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रेलवे कायाकल्प काउंसिल की दूसरी बैठक लेंगे टाटा, गैरजरूरी खर्चों पर होगा विचार

भारतीय रेलवे को वर्ल्ड क्लास बनाने की कोशिश में लगे उद्योगपति रतन टाटा कायाकल्प कांउसिल की दूसरी बैठक मंगलवार को लेंगे. कायाकल्प काउंसिल की ये दूसरी बैठक होगी. पहली बैठक 13 मई को हुई थी.

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Ratan Tata
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भारतीय रेलवे को वर्ल्ड क्लास बनाने की कोशिश में लगे उद्योगपति रतन टाटा कायाकल्प कांउसिल की दूसरी बैठक मंगलवार को लेंगे. कायाकल्प काउंसिल की ये दूसरी बैठक होगी. पहली बैठक 13 मई को हुई थी.

कायाकल्प काउंसिल की बैठक के एजेंडे में इस बार भारतीय रेलवे की कार्यक्षमता के बारे में विस्तार से बात की जाएगी. भारतीय रेलवे की तुलना जापान, जर्मनी, चीन, रूस और यूरोपीय देशों के रेल नेटवर्क से की जाएगी.

क्या हैं रेलवे के सामाजिक बोझ?
कायाकल्प मीटिंग में इस बात पर विस्तार से चर्चा होगी कि इस समय रेल यात्रियों को किस तरह की सुविधाएं मिल पा रही हैं और उनकी शिकायत कहां पर और कैसी हैं. इस पर विचार होगा कि रेलवे पर किस तरह के सामाजिक बोझ हैं और रेल कर्मचारियों को किस तरह के वाजिब फायदे दिए जा रहे हैं और कहां गैर जरूरी खर्च किए जा रहे हैं. इन सबके बीच किस तरह का संतुलन कायम करके रेलवे को अत्याधुनिक बनाया जाए, इस पर विचार होगा. रतन टाटा की अध्यक्षता में बनी कायाकल्प काउंसिल इस बात पर भी विचार करेगी कि रेलवे को रफ्तार देने में कौन सी चीजें बाधा बन रही हैं.

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अब तक नहीं हुए हैं ठोस बदलाव
मोदी सरकार की रेलवे का कायाकल्प करने की योजना है और इसके लिए रोडमैप तैयार करने के लिए की जिम्मेदारी रतन टाटा को दी गई है. भारतीय रेलवे ये तय करेगी की दुनिया के सफल रेल नेटवर्क की तुलना में वो अपने आप को कहां खड़ा पाती है. इसके साथ ही काउंसिल ने रेलवे के तमाम स्टेक होल्डर्स से भी इस बाबत सुझाव मांगे हैं कि रेलवे की बेहतरी के लिए क्या किया जाना चाहिए.

कायाकल्प काउंसिल की पिछली बैठक में इस पर चर्चा हुई कि रेलवे अपने संसाधनों में ही कैसे कायाकल्प करे. साथ ही, दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले रेलवे में क्या कमियां हैं और रेल कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए क्या किया जाए, इस पर भी बात हुई.

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने पिछले साल दिसंबर में मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद रेलवे के कायाकल्प के दावे हवा में हैं, हालांकि अब तक कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ है. इतना जरूर है कि रेल मंत्री ने आमूल-चूल बदलाव के लिए दर्जन भर से ज्यादा समितियां बना दी हैं.

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