कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल और पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज का आज निधन हो गया है. 82 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. हंसराज भारद्वाज कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे. वहीं कल सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
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परिवार के मुताबिक कार्डियक अरेस्ट की वजह से हंसराज भारद्वाज का निधन हुआ है. हंसराज भारद्वाज का अंतिम संस्कार कल सोमवार को शाम 4:00 बजे किया जाएगा. उनके परिवार ने बताया कि दिल्ली के निगम बोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
पीएम मोदी ने जताया दुख
हंसराज भारद्वाज के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हंसराज भारद्वाज के निधन पर दुख व्यक्त किया. प्रधानमंत्री कार्यालय ने पीएम मोदी के हवाले से ट्वीट किया करते हुए कहा, 'पूर्व मंत्री हंसराज भारद्वाज के निधन से दुखी. दुख की इस घड़ी में मेरे विचार उनके परिवार और शुभचिंतकों के साथ हैं. ओम शांति.'
Anguished by the passing away of former Minister Shri Hans Raj Bhardwaj. My thoughts are with his family and well-wishers in this hour of grief. Om Shanti: PM
— PMO India (@PMOIndia)
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने भी शोक व्यक्त किया.
कर्नाटक और केरल के पूर्व राज्यपाल और पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री श्री हंसराज भारद्वाज जी के निधन का समाचार मिला। भारद्वाज जी का निधन राजनैतिक
जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर हंसराज जी को अपने श्री चरणों में स्थान दे।
विनम्र श्रद्धांजलि
— Lok Sabha Speaker (@loksabhaspeaker)
19 मई 1937 को हरियाणा में जन्मे हंसराज भारद्वाज ने यूपीए के कार्यकाल के वक्त कानून मंत्री के रूप में सबसे लंबा वक्त बिताया था. हंसराज भारद्वाज 22 मई 2004 से 28 मई 2009 तक कानून मंत्री रहे हैं. इसके अलावा भारद्वाज दूसरे ऐसे कानून मंत्री थे, जिनका आजादी के बाद सबसे लंबा कार्यकाल रहा.
राज्यपाल भी रहे
हंसराज भारद्वाज कानून मंत्री के बाद राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. भारद्वाज कर्नाटक और केरल के राज्यपाल रहे हैं. भारद्वाज 2009 से 2014 तक कर्नाटक के राज्यपाल रह चुके हैं. वहीं 2012-13 तक वो केरल के राज्यपाल भी रहे हैं.
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इसके अलावा हंसराज भारद्वाज 1982, 1994, 2000 और 2006 में राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं. वहीं कांग्रेस नेता हंसराज भारद्वाज सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के तौर पर भी अपनी पहचान रखते थे.