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सूट-बूट में समस्या हो तो राहुल लंगोट में गांठ बांध इंडिया गेट के सामने आएं: शि‍वसेना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 'सूट-बूट की सरकार' जैसी शब्दावली का प्रयोग करने पर शिवसेना ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया है.

शि‍वसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की फाइल फोटो शि‍वसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की फाइल फोटो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 'सूट-बूट की सरकार' जैसी शब्दावली का प्रयोग करने पर शिवसेना ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया है. मुखपत्र 'सामना' के सोमवार अंक में शिवसेना ने लिखा है कि सूटकेस की तुलना में सूट-बूट की सरकार अच्छी है और परिधान समस्या है तो राहुल गांधी लंगोट में गांठ बांधकर इंडिया गेट के सामने आएं और आदर्श निर्माण करें.

अपने चिर-परिचित अंदाज में पार्टी ने मुखपत्र में लिखा है कि मोदी के सामने अगर 100 राहुल गांधी भी आ जाएं तो टिक नहीं पाएंगे. 'फिर लंगोट में घूमें क्या?' शीर्षक के साथ लिखे गए संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है, '56 दिन की रहस्यमई छुट्टी के बाद राहुल गांधी के व्यवहार-बोलने में जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है वह उल्लेखनीय है. राहुल गांधी हिलने, डुलने और बोलने लगे हैं, जिसके कारण कांग्रेस पार्टी में यदि चैतन्य का झरना बहने लगा है. लेकिन मोदी की महालहर के सामने यह झरना टिकेगा क्या, यह सवाल है.'

सूटकेस से बेहतर है सूट-बूट
संपादकीय में प्रधानमंत्री की ओर से राहुल को दिए गए जवाब का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि सूटकेस की सरकार की तुलना में सूट-बूट की सरकार अच्छी है. पीएम ऐसी टिप्पणी के करते ही कांग्रेस और उनके बगलबच्चों ने जिन सूटकेसों को छुपाकर रखा होगा वे भी थर्रा उठी होंगी. पैसों की राजनीति ही सूटकेस की राजनीति होती है. इस तरह लबालब भरे हुए सूटकेस इधर से उधर दिल्ली में घुमाए जाते थे, यह आलम पूरी दुनिया को पता है. कांग्रेस का सूटकेस नोटों से लबालब भरकर ‘नजर’ करने के लिए होते हैं, ऐसी परंपरा उनकी रही है.

घोटालों का जिक्र
सामना में कांग्रेस राज के घोटालों का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि 100 राहुल भी आ जाएं तो भी मोदी के तोपखाने के सामने वे नहीं टिक पाएंगे. मोदी सरकार की प्रशंसा करते हुए पार्टी ने लिखा है कि सिर्फ सालभर में मोदी ने जो धड़ाकेबाज निर्णय लिए हैं और पूरी दुनिया में देश की शान बढ़ाई है और इस कारण कांग्रेस वालों की बोलती बंद हो गई है. कांग्रेस नेता अहमद पटेल पर निशाना साधते हुए संपादकीय में लिखा है, 'मोदी के ऐसा कहते ही कि भूमि अधिग्रहण विधेयक मेरे लिए प्रतिष्ठा या जीने-मरने का सवाल नहीं है, अहमद पटेल के कंठ से स्वर फूटा. किसानों की प्रतिष्ठा और जीने-मरने की चिंता अहमद पटेल को कब से होने लगी? किसानों की सबसे अधिक दुर्दशा ‘सूटकेस’ शासन में हुई और उस राज के बादशाह कौन थे?'

शि‍वसेना ने आगे लिखा, 'अगर कांग्रेस को लगता है कि देश के उद्योगपति, कॉपरपोरेट क्षेत्र के लोग सूट-बूट का त्याग कर कफनी और लंगोट में घूमें तो सबसे पहले राहुल गांधी, अहमद पटेल और मनमोहन वगैरह मंडली कल से लंगोट की गांठ मारकर इंडिया गेट के सामने आएं और आदर्श निर्माण करें. अर्थात राहुल क्या और उनके सुर में सुर मिलानेवाले उनके चेले क्या?'

पार्टी ने लिखा कि सूट-बूट एक वैश्विक पोशाक है. बेढ़ंगी वेशभूषा में घूमकर दुनिया में प्रतिष्ठा नहीं बढ़ती. मोदी के कार्यकाल में देश को एक नई चमक प्राप्त हुई है. वैश्विक अर्थमंच पर हिंदुस्थान के सूट-बूट वाले आत्मविश्वास के साथ टहल रहे हैं और उसका लाभ देश की आर्थिक उन्नति के लिए हो रहा है, ऐसा हमारा दृढ़ विचार है.'

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