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RTI के तहत जानकारियां साझा करने से कन्नी काटते हैं कई मंत्रालय

देश में सूचना का अधिकार (RTI) लागू हुए एक दशक हो चुके हैं, इसके बावजूद कई मंत्रालय अभी भी जरूरी जानकारियां साझा करने से कन्नी काट जाते हैं. एक रिपोर्ट में इस तथ्य का खुलासा हुआ है.

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नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

देश में सूचना का अधिकार (RTI) लागू हुए एक दशक हो चुके हैं, इसके बावजूद कई मंत्रालय अभी भी जरूरी जानकारियां साझा करने से कन्नी काट जाते हैं. एक रिपोर्ट में इस तथ्य का खुलासा हुआ है.

'कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव' ने स्टडी में पाया है कि कई सरकारी विभाग केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) से अहम जानकारियां ही नहीं, बल्कि बुनियादी बातें भी शेयर नहीं करना चाहती हैं. स्टडी इस बात को लेकर की गई कि विभागों के पास RTI के कितने आवेदन आए, इनमें से कितने के जवाब दिए गए और कितने खारिज कर दिए गए.

स्टडी से पता चला है कि कई विभाग CIC को अनिवार्य सालाना रिपोर्ट नहीं देते. स्टडी के मुताबिक, एक-चौथाई से ज्यादा सार्वजनिक संस्थाएं CIC को रिपोर्ट नहीं सौंपती हैं. कानून बनने से लेकर अब तक साल 2005-06 में सबसे ज्यादा RTI आवेदन जमा कराए गए थे. यह पाया गया है कि कई मंत्रालयों में आरटीआई आवेदनों को खारिज करने की दर हर साल बढ़ती जा रही है.

बहरहाल, इतना तो है कि अच्छे बदलाव के लिए केवल अच्छे कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि इसे अच्छी नीयत के साथ पूरी तरह लागू किया जाना सबसे जरूरी है.

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