Earliest Sunrise India: भारत में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक जगह है, जहां आप अपनी फैमिली और फ्रेंड्स के साथ घूमने जा सकते हैं. शिमला, मनाली, मसूरी और केरल के अलावा भी इंडिया में खूबसूरत जगहों की कोई कमी नहीं है. जब भी सूर्योदय देखने की बात आती है, तो अक्सर समुद्र किनारे या पहाड़ों की चोटियों का ख्याल आता है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे, जहां का सनराइज देखने के बाद आपको एक अलग ही सुकून मिलेगा.
भारत के नॉर्थ-ईस्ट में एक ऐसी जगह है, जहां सनराइज देखने के लिए लोग रात में ही पहाड़ों की ओर निकल पड़ते हैं. चारों तरफ घने जंगल, ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां और इनके बीच उगता सूरज इस जगह के नजारे को बेहद खास बना देता है. यह जगह अरुणाचल प्रदेश का डोंग गांव और डोंग वैली है.
भारत में सबसे पहले सूरज कहां दिखाई देता है?
अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित डोंग वैली को भारत में सबसे पहले सूर्योदय देखने वाली खास जगहों में गिना जाता है. यह इलाका वालॉन्ग के पास और लोहित नदी के आसपास स्थित है. देश के बाकी हिस्सों की तुलना में यहां सूरज की पहली किरणें काफी जल्दी दिखाई देती हैं.
डोंग को खास पहचान साल 1999 के आसपास मिली थी, जब इसे भारत में सबसे पहले सनराइज देखने वाली जगह के तौर पर खास पहचान मिली. साल 2000 की शुरुआत में भी बड़ी संख्या में लोग यहां नए साल का पहला सनराइज देखने पहुंचे थे.
सूर्योदय देखने के लिए करना पड़ता है ट्रेक
डोंग में सनराइज देखना कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आराम से होटल की खिड़की से देखा जा सके. वहां सूर्योदय देखने का मजा ही सबसे अलग होता है, इसी वजह से लोग वहां पर अंधेरे में पहाड़ी रास्तों पर ट्रेक करते हुए एक ऐसे व्यू पॉइंट तक पहुंचना होता है, जहां से घाटी और क्षितिज का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है.
जैसे-जैसे रात का अंधेरा कम होता है, पहाड़ों के पीछे आसमान का रंग बदलने लगता है. इसके बाद जब सूरज की पहली किरणें घाटी को रोशन करती हैं, तो पूरा नजारा यादगार बन जाता है. हालांकि सूर्योदय का सही समय मौसम और साल के समय के अनुसार बदलता रहता है, इसलिए सफर से पहले लोकल लेवल पर समय और रास्ते की जानकारी लेना बेहतर है.
डोंग में इन जगहों की भी करें सैर
डोंग की खूबसूरती केवल सनराइज तक सीमित नहीं है. यहां पहुंचने के बाद आसपास की कई शानदार जगहों को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं.
वालॉन्ग
डोंग से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित वालॉन्ग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और पहाड़ी वातावरण के लिए जाना जाता है.
किबिथू
भारत के पूर्वी छोर के नजदीक बसा यह इलाका अपनी ज्योग्राफिकल स्थिति और पहाड़ी नजारों के कारण खास है.
लोहित नदी
घाटी के बीच बहती लोहित नदी इस पूरे इलाके की खूबसूरती को और बढ़ा देती है. नदी किनारे आप कुछ समय बिता सकते हैं, जहां आपको शांति मिलेगी.
हरे-भरे पहाड़
देवदार और चीड़ जैसे पेड़ों से ढके पहाड़, घुमावदार रास्ते और दूर तक फैली घाटियां यहां की सफर को खास बनाते हैं.
मेयोर समुदाय
इस इलाके में रहने वाले मेयोर समुदाय की स्थानीय संस्कृति और परंपराएं भी यहां आने वाले लोगों को अपनी तरफ अट्रैक्ट करते हैं.
क्यों खास है यह इलाका
डोंग भारत-चीन-म्यांमार की सीमा के बेहद संवेदनशील इलाके के करीब स्थित है. यही वजह है कि यहां की सफर करते समय स्थानीय प्रशासन के नियमों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना जरूरी है. कुछ इलाकों में जाने के लिए अतिरिक्त परमिशन की जरूरत भी हो सकती है.