से अग्नि‍डाह को भोगने के लिए मजबूर है. देवेंद्र फड़नवीस सरकार पर निशाना साधते हुए लेख में लिखा गया है, 'महाराष्ट्र सरकार का पहला जन्मदिन आने वाला है. राज्य पर सुख-समृद्धि‍ और सस्ताई के अच्छे दिनों की बरसात हो, इस खातिर ही सत्ता परिवर्तन हुआ था.'

है कि नई सरकार ने मंत्रालय का जो गृह प्रवेश किया, वह किस मुहूर्त पर हुआ इसका शोध पहले ही दिन से जारी है. सूखा ग्रस्त महाराष्ट्र में सरकार ने आम लोगों पर 1600 करोड़ रुपये का नया कर भार लाद दिया है. आम नौकरी-पेशा और 'रोज कुआं खोदो, रोज पानी पियो' की स्थ‍िति को प्राप्त गरीब की आय और खर्च का संतुलन साधना असंभव हो चुका है.'

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