आरक्षण नीति की समीक्षा की बात कर भले ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कई राजनीतिक दलों के निशाने पर हों, लेकिन शिवसेना ने उनका 'अभिनंदन' किया है. पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के बुधवार के अंक में लिखा है कि सरसंघचालक ने जनभावना को जुबान देने का काम किया है.
शिवसेना ने भागवत पर पलटवार करने वाले और नेताओं को भी निशाने पर लिया है. पार्टी ने 'सामना' के संपादकीय में लिखा है, 'आरक्षण पुनर्विचार के मुद्दे पर कुछ लोगों ने बुझते चूल्हे में फिर से लकड़ी लगाने का काम किया है. अब कौन क्या भूमिका लेना चाहता है, यह उसका अपना सवाल है.'
लेख में आगे लिखा गया है कि स्वयं को पीड़ित-शोषित वर्ग का स्वयंभू तारणहार मानने वाले राजनीतिक दलों ने भागवत पर अपने बयानों के माध्यम से जोरदार प्रहार किया. यह प्रहार करने समय उनकी एक आंख बिहार की मतपेटी पर टिकी हुई है.
बीजेपी को भी घेरा
शिवसेना ने नेताओं के बयान और इसके ठीक बाद बीजेपी की ओर से सफाई पर भी निशाना साधा है. संपादकीय में लिखा गया है, 'बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने भी तत्काल पत्रकार सम्मेलन आयोजित कर स्वयं को से दूर करार दिया. तत्काल घोषित किया गया कि आरक्षण नीति पर पुनर्विचार की कोई आवश्यकता नहीं है. इसके पीछे भी बिहार के विधानसभा चुनावों का गणित होगा.'